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बैंक लॉकर लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

कीमती सामान सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर लेते समय आरबीआई (RBI) के नए नियमों, सालाना किराए और हिडन चार्जेस को समझना जरूरी है। आइए आपको बताते हैं लॉकर लेते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

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Bank Locker

अपने सोने-चांदी के गहने, जायदाद के जरूरी कागजात और अन्य कीमती सामानों को घर पर रखने के बजाय बैंक लॉकर (Bank Locker) में रखना हमेशा से सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता रहा है। लेकिन अक्सर लोग यह सोचते हैं कि बैंक में खाता खुलवाया, लॉकर का रेंट दिया और चाबी मिलते ही काम खत्म हो गया। अगर आप भी साल 2026 में एक नया बैंक लॉकर लेने की सोच रहे हैं, तो रुकिए! बैंक के लॉकर एग्रीमेंट पर आंख मूंदकर साइन करने से पहले आपको भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई गाइडलाइंस और कुछ छिपे हुए शुल्कों (Hidden Charges) को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। आधी-अधूरी जानकारी के कारण कई बार ग्राहकों को बाद में पछताना पड़ता है।

इन बातों का रखें ध्यान

सालाना रेंट और टर्म डिपॉजिट

सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात सालाना रेंट और टर्म डिपॉजिट (Fixed Deposit) की शर्त को समझना है। बैंक लॉकर का किराया उसके साइज (Small, Medium, Large) और बैंक की लोकेशन (शहरी या ग्रामीण इलाका) के आधार पर अलग-अलग होता है। अक्सर जब आप लॉकर मांगने जाते हैं, तो बैंक कर्मचारी आपसे एक बड़ी रकम की एफडी (FD) करवाने की जिद करने लगते हैं। यहाँ आपको आरबीआई का नियम पता होना चाहिए। आरबीआई के अनुसार, बैंक आपसे केवल उतनी ही राशि की फिक्स डिपॉजिट (FD) की मांग कर सकता है जो 3 साल के लॉकर रेंट और किसी आपातकालीन स्थिति में लॉकर को तोड़ना (Break-open) पड़े, तो उसके खर्च को कवर कर सके। बैंक आपको इसके अलावा किसी अन्य बड़ी म्यूचुअल फंड स्कीम, इंश्योरेंस पॉलिसी या अतिरिक्त भारी एफडी को खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

हिडन चार्जेस

दूसरी जरूरी बात लॉकर से जुड़े हिडन चार्जेस (Hidden Charges) की है, जिनकी जानकारी अक्सर एग्रीमेंट साइन करते समय सामने नहीं आती। लॉकर लेते समय केवल सालाना किराया ही एकमात्र खर्च नहीं होता। इसके साथ आपको एकमुश्त रजिस्ट्रेशन फीस (One-time Registration Charge) देनी पड़ सकती है। इसके अलावा, साल भर में लॉकर को ऑपरेट करने (खोलने और बंद करने) की भी एक लिमिट तय होती है। उदाहरण के लिए, कई बैंक साल में 10 से 12 बार लॉकर विजिट मुफ्त देते हैं, लेकिन उसके बाद हर एक्स्ट्रा विजिट पर ₹100 से ₹500 तक का चार्ज वसूलते हैं। इसके साथ ही, लॉकर के किराए पर जीएसटी (GST) अलग से लागू होता है। अगर आपसे गलती से चाबी खो जाती है, तो नई चाबी बनवाने और लॉकर को कानूनी रूप से तोड़ने का पूरा खर्च भी आपको ही उठाना पड़ेगा। इसलिए लॉकर लेते समय इन सभी शुल्कों की लिस्ट बैंक से जरूर मांग लें।

क्या रख सकते हैं बैंक लॉकर में?

तीसरा और सबसे सख्त नियम यह जानना है कि लॉकर में आप क्या रख सकते हैं और क्या नहीं। नए नियमों के मुताबिक, बैंक लॉकर का इस्तेमाल केवल गहने, प्रॉपर्टी के पेपर्स, वसीयत और जीवन बीमा पॉलिसियों जैसे कीमती सामानों को सुरक्षित रखने के लिए ही किया जा सकता है। आप अपने बैंक लॉकर में भारी मात्रा में कैश या करेंसी नोट जमा करके नहीं रख सकते। इसके अलावा किसी भी तरह के हथियार, विस्फोटक सामग्री, नशीले पदार्थ, सड़ने-गलने वाली चीजें (Perishable items) या कोई भी गैर-कानूनी सामान लॉकर में रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि बैंक को किसी संदिग्ध गतिविधि का अंदेशा होता है, तो वे कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आपके लॉकर की जांच कर सकते हैं।

ऑपरेशन और नॉमिनेशन

चौथी बात लॉकर के संचालन (Operation) और नॉमिनेशन सुविधा से जुड़ी है। नया लॉकर लेते समय 'नॉमिनी' (Nominee) का नाम दर्ज कराना कभी न भूलें। भगवान न करे यदि खाताधारक के साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो खाते में दर्ज नॉमिनी या कानूनी वारिस को लॉकर में रखा सामान आसानी से मिल जाता है। अगर नॉमिनी नहीं होगा, तो परिवार को उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ जाएंगे। इसके साथ ही, यह भी ध्यान रखें कि लॉकर लेने के बाद उसे लंबे समय तक बिना ऑपरेट किए न छोड़ें। यदि आप लगातार 1 से 3 साल तक (आपकी रिस्क कैटेगरी के आधार पर) अपना लॉकर एक बार भी नहीं खोलते हैं और उसका रेंट भी बकाया रहता है, तो बैंक को कानूनी तौर पर आपके लॉकर को तोड़ने और उसका एग्रीमेंट रद्द करने का पूरा अधिकार होता है।

चोरी पर कौन करेगा भरपाई

आखिरी और सबसे बड़ी राहत देने वाली बात है चोरी या नुकसान की स्थिति में बैंक की जवाबदेही। कई लोग मानते हैं कि लॉकर में रखे सामान की जिम्मेदारी बैंक की नहीं होती, लेकिन आरबीआई के नए नियमों ने बैंकों की जवाबदेही तय कर दी है। यदि बैंक की लापरवाही, स्टाफ के फ्रॉड, आग लगने, चोरी, डकैती या बिल्डिंग गिरने की वजह से आपके लॉकर का सामान गायब या नष्ट होता है, तो बैंक अपनी जिम्मेदारी से मुकर नहीं सकता। ऐसी स्थिति में बैंक को अपने ग्राहक को लॉकर के सालाना किराए का 100 गुना (100x Compensation) मुआवजा देना होगा। उदाहरण के लिए, यदि आपके लॉकर का सालाना किराया ₹3,000 है, तो बैंक को नुकसान की भरपाई के रूप में आपको ₹3,000,00 रुपये (3 लाख) देने होंगे। हालांकि, भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं (Natural Calamities) में यह नियम लागू नहीं होता। इन सभी नियमों को अच्छे से पढ़कर और पूरी पारदर्शिता के साथ ही नया लॉकर एग्रीमेंट साइन करें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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