Urban Challenge Fund : केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ( Manohar Lal ) ने बुधवार को शहरी विकास से जुड़ी एक बड़ी योजना की शुरुआत की है। उन्होंने अर्बन चैलेंज फंड (UCF) के संचालन संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह फंड देश के शहरों में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं को तेज करने के लिए बनाया गया है। इस योजना का उद्देश्य शहरों में बड़े निवेश को बढ़ावा देना और शहरी स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
1 लाख करोड़ रुपये का अर्बन चैलेंज फंड क्या है?
सरकार ने इस फंड के तहत कुल 1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस राशि का उपयोग देश भर में शहरी विकास परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। यह फंड केवल सरकारी अनुदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद बाजार से भी बड़ा निवेश जुटाना है। दिशानिर्देशों के अनुसार, केंद्र सरकार कुल परियोजना लागत का अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही योगदान देगी। बाकी राशि राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों को मिलकर वहन करनी होगी। इस योजना में कम से कम 50 प्रतिशत फंडिंग बाजार आधारित स्रोतों से जुटाने की बात कही गई है, जैसे नगरपालिका बॉन्ड, बैंक लोन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल।
कुल 4 लाख करोड़ रुपये तक निवेश का लक्ष्य
सरकार का अनुमान है कि इस योजना के माध्यम से कुल मिलाकर करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है। यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से लेकर 2030-31 तक लागू रहेगी। इसे जरूरत पड़ने पर तीन साल और बढ़ाया जा सकता है। इस फंड का बड़ा हिस्सा यानी 90,000 करोड़ रुपये सीधे परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर खर्च किया जाएगा। इसके अलावा 5,000 करोड़ रुपये परियोजना निर्माण और क्षमता निर्माण के लिए रखे गए हैं।
कर्ज भुगतान गारंटी उप-योजना की शुरुआत
सरकार ने इस मौके पर 5,000 करोड़ रुपये की कर्ज भुगतान गारंटी उप-योजना (CRGSS) भी शुरू की है। यह योजना खास तौर पर उन शहरी निकायों के लिए है जो विकास परियोजनाओं के लिए ऋण लेते हैं। इस योजना के तहत सरकार ऋण की गारंटी देगी, जिससे शहरी निकायों को बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेना आसान हो जाएगा। इसका खास फायदा छोटे शहरों, दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों, पहाड़ी क्षेत्रों और उत्तर-पूर्वी राज्यों को मिलेगा।

शहरी विकास को लेकर बड़ा कदम
शहरों के विकास में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ेगी
अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी वित्तीय व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना और परियोजनाओं में पारदर्शिता लाना है। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। नगरपालिका बॉन्ड और PPP मॉडल के जरिए निजी निवेश को आकर्षित किया जाएगा, जिससे शहरों में सड़क, पानी, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास तेजी से हो सके।
सरकार का दृष्टिकोण और भविष्य की योजना
Ministry of Housing and Urban Affairs के अनुसार, यह योजना भारत के शहरी विकास के दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव है। मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह फंड सिर्फ पैसा देने की योजना नहीं है, बल्कि इसका मकसद शहरों को आत्मनिर्भर और निवेश के लिए तैयार बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले 5 से 6 महीनों में राज्यों और शहरी निकायों को इस फंड के तहत राशि जारी करना शुरू कर दिया जाएगा।
अर्बन चैलेंज फंड और कर्ज गारंटी योजना भारत के शहरों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल बड़े शहरों को फायदा होगा, बल्कि छोटे और मध्यम शहरों में भी बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के जरिए शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत, आधुनिक और निवेश के लिए आकर्षक बनाया जाए।
