Gold Price Forecast : सोने की कीमतों में तेजी का दौर कुछ समय के लिए थम गया है। लेकिन वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का मानना है कि यह केवल एक छोटा सा ब्रेक है, सोने का तेजी का सफर खत्म नहीं हुआ है। बैंक के एक्सपर्ट्स टोनी किम के अनुसार आने वाले समय में सोना नया रिकॉर्ड बना सकता है। आइए समझते हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई और आगे क्या उम्मीद है।
सोने की कीमतों में ठहराव क्यों आया?
सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के दो मुख्य कारण हैं। पहला अमेरिका के केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने की जगह सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाना पसंद करते हैं, क्योंकि बॉन्ड से उन्हें ब्याज मिलता है जबकि सोने से कोई नियमित आय नहीं होती। दूसरा, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है। तेल महंगा होने से भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करते हैं, अपनी मुद्रा (रुपये) को मजबूत बनाए रखने में व्यस्त हैं। इस वजह से एशियाई देशों से सोने की मांग कुछ कम हुई है।
केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार सोने के पक्ष में सबसे मजबूत बात यह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से उभरते देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपनी संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए सोना जमा करना शुरू कर दिया है। पहले दुनिया के केंद्रीय बैंक हर साल करीब 400 से 500 टन सोना खरीदते थे। अब यह आंकड़ा बढ़कर 1,000 टन से भी ऊपर पहुंच गया है। जब कुल वार्षिक उत्पादन में से एक बड़ा हिस्सा केंद्रीय बैंक खुद खरीद लेते हैं, तो आम बाजार, ज्वेलरी और निवेशकों के लिए सोना कम बचता है। इस वजह से सोने की कीमतें भविष्य में आसानी से ऊपर जा सकती हैं।
क्या ब्याज दरें बढ़ने से हमेशा सोना गिरता है?
आमतौर पर माना जाता है कि ब्याज दरें बढ़ने पर सोने के दाम गिरते हैं। लेकिन लंबी अवधि में यह नियम हमेशा लागू नहीं होता। सरकारी खर्चों और वित्तीय घाटे के कारण बॉन्ड की यील्ड (रिटर्न) बढ़ती है, तो निवेशकों का कागजी मुद्रा (फिएट करेंसी) से भरोसा कम होने लगता है। ऐसे समय में निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मानते हैं और उसमें निवेश बढ़ाते हैं।
सोना बनाम चांदी: कौन सा विकल्प बेहतर है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने के मुकाबले चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलाटिलिटी) बहुत अधिक होता है। चांदी की आधी से ज्यादा मांग उद्योगों से आती है। हालांकि चांदी की कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती हैं, लेकिन संस्थागत निवेशक और केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से सोने पर ही भरोसा जताते हैं। इसलिए बुनियादी तौर पर सोना ही अधिक सुरक्षित निवेश माना जाता है।
आगे क्या रणनीति होनी चाहिए?
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि सोने के लिए 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर एक मजबूत आधार की तरह काम करेगा। इस स्तर के आसपास केंद्रीय बैंक और बड़े संस्थान फिर से खरीदारी शुरू कर सकते हैं। आने वाले समय में अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों (CPI) और फेडरल रिजर्व के फैसलों से बाजार में थोड़ी उथल-पुथल रह सकती है। लेकिन जो निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए गिरावट के समय धीरे-धीरे सोना खरीदना एक अच्छा रणनीति हो सकती है।
