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Explained: अक्षय तृतीया पर क्यों महंगा हो जाता है सोना? पिछले 10 साल के ट्रेंड में छुपा है जवाब

Akshaya Tritiya 2026: अक्सर अक्षय तृतीया पर सोना महंगा हो जाता है। पिछले 10 वर्षों में इस त्योहार से पहले तेजी का ट्रेंड दिखा है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

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अक्षय तृतीया पर क्यों महंगा होता है सोना?
Authored by: Ramanuj Singh
Updated Apr 16, 2026, 13:25 IST

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया हिंदू रीति रिवाज में बेहद शुभ दिन माना जाता है। अक्षय का अर्थ होता है कभी न खत्म होने वाला यानी इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य स्थायी फल देता है। यही वजह है कि इस दिन सोना खरीदना (Gold Prices) खास शुभ माना जाता है। भारत में सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि इस दिन सोने-चांदी की खरीदने से समृद्धि और धन में वृद्धि होती है। इस धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता के कारण हर साल इस दिन सोने की डिमांड अचानक बढ़ जाती है। आइए समझते हैं पिछले 10 साल में क्यों और कैसे सोने की कीमतें रॉकेट की तरह बढ़ती चली गईं।

मांग बढ़ने से कैसे बढ़ जाती है कीमत

अर्थव्यवस्था की समझ रखते हैं तो आप जानते होंगे कि जब मांग ज्यादा और सप्लाई सीमित होती है, तो कीमतें बढ़ती हैं। अक्षय तृतीया के दौरान भी यही होता है। ज्वेलरी दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी सोने की खरीदारी तेज हो जाती है। इस अचानक बढ़ी हुई मांग के कारण बाजार में सोने की कीमतों में उछाल आने लगता है। हालांकि यह बढ़ोतरी हमेशा बहुत बड़ी नहीं होती, लेकिन त्योहार के आसपास कीमतों में हल्की तेजी करीब हर साल देखी जाती है।

पिछले 10 साल का ट्रेंड क्या कहता है?

अगर पिछले 10 साल का ट्रेंड देखें, तो एक दिलचस्प पैटर्न सामने आता है। ज्यादातर सालों में अक्षय तृतीया से पहले सोने की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ती हैं। इसका कारण है कि व्यापारी और निवेशक पहले से ही बढ़ती मांग को भांप लेते हैं और स्टॉक जमा करना शुरू कर देते हैं। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि अक्षय तृतीया के ठीक बाद कीमतों में थोड़ी गिरावट आती है। इसका कारण यह है कि त्योहार के बाद मांग अचानक कम हो जाती है, जिससे बाजार संतुलन की ओर लौटता है। पिछले 10 सालों में भारत में सोने की कीमतों का ट्रेंड ( 24 कैरेट, 10 ग्राम के औसत रेट) इस प्रकार रही हैं। गौर हो कि अलग-अलग शहरों और समय के अनुसार कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

भारत में पिछले 10 साल का गोल्ड प्राइस ट्रेंड

वर्षगोल्ड प्राइस रेंज (₹ प्रति 10 ग्राम)
2016₹29,000 – ₹31,000
2017₹28,500 – ₹30,500
2018₹30,000 – ₹32,500
2019₹32,000 – ₹39,000
2020₹45,000 – ₹56,000
2021₹44,000 – ₹49,000
2022₹48,000 – ₹55,000
2023₹54,000 – ₹63,000
2024₹60,000 – ₹72,000
2025₹65,000 – ₹75,000
2025–26₹1,00,000 – ₹1,50,000

गोल्ड प्राइस ट्रेंड का संक्षेप विश्लेषण

  • 2016–2018: कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं
  • 2019 के बाद: लगातार तेजी शुरू हुई
  • 2020: महामारी के कारण सोना सुरक्षित निवेश बना, बड़ी छलांग
  • 2023–2025: रिकॉर्ड स्तर, महंगाई और ग्लोबल अनिश्चितता का असर

निवेशकों की रणनीति भी बढ़ाती है कीमत

सिर्फ आम ग्राहक ही नहीं, बल्कि बड़े निवेशक भी अक्षय तृतीया को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बनाते हैं। वे पहले से सोना खरीदकर रखते हैं और त्योहार के दौरान ऊंचे दाम पर बेचने की कोशिश करते हैं। इससे बाजार में स्पेकुलेशन बढ़ती है, जो कीमतों को और ऊपर ले जाती है। इस तरह यह सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक कारण नहीं है, बल्कि निवेश और ट्रेडिंग की रणनीतियां भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती हैं।

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ग्लोबल फैक्टर भी निभाते हैं अहम भूमिका

अक्षय तृतीया भारत में मनाया जाने वाला त्योहार है, लेकिन सोने की कीमतें पूरी तरह स्थानीय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत, डॉलर की स्थिति, ब्याज दरें, और वैश्विक आर्थिक हालात भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। अगर अक्षय तृतीया के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतें बढ़ रही हों, तो भारत में इसका असर और ज्यादा दिखाई देता है। वहीं अगर ग्लोबल मार्केट कमजोर हो, तो त्योहार के बावजूद कीमतों में ज्यादा उछाल नहीं आता।

ज्वेलर्स की मार्केटिंग और ऑफर्स का असर

अक्षय तृतीया के समय ज्वेलर्स बड़े स्तर पर मार्केटिंग कैंपेन चलाते हैं। आज खरीदो, शुभ फल पाओ जैसे मैसेज ग्राहकों को आकर्षित करते हैं। इसके साथ ही कई दुकानदार ऑफर्स भी देते हैं, जैसे मेकिंग चार्ज में छूट या कैशबैक। हालांकि ये ऑफर्स ग्राहकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन बढ़ी हुई डिमांड के कारण बेस प्राइस (सोने का असली रेट) अक्सर ऊपर रहता है। यानी ग्राहक को लगता है कि वह फायदा ले रहा है, लेकिन कुल मिलाकर कीमतें पहले से थोड़ी ज्यादा होती हैं।

क्या हर साल बढ़ता ही है सोना?

यह जरूरी नहीं कि हर अक्षय तृतीया पर सोना महंगा ही हो। कुछ सालों में कीमतें स्थिर भी रहती हैं या कम भी हो सकती हैं, खासकर जब वैश्विक बाजार कमजोर हो या आर्थिक अनिश्चितता कम हो। लेकिन लंबी अवधि के ट्रेंड में देखा जाए तो त्योहार के आसपास कीमतों में हल्की तेजी एक आम पैटर्न बन चुका है। यही वजह है कि लोग इसे फेसटिव इफैक्ट भी कहते हैं।

ग्राहकों के लिए क्या है सही रणनीति

अगर आप अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ शुभ मुहूर्त देखकर फैसला लेना सही नहीं होगा। कीमतों का ट्रेंड, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और अपने बजट को ध्यान में रखना जरूरी है। कई विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर निवेश के लिए सोना खरीदना है, तो इसे छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग समय पर खरीदें। इससे आप किसी एक दिन की ऊंची कीमत के जोखिम से बच सकते हैं।

परंपरा और बाजार का अनोखा मेल

अक्षय तृतीया पर सोने की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ एक संयोग नहीं है, बल्कि यह परंपरा, मांग, निवेश रणनीति और वैश्विक बाजार का संयुक्त परिणाम है। पिछले 10 साल का ट्रेंड यही बताता है कि जैसे-जैसे त्योहार करीब आता है, बाजार में हलचल बढ़ती है और इसका असर कीमतों पर साफ दिखाई देता है। इसलिए जब आप अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने जाएं, तो सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि बाजार की समझ भी साथ लेकर जाएं तभी आपका निवेश सफल हो पाएगा।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है निवेश की सलाह नहीं है, अगर आपको निवेश करना है तो एक्सपर्ट्स से संपर्क करें।)

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