What is SEBI PRIM for Mutual Fund : स्मार्टफोन, इंटरनेट, फिनटेक और UPI ने निवेश को चुटकियों का खेल बना दिया है। अब किसी के लिए भी निवेश करना मुश्किल काम नहीं है। बल्कि, बड़ी चुनौती यह है कि निवेश का सही तरीका क्या है। म्यूचुअल फंड में एकमुश्त या SIP के जरिये निवेश करना मौजूदा दौर का सबसे मजबूत इन्वेस्टमेंट ट्रेंड है। लेकिन, ज्यादातर निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले सही रिसर्च कैसे करनी है, यह भी नहीं आता है। निवेशकों की इस दुविधा को देखते हुए बाजार नियामक SEBI ने PRIM यानी पोर्टफोलिया मैनेजर्स रूट फॉर इन्वेस्टमेंट इन म्यूचुअल फंड को मंजूरी दी है।
क्या है PRIM?
SEBI ने ₹25 लाख या इससे ज्यादा के म्यूचुअल फंड को मैनेज करने के लिए Professional Mutual Fund Portfolio Management का नया रास्ता PRIM मंजूर किया है। Dezerv के को फाउंडर संदीप जेठवानी (Sandeep Jethwani) के मुताबिक आज निवेशकों के सामने असली मुश्किल निवेश के साधनों को एक्सेस करने की नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट (Portfolio management) की है, यानी कौन से फंड को रखना चाहिए। उनमें कितना अलोकेशन (Allocation) करना है, कब फंड्स को रीबैलेंस करना है और मार्केट सायकल के दौरान अनुसाशन कैसे बनाए रखना है। निवेशकों की इन चुनौतियों को समझते हुए अच्छे और गंभीर निवेशकों के लिए SEBI ने PRIM को मंजूरी दी है।
SEBI ने 24 सितंबर 2026 को नए पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशन (Portfolio Managers Regulations) 2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत पोर्टफोलियो मैनेजर अब क्लाइंट के लिए म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान के साथ ETFs, इंडेक्स फंड और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स यानी SIFs का पोर्टफोलियो मैनेज कर सकेंगे। PRIM के तहत न्यूनतम निवेश 25 लाख रुपये रखा गया है।
कैसे मदद करेगा सेबी का नया सिस्टम?
जेठवानी के मुताबिक SEBI का यह सिस्टम निवेशकों को गलत फंड सलेक्शन और गलत अलोकेशन से बचने में मदद कर सकता है। जेठवानी कहते हैं, आज किसी भी इन्वेस्टर के लिए Mutual Fund में पैसा लगाना कुछ ही मिनटों का काम है। Mobile App खोलिए, फंड चुनिए और SIP शुरू कर दीजिए। लेकिन असली सवाल इसके बाद शुरू होता है कि कौन सा फंड रखना है, कितना पैसा किस फंड में लगाना है और कब पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना है। यही वह जगह है, जहां Securities and Exchange Board of India यानी SEBI का नया Portfolio Managers Route for Investing in Mutual Fund Units (PRIM) अहम हो जाता है।
2,000 से ज्यादा फंड में से चुनाव चुनौती
Mutual Fund निवेशकों के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि उन्हें इन्वेस्टमें प्रोडक्ट नहीं मिल रहेे,बल्कि समस्या यह है कि उसने पास बहुत ज्यादा विकल्प हैं। जेठवानी के मुताबिक अक्सर निवेशक गूगल पर जाते हैं और “Best Mutual Fund” जैसे जेनरिक टर्म से सर्च करते हैं, इसके बाद जो नतीजे आते हैं उनको थोड़ा-बहुत देखने के बाद कोई फंड चुन लेते हैं। इसके अलावा दूसरा तरीका किसी रिलेटिव, साथी, डिस्ट्रीब्यूटर या किसी सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर की सलाह पर फंड चुन लेते हैं।
वेल्थ क्रिएशन के लिए क्या जरूरी
लॉन्गटर्म में वेल्थ क्रिएशन के लिए सिर्फ अच्छा फंड चुन लेना पर्याप्त नहीं है। जेठवानी कहते हैं, 2000 फंड में सही फंड चुनने के बाद उन्हें मैनेज करना असली चुनौती है। जेठवानी कहते हैं, कई बार इन्वेस्टर अच्छे फंड चुनते हैं, लेकिन नतीजा अपेक्षा के मुताबिक नहीं निकलता है। क्योंकि, निवेशक सही समय पर अलोकेशन, रीबैलेंसिंग और मार्केट वोलैटिलिटी के दौरान इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी में बदलाव नहीं किया।
कौन से फंड खराब?
यहां “खराब Mutual Fund” का मतलब जरूरी नहीं कि फंड की परफॉर्मेंस खराब है। बल्कि, कई बार समस्या इन्वेस्टर के चुनाव और अलोकेशन की भी हो सकती है। मान ले कि किसी फंड ने पिछले तीन साल में शानदार रिटर्न दिया। निवेशक उसका पिछला रिकॉर्ड देखकर पैसा लगा देता है। लेकिन जिस समय वह एंट्री लेता है, उसी समय उस कैटेगरी में रैली खत्म हो जाती है। या फिर कई बार निवेशक कई ऐसे फंड्स में निवेश कर देते हैं, जहां स्टॉक्स ओवरलैप करते हैं, जिसकी वजह से उन्हें अलग-अलग फंड्स के बाद भी एक जैसा ही रिटर्न मिलता है, जो अपेक्षा के मुताबिक नहीं मिलता है। इसके अलावा जेठवानी कहते हैं कि एक बड़ी प्रॉब्लम किसी फंड से बाहर निकलने के सही समय की है। क्योंकि कई बार एंट्री अच्छे समय पर हो जाती है और फंड अच्छा रिटर्न भी दे चुका होता है, लेकिन सही समय पर फंड से बाहर नहीं निकला जाए, तब भी निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। PRIM इन्ही चुनौतियों का हल करता है।
PRIM में क्या करेगा पोर्टफोलियो मैनेजर?
PRIM के तहत निवेशक 25 लाख या उससे ज्यादा का पोर्टफोलियो लेकर रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर की प्रॉफेशनल मैनेजमेंट सर्विसेज ले सकता है। पोर्टफोलियो मैनेजर का काम सिर्फ कोई एक फंड बताना नहीं होगा। वह क्लाइंट के लिए पोर्टफोलियो कंस्ट्रक्ट कर सकता है और उपलब्ध निवेश विकल्प के बीच अलोकेशन और रीबैलेंसिंग कर सकता है।
