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HDFC बैंक में एक इस्तीफा और 1 लाख करोड़ साफ, क्यों अटकीं लाखों निवेशकों की सांसें?

HDFC Bank में हुए एक इस्तीफे की वजह से लाखों निवेशकों की सांसें अटकी हुई हैं। एक ही दिन में स्टॉक में 8 फीसदी तक गिरावट आई, जिससे शेयर प्राइस एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया और HDFC बैंक के मार्केट कैप को करीब 1 लाख करोड़ की चपत लगी है।

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इंट्रा डे में शेयर 770 रुपये तक गिरा

HDFC Bank देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक है। शेयर बाजार में लार्ज कैप और खासतौर पर HDFC बैंक जैसे ब्लू चिप स्टॉक्स को सबसे सेफ माना जाता है। लेकिन, गुरुवार को अचानक HDFC Bank Share में 8% की गिरावट ने लाखों निवेशकों को बड़ा झटका दिया है।

सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़ें बैंक के शेयरों में महज एक इस्तीफे की वजह से इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई। इसके साथ ही निवेशक इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि आखिर इस इस्तीफे की वजह से बैंक और इसके शेयर के प्रदर्शन पर लॉन्ग टर्म में क्या असर होगा। बहरहाल, जानते हैं कि क्यों एक इस्तीफे ने इतनी बड़ी हलचल मचा दी है।

एक इस्तीफा और ₹1 लाख करोड़ साफ

HDFC Bank के शेयर में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। करीब 8% की गिरावट के साथ बैंक का मार्केट कैप लगभग ₹1 लाख करोड़ घट गया। यह गिरावट सिर्फ प्राइस मूवमेंट नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे में आई कमजोरी का संकेत मानी जा रही है, खासकर तब जब बैंक देश के सबसे भरोसेमंद नामों में शामिल रहा है।

एथिक्स का सवाल और बाजार में हलचल

गिरावट की जड़ में है चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा, जिसमें उन्होंने बैंक के भीतर कुछ घटनाओं को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और एथिक्स के खिलाफ बताया। यह बयान साधारण नहीं है, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में गवर्नेंस ही वैल्यूएशन का सबसे बड़ा आधार होता है। ऐसे में एथिकल कंसर्न्स ने सीधे निवेशकों के भरोसे को झटका दिया।

RBI के बयान से कम की चिंता

इस्तीफे के बाद RBI ने केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। हालांकि यह कदम स्थिरता लाने के लिए था, लेकिन बाजार ने इसे अस्थायी समाधान माना। निवेशकों को अब स्थायी नेतृत्व और मैनेजमेंट की स्पष्ट प्रतिक्रिया का इंतजार है। लेकिन, RBI ने अपने बयान में नेतृत्व बदलाव को लेकर कहा है कि यह चिंता की बात नहीं है।

क्यों अटक गई लाखों निवेशकों की सांसें

HDFC Bank में बड़ी संख्या में रिटेल और संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी है। ऐसे में अचानक आई इस खबर ने दोनों वर्गों को सतर्क कर दिया। खासतौर पर रिटेल निवेशकों के लिए यह गिरावट चिंता का कारण बनी, क्योंकि स्टॉक पहले से ही पिछले कुछ हफ्तों में दबाव में था। HDFC Bank के शेयर में गिरावट को लेकर ₹1 लाख करोड़ मार्केट कैप घटने की खबरें दरअसल इंट्रा डे लो के आधार पर हैं। कल का क्लोजिंग प्राइस ₹843.05 था, जबकि आज शेयर ₹770 तक फिसला, यानी करीब 8.6% की गिरावट, जिससे मार्केट कैप लगभग ₹1.1 लाख करोड़ तक घटा। हालांकि, अगर मौजूदा प्राइस ₹807 से तुलना करें तो गिरावट करीब 4.3% बनती है और मार्केट कैप में कमी लगभग ₹55,000 करोड़ के आसपास बैठती है, यानी हेडलाइन नंबर इंट्रा डे मूव पर आधारित है।

क्या यह सिर्फ सेंटिमेंट झटका है?

विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट फिलहाल सेंटिमेंट और गवर्नेंस से जुड़ी है, न कि बिजनेस फंडामेंटल से। बैंक का ऑपरेशनल परफॉर्मेंस मजबूत बना हुआ है, लेकिन जब तक मैनेजमेंट इस मुद्दे पर स्पष्टता नहीं देता, तब तक शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। HDFC Bank Share में आया यह झटका एक रिमाइंडर है कि बाजार में सिर्फ नतीजे ही नहीं, बल्कि भरोसा भी उतना ही अहम होता है। चेयरमैन के इस्तीफे ने इसी भरोसे को हिलाया है और अब अगली दिशा मैनेजमेंट के भरोसा बहाल करने वाले कदम तय करेंगे।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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