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म्यूचुअल फंड में एग्जिट लोड क्या है? कैसे होती है इसकी गणना, निवेशक हैं तो जरूर जान लें

म्यूचुअल फंड निवेशकों को एग्जिट लोड जरूर जानना चाहिए, क्योंकि वे उनके कुल रिटर्न पर असर डाल सकते हैं। ​निवेशक के लिए यह जरूरी है कि वे जिन म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं, उनके एग्जिट लोड स्ट्रक्चर को समझें और फंड परफॉर्मेंस और इन्वेस्टमेंट गोल्स जैसे दूसरे फैक्टर्स के साथ इस पर भी ध्यान दें।

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म्यूचुअल फंड एग्जिट लोड

देशभर के निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड तेजी से पॉपलुर हुआ है। इसकी वजह म्यूचुअल फंड निवेश पर मिलने वाला बेहतर रिटर्न और निवेश का लचीला तरीका है। SIP के जरिये छोटे से बड़े निवेशक अपनी बचत की रकम म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। इसके चलते हर महीने हजारों करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश हो रहा है। हालांकि, किसी भी म्यूचुअल फंड में निेवश से पहले इन्वेस्टर्स को एग्जिट लोड पर भी विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए कि एग्जिट लोड आपके रिटर्न को कम कर सकता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि म्यूचुअल फंड में एग्जिट लोड क्या होता हैं और उन्हें कैसे कैलकुलेट किया जाता है? अलग-अलग तरह के म्यूचुअल फंड में उनकी क्या अहमियत है। आइए सारी जानकारी आपको देते हैं।

एग्जिट लोड क्या है?

एग्जिट लोड वह चार्ज हैं जो म्यूचुअल फंड उन इन्वेस्टर्स पर लगाते हैं जो तय समय से पहले अपना इन्वेस्टमेंट निकाल लेते हैं। यह फीस जल्दी पैसे निकालने से रोकती है और निवेशक को लंबे समय तक निवेशित रहने के लिए बढ़ावा देती है। आम तौर पर, एग्जिट लोड को रिडीम की जा रही यूनिट्स की नेट एसेट वैल्यू के परसेंटेज के तौर पर कैलकुलेट किया जाता है। यह फंड फ्लो को मैनेज करने और लंबे समय के निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला तरीका है।

एग्जिट लोड कैसे कैलकुलेट किया जाता है?

एग्जिट लोड का कैलकुलेशन सीधा है: म्यूचुअल फंड फीस, लागू NAV और एग्जिट लोड पीरियड पर रिडेम्पशन अमाउंट के प्रतिशत के तौर पर ली जाती है। उदाहरण के लिए, अगर एग्जिट लोड 1% है और कोई निवेशक 20,000 रुपये की यूनिट्स रिडीम करता है, तो एग्जिट लोड 200 रुपये (20,000 रुपये का 1%) होगा।

अलग-अलग म्यूचुअल फंड पर एग्जिट लोड

इक्विटी फंड: इक्विटी फंड में, इन्वेस्टर्स को आमतौर पर एग्जिट लोड देना पड़ता है, खासकर शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट पर। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्टॉक इन्वेस्टमेंट को ज्यादा रिस्की माना जाता है और रिस्क कम करने के लिए इसे कम समय के लिए नहीं रखा जा सकता।

डेट फंड: डेट फंड में इक्विटी फंड की तुलना में कम एग्जिट लोड होता है। समय के साथ डेट फंड पर एग्जिट लोड कम होने से निवेशक लंबे समय तक इन्वेस्टेड रहने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

हाइब्रिड फंड: हाइब्रिड फंड, जो इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट के मिक्स में इन्वेस्ट किए जाते हैं, उनका एग्जिट लोड इक्विटी-डेट एलोकेशन और इन्वेस्टमेंट ड्यूरेशन के आधार पर तय होता है।

SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) पर एग्जिट लोड

SIP इन्वेस्टर्स के बीच अपने डिसिप्लिन्ड इन्वेस्टमेंट अप्रोच की वजह से पॉपुलर हुए हैं। हालांकि, SIP में एग्जिट लोड भी होते हैं, जिन्हें पूरे इन्वेस्टमेंट के बजाय हर इंस्टॉलमेंट पर कैलकुलेट किया जाता है। अगर इन्वेस्टर्स तय SIP टेन्योर से पहले यूनिट्स रिडीम करते हैं, तो उन्हें SIP पर एग्जिट लोड लग सकता है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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