H 1B Visa Fee Hike: अमेरिका की सबसे बड़ी प्राइवेट नियोक्ता कंपनी वॉलमार्ट ने उन उम्मीदवारों को नौकरी के ऑफर देना बंद कर दिया है जिन्हें H-1B वीजा की जरुरत है। यह जानकारी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बुधवार 22 अक्टूबर को दी गई। जिसमें बताया गया कि यह निर्णय अमेरिका द्वारा H-1B वीजा पर $100,000 (करीब 83 लाख रुपये) की फीस लगाए जाने के बाद लिया गया है।
किन्हें प्रभावित कर रहा है यह फैसला?
यह नया दिशानिर्देश मुख्य रूप से वॉलमार्ट के कॉर्पोरेट स्टाफ को प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने नए H-1B वीजा आवेदन के लिए $100,000 की फीस लागू किया था, जिसका उद्देश्य वीजा कार्यक्रम में सुधार और उसके दुरुपयोग को रोकना है।
वॉलमार्ट में H-1B कर्मचारियों की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वॉलमार्ट प्रमुख रिटेल चेन में H-1B वीजा धारकों का सबसे बड़ा नियोक्ता है, जिसमें करीब 2,390 कर्मचारी H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं। हालांकि यह संख्या वॉलमार्ट के कुल 1.6 मिलियन अमेरिकी कर्मचारियों के मुकाबले बहुत कम है। टेक कंपनियों जैसे अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा व अन्य के मुकाबले वॉलमार्ट में H-1B कर्मचारियों की संख्या कम है, लेकिन फिर भी यह इस वर्ग में लीडर है। वॉलमार्ट की प्रवक्ता ने कहा कि हम अपने ग्राहकों की सेवा के लिए बेहतरीन प्रतिभा को नियुक्त करने और उसमें निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जबकि H-1B भर्ती दृष्टिकोण को लेकर हम विचारशील बने हुए हैं।
H-1B वीजा कार्यक्रम क्या है?
H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं, जो कि विशिष्ट क्षेत्रों में अस्थायी विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए होते हैं। इसके अलावा, 20,000 अतिरिक्त वीजा उन कर्मचारियों को दिए जाते हैं जिनके पास उच्च डिग्री है। हाल ही में जारी की गई सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक जो लोग पहले से अमेरिका में वैध वीजा स्थिति में हैं और स्टेटस बदलते हैं, उन्हें इस भारी फीस से छूट दी गई है। लेकिन जिन विदेशी नागरिकों को अमेरिका में काम करने की कानूनी अनुमति नहीं है, उनके लिए वीजा प्रायोजकों (नियोक्ताओं) को यह फीस भरना जरूरी है।
H-1B शुल्क वृद्धि का प्रभाव क्या होगा?
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष नील ब्रैडली ने कहा कि $100,000 का नया वीजा फीस अमेरिका के नियोक्ताओं के लिए, खासकर स्टार्टअप्स और छोटे-मझोले व्यवसायों के लिए, इस कार्यक्रम का उपयोग करना बहुत महंगा बना देगा। जबकि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सभी आकार के अमेरिकी व्यवसायों को वैश्विक प्रतिभा उपलब्ध कराना था। व्हाइट हाउस ने जवाब में कहा कि ये बदलाव कानूनी हैं और H-1B वीजा कार्यक्रम में जरूरी सुधार की दिशा में एक क्रमिक कदम हैं।
H-1B कार्यक्रम पर विवाद क्यों?
H-1B वीजा कार्यक्रम, जिसकी शुरुआत 1990 में हुई थी। इसका उद्देश्य खास सेक्टर्स में श्रमिकों की कमी को पूरा करना था। हालांकि आलोचकों का मानना है कि यह कार्यक्रम अमेरिकी कुशल श्रमिकों के अवसरों को प्रभावित करता है। वर्तमान में इसका मुख्य उपयोग टेक उद्योग द्वारा किया जाता है, जो गणित, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे क्षेत्रों में पेशेवरों की कमी की बात करते हैं। विश्वविद्यालयों और अस्पतालों को भी शोधकर्ताओं और व्याख्याताओं की भर्ती के लिए इस वीजा पर निर्भर रहना पड़ता है।
