आज के समय में सुरक्षित निवेश के विकल्पों की बात करें तो Fixed Deposit (FD) लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। खासकर ऐसे समय में जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहता है, तब बैंक एफडी स्थिर और तय रिटर्न देने का भरोसा देती है। अगर आप भी एफडी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो Union Bank of India की एफडी स्कीम में निवेश कर सकते हैं। बैंक की ओर से ग्राहकों को अलग-अलग अवधि की एफडी पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर की जा रही हैं। आप बैंक की एक साल की अवधि वाली एफडी में निवेश कर सकते हैं।
FD पर कितनी है ब्याज दर

FD (Photo: iStock)
Union Bank of India एक साल की एफडी पर सामान्य ग्राहकों को 6.25 प्रतिशत की दर से ब्याज दे रहा है। वहीं, सीनियर सिटिजन ग्राहकों के लिए यही ब्याज दर बढ़ाकर 6.75 प्रतिशत रखी गई है । दूसरी तरफ सुपर सीनियर सिटिजन को बैंक 7 प्रतिशत सालाना ब्याज का फायदा दे रहा है। बैंक की यह अतिरिक्त ब्याज सुविधा 5 करोड़ रुपये तक की घरेलू टर्म डिपॉजिट स्कीम्स पर लागू होती है।
5 लाख जमा पर कितना मिलेगा रिटर्न
मान लीजिए अगर कोई सामान्य नागरिक बैंक में 5 लाख रुपये की एफडी करवाता है तो एक साल बाद मैच्योरिटी पर उसे लगभग 5,31,990 रुपये मिलेंगे। यानी निवेशक को करीब 31,990 रुपये ब्याज के रूप में प्राप्त होंगे। वहीं अगर यही राशि कोई सीनियर सिटिजन निवेश करता है, तो उसे मैच्योरिटी पर लगभग 5,34,614 रुपये मिल सकते हैं। इसका मतलब है कि सीनियर सिटिजन को सामान्य ग्राहक के मुकाबले ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा।
सुपर सीनियर सिटिजन के लिए बैंक और भी बेहतर रिटर्न दे रहा है। 5 लाख रुपये की एफडी पर एक साल बाद मैच्योरिटी राशि लगभग 5,35,930 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी उन्हें सामान्य नागरिकों के मुकाबले अतिरिक्त ब्याज का लाभ मिलता है। बैंक के अनुसार सुपर सीनियर सिटिजन को सामान्य दर के ऊपर कुल 0.75 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज दिया जाता है।
सीनियर सिटिजन और सुपर सीनियर सिटिजन में अंतर
बैंकिंग नियमों के अनुसार, आमतौर पर 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को सीनियर सिटिजन की कैटेगरी में रखा जाता है। वहीं 80 साल या उससे अधिक उम्र वाले ग्राहकों को सुपर सीनियर सिटिजन माना जाता है। इन्हीं ग्राहकों को अतिरिक्त ब्याज दर का लाभ दिया जाता है, ताकि रिटायरमेंट के बाद उनकी नियमित आय को बेहतर बनाया जा सके।
FD में क्यों करें निवेश
एफडी को सुरक्षित निवेश इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर सीधे तौर पर नहीं पड़ता। निवेशक को पहले से पता होता है कि मैच्योरिटी पर उसे कितनी रकम मिलने वाली है। यही वजह है कि कई लोग अपने इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट सेविंग्स या शॉर्ट-टर्म निवेश के लिए एफडी को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, निवेश करने से पहले ब्याज दर, निवेश अवधि और टैक्स नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।
