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होर्मुज पर सस्पेंस गहराया, ईरान के ऐलान के बावजूद 5 भारतीय और ग्रीक टैंकर्स ने बीच समंदर से लिया यू-टर्न

होर्मुज खुलने के दावों के बीच 5 भारतीय और ग्रीक तेल टैंकरों ने समंदर में अचानक यू-टर्न ले लिया है। ईरान की सेना और सरकार के विरोधाभासी बयानों और नई शर्तों ने जहाज मालिकों में भारी असमंजस पैदा कर दिया है।

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Strait Of Hormuz

ईरान और अमेरिका की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के बयानों ने दुनिया को राहत की उम्मीद दी थी, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। शनिवार की सुबह वैश्विक तेल बाजार के लिए उस वक्त चिंताजनक खबर आई, जब कम से कम पांच भारतीय और ग्रीक तेल टैंकरों ने होर्मुज की ओर बढ़ते हुए अचानक अपना रास्ता बदल लिया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ये जहाज फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा और अनुमति को लेकर उपजे असमंजस के कारण इन्हें बीच समंदर से 'यू-टर्न' लेने पर मजबूर होना पड़ा। यह घटना दिखाती है कि जहाज मालिकों और तेल व्यापारियों के बीच अभी भी विश्वास की भारी कमी है।

ईरान की शर्तें

इस संकट की मुख्य वजह ईरान के भीतर से आ रहे अलग-अलग बयान हैं। एक तरफ जहां ईरान के विदेश मंत्री ने मार्ग को 'पूरी तरह खोलने' की बात कही थी, वहीं दूसरी तरफ ईरान की सेना (IRGC) और वहां की सरकारी न्यूज एजेंसियों ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है। ईरानी सेना ने साफ कर दिया है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की नई और सख्त शर्तों का पालन करना होगा। 'फार्स' न्यूज एजेंसी और सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रही, तो यह मार्ग किसी भी कीमत पर खुला नहीं रखा जाएगा। शनिवार सुबह जब जहाज होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे, तो उन्हें रेडियो पर कथित तौर पर संदेश मिले कि बिना ईरानी नौसेना की विशेष अनुमति के आगे बढ़ना खतरनाक हो सकता है।

भारतीय और ग्रीक टैंकर्स की घर वापसी

इकोनॉमिक टाइम्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल से लदे ये टैंकर दुबई के पास से उत्तर-पूर्व दिशा में अपनी यात्रा पर निकले थे। लेकिन शनिवार सुबह होते ही इन जहाजों ने वापस मुड़ना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ जहाज अब ईरान के 'क़ेश्म द्वीप' के पास ही खड़े होकर आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, एक छठे टैंकर ने तो पिछले कई घंटों से अपना जियोलोकेशन सिग्नल (AIS) भी बंद कर दिया है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है। ये वही जहाज हैं जो मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण लंबे समय से फारस की खाड़ी के भीतर फंसे हुए थे।

83 लाख बैरल तेल बाजार पर असर

इन छह टैंकरों में कुल मिलाकर लगभग 8.3 मिलियन (83 लाख) बैरल कच्चा तेल लदा है, जो मध्य-पूर्व के देशों से निर्यात किया जा रहा है। यदि ये जहाज सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर लेते, तो यह युद्ध शुरू होने के बाद से एक दिन में होने वाला कच्चे तेल का सबसे बड़ा प्रवाह होता। जहाजों के मुड़ने से अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल ट्रैफिक कंट्रोल की वजह से हुआ है या सुरक्षा के बड़े खतरों के कारण। हालांकि, इसी दौरान कुछ गैस कैरियर्स (LPG) को ओमान की खाड़ी की ओर जाते देखा गया है, जो यह संकेत देता है कि शायद रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन तेल टैंकरों के लिए जोखिम अभी भी बहुत ज्यादा है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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