साल 2025 अपने अंतिम दिनों में पहुंचते-पहुंचते भारतीय निवेशकों के पोर्टफोलियो में एक एसेट ने सबसे ज्यादा चमक बिखेरी है और वो है चांदी। खासतौर पर Silver ETFs ने इतना शानदार प्रदर्शन किया कि निवेशकों की पूंजी महज एक साल में लगभग दोगुनी हो गई। बाजार में मौजूद 21 से ज्यादा सिल्वर लिंक्ड ETFs और FoFs में से करीब 10 फंड्स ने 100% से भी अधिक रिटर्न दिया है। यानी जिसने भी 2024 के दौरान सिल्वर ETF में पैसा लगाया था, वह आज अपने निवेश को तेजी से दोगुना होते हुए देख रहा है। यह रैली अचानक नहीं आई, बल्कि कई वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती औद्योगिक मांग और सप्लाई में कमी जैसे कारकों के मेल ने चांदी को 2025 की सबसे चमकदार और आकर्षक कमोडिटी बना दिया है।
Silver ETFs में सबसे आगे रहने वालों में UTI Silver ETF ने करीब 100.89%, ICICI Prudential Silver ETF ने 100.72%, HDFC Silver ETF ने 100.29%, और SBI Silver ETF ने लगभग 100% रिटर्न दिया है। इस तरह की तेज रैली ने इस साल चांदी को ‘मल्टीबैगर एसेट’ की श्रेणी में पहुंचा दिया है। निवेशकों के लिए यह वाकई एक शानदार साल रहा। ऐसे में आइए जानते हैं अब आपको इसे होल्ड करना चाहिए या बेच देना चाहिए?
इतनी जबरदस्त तेजी आई क्यों?
चांदी में बढ़ोतरी के कई मजबूत कारण रहे। सबसे पहले, चांदी अब सिर्फ एक कीमती धातु नहीं रही, बल्कि उसका इस्तेमाल उद्योगों में तेजी से बढ़ा है। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी टेक्नोलॉजी, 5G उपकरणों और सबसे ज्यादा सोलर पैनलों की मांग ने चांदी की खपत को नए स्तर पर पहुंचा दिया। सोलर इंडस्ट्री अकेले चांदी के उपयोग को लगातार बढ़ा रही है, क्योंकि हर सोलर पैनल में सिल्वर की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और ब्याज दरों में बदलाव की वजह से निवेशकों ने सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख किया। सोना और चांदी हमेशा से ऐसे समय में सुरक्षित ठिकाना रहे हैं। लेकिन इस बार चांदी को अतिरिक्त बढ़त मिलीअगर क्योंकि यह सेफ हेवन और इंडस्ट्रियल डिमांड दोनों भूमिकाएं निभा रही थी।
सप्लाई साइड पर भी दबाव रहा। कई बड़े खनन क्षेत्रों में उत्पादन कम हुआ और कई देशों में खनन नियम सख्त हुए। इससे चांदी की उपलब्धता पर असर पड़ा और कीमतें और तेज हुईं। साथ ही, ETFs में भारी मात्रा में पैसा आने से कीमतों को और गति मिली।
अब सबसे बड़ा सवाल बेचें या होल्ड करें?
जब आपकी निवेश राशि दोगुनी हो जाए, तो यह सवाल आना स्वाभाविक है कि मुनाफा लॉक कर लेना चाहिए या रैली को जारी रहने देना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका जवाब आपकी निवेश रणनीति पर निर्भर करता है।
अगर आपका लक्ष्य पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं की एक तय सीमा रखना है, और Silver ETFs की हिस्सेदारी उस सीमा से अधिक बढ़ चुकी है, तो आंशिक मुनाफावसूली (partial profit booking) बिल्कुल समझदारी है। इससे आप मुनाफा सुरक्षित कर लेते हैं और जोखिम कम हो जाता है।
दूसरी ओर, यदि आपका निवेश क्षितिज लंबा है 5 साल या उससे ज्यादा और आप चांदी की बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड और एनर्जी ट्रांसजीशन पर भरोसा करते हैं, तो ETF को होल्ड करना भी एक अच्छा विकल्प है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में चांदी की कीमतों में स्थिरता और नई ऊंचाइयों की संभावनाएं बनी रह सकती हैं।
नए निवेशकों के लिए सलाह है कि अभी lumpsum निवेश करने से बचें, क्योंकि कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर हैं। इसके बजाय, SIP या STP के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर है, ताकि कीमतों की अस्थिरता का असर कम हो।
क्या हैं फायदे नुकसान?
Silver ETFs के फायदे स्पष्ट हैं कम रख-रखाव, आसान ट्रेडिंग, भौतिक चांदी का झंझट नहीं, और पोर्टफोलियो में बेहतर डाइवर्सिफिकेशन। लेकिन इसका जोखिम भी ध्यान में रखना चाहिए। चांदी की कीमतें अत्यधिक volatile होती हैं। वैश्विक आर्थिक स्थिति, डॉलर की मजबूती, उद्योगों की मांग और ब्याज दरें इन सब पर चांदी की कीमतें बहुत तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती हैं।
Silver ETFs ने इस साल वाकई शानदार प्रदर्शन किया है। अगर आप शार्ट टर्म निवेशक हैं या आपकी अलोकेशन जरूरत से ज्यादा हो गई है, तो थोड़ा मुनाफा सुरक्षित कर लेना अच्छा निर्णय है। लेकिन अगर आपका निवेश लक्ष्य लंबी अवधि का है और आप बाजार की अस्थिरता को संभाल सकते हैं, तो इसे होल्ड करके चलना समझदारी होगी।
