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India UK FTA आज से लागू, आपकी जेब से लेकर कारोबार तक क्या-क्या बदलेगा?

भारत और ब्रिटेन के बीच आज से मुक्त व्यापार समझौता प्रभावी हो गया है। आज से समझौते शर्तों के दायरे में आने वाली वस्तुओं और सेवाओं का आयात-निर्यात ड्यूटी फ्री हो जाएगा।

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भारत के निर्यात को मिलेगा बूस्ट
Authored by: Yateendra Lawaniya
Updated Jul 15, 2026, 15:56 IST

India UK FTA आज 15 जुलाई, 2026 से लागू हो गया है। दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर किए गए इस समझौते का आधिकारिक नाम मुक्त व्यापार समझौता नहीं, बल्कि कॉम्प्रेहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) है। यह समझौता लंबे समय में दोनों देशों के बीच व्यापार में £25.5 बिलियन की बढ़ोतरी करेगा। हर साल इससे भारत की GDP में करीब £5.1 बिलियन, जबकि UK की GDP में £4.8 बिलियन की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

कितना बड़ा और व्यापक ये समझौता?

यूरोपीयन यूनियन को छोड़ने के बाद यह ब्रिटेन की सबसे बड़ी इकोनॉमिक डील है। वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी दुनिया अर्थव्यवस्थाओं के लिहाज से देखें, तो भारत की भी यह सबसे बड़ी डील है। दोनों देशों ने इस समझौते के लिए करीब 3 साल तक लगातार बातचीत की है। इस डील के दूरगामी नतीजों का अंदाजा इस बात से पता चलता है कि UK की 99% टैरिफ लाइनें भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए ड्यूटी-फ्री होंगी और भारत UK प्रोडक्ट्स के लिए अपनी 90% टैरिफ लाइनों पर टैरिफ हटा देगा या कम कर देगा।

भारत-ब्रिटेन साझेदारी का अहम पल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने India UK CETA को दोनों देशों की साझेदारी का अहम पल बताते हुए कहा, कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लागू होने से, हमारे इकोनॉमिक लिंकेज और भी गहरे होने वाले हैं। ये एग्रीमेंट मिलकर हमारे साझा लक्ष्य को हमारे लोगों के लिए ठोस मौकों में बदलेंगे। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, CETA हमारे किसानों, एंटरप्रेन्योर्स और MSMEs को नई रफ्तार देगा। टेक्नोलॉजी, प्रोफेशनल सर्विसेज और इनोवेशन में सहयोग को भी गहरा करेगा, साथ ही स्किल्ड इंडियन टैलेंट के लिए ज़्यादा मोबिलिटी को सपोर्ट करेगा।

PM Modi ने खासतौर पर सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट को लेकर कहा कि UK में टेम्पररी तौर पर काम कर रहे इंडियन प्रोफेशनल्स को यह बहुत कीमती सपोर्ट देगा और इंडियन एंटरप्राइजेज की कॉम्पिटिटिवनेस को मजबूत करेगा। इससे पहले केंद्रीय उद्योग व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, इंडिया-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ऑफिशियली लागू हो गया है। यह एग्रीमेंट एक विजन से एक स्ट्रक्चर्ड इकोनॉमिक फ्रेमवर्क में बदल गया है। यह दोनों देशों के बीच मार्केट एक्सेस को ऑप्टिमाइज करने, इंडस्ट्रियल इनोवेशन को तेज करने और प्रोफेशनल मोबिलिटी को बढ़ाने के लिए एक रेगुलेटरी मैकेनिज्म के तौर पर काम करेगा है।

चीन-बांग्लोदेश से मुकाबला आसान

यह समझौता भारत और ब्रिटेन के कारोबारी रिश्तों में बड़ा बदलाव दिखाता है। खासतौर पर ब्रिटेन के बाजार में भारतीय निर्यातकों को वस्तुओं के व्यापार में चीन और बांग्लादेश का मुकाबला करने में आसानी होगी। क्योकि, भारत से ब्रिटेन को निर्यात किए जाने वाले 99 फीसदी प्रोडक्ट इस डील के तहत ब्रिटेन के बाजार में जीरो ड्यूडी के साथ पहुंचेंगे।

भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों अहम?

यह पार्टनरशिप इंडियन एक्सपोर्टर्स को दुनिया के सबसे बड़े प्रीमियम कंज्यूमर मार्केट तक सीधी पहुंच देती है। यह ग्लोबल वैल्यू चेन में इंडिया के इंटीग्रेशन को मजबूत करती है और इसका मकसद 2030 तक इंडिया-UK ट्रेड को दोगुना करके USD 100 बिलियन करना है।

इंडियन वर्कफोस को बड़ा फायदा

इस एग्रीमेंट से वर्कफोर्स को काफी फायदे होंगे, जिससे 75,000 से ज्यादा प्रोफेशनल्स और 900 कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है। डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन की छूट का समय 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है। इससे UK में टेम्पररी असाइनमेंट के दौरान डबल सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन की जरूरत खत्म हो जाती है। यह फ्रेमवर्क IT प्रोफेशनल्स, इंजीनियर्स, कंसल्टेंट्स और हेल्थकेयर एक्सपर्ट्स के लिए आने-जाने के आसान रास्ते भी बनाता है।

मैन्युफैक्चरिंग को भी बूस्ट

यह भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट के लिए एक बड़ा बदलाव है। कई सेक्टर्स में टैरिफ बैरियर खत्म करके, यह भारतीय सामानों की ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस को काफी बढ़ाता है। एक बड़ा ट्रेड कमिटमेंट दुनिया के सबसे बड़े मार्केट में से एक में भारतीय बिजनेस के लिए ग्रोथ के नए रास्ते खोल रहा है। यह फ्रेमवर्क भारत में UK-हेडक्वार्टर वाले ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को बढ़ावा देता है और भारतीय मेडिकल प्रोफेशनल्स और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स के लिए मार्केट एक्सेस को बेहतर बनाता है। इसके अलावा, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, एविएशन और एनवायरमेंटल सर्विसेज में लिबरलाइज्ड FDI कमिटमेंट्स, कम कम्प्लायंस के साथ मिलकर, भारतीय स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबली एक्सपैंड करने के लिए ज्यादा एजाइल माहौल बनाते हैं।

घरेलू सेक्टर सुरक्षित

इस समझौते के तहत भारतीय किसानों और खेती-बाड़ी से जुड़े जरूरी हित सुरक्षित रखे गए हैं। इसके अलावा संवेदनशील घरेलू सेक्टरों को सुरक्षित रखा गया है। इस तरह FTA से जहां एक्सपोर्ट के मौके बढ़ते हैं, वहीं किसानों को सुरक्षा भी मिलती है।

आवाजाही होगी आसान

बिजनेस विजिटर्स, इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफर, कॉन्ट्रैक्ट पर सर्विस सप्लायर, इंडिपेंडेंट प्रोफेशनल्स और इन्वेस्टर्स के लिए अब नए मोबिलिटी रास्ते उपलब्ध हैं। अपनी तरह के पहले प्रोविजन के तौर पर, खास तौर पर इंडियन शेफ, योगा इंस्ट्रक्टर और क्लासिकल म्यूजिशियन के लिए 1,800 डेडिकेटेड सालाना मोबिलिटी के मौके दिए गए हैं।

MSME के लिए व्यापार आसान

यह समझौता भारतीय MSME के लिए विश्व स्तर पर व्यापार करना आसान बनाता है। तीव्र सीमा शुल्क निकासी और पेपरलेस सिस्टम के माध्यम से व्यापार प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया जाता है। इस समझौते में एक समर्पित SME अध्याय है, जिसके तहत छोटे व्यवसायों के लिए बेहतर सपोर्ट की व्यवस्था की गई है।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

इस समझौते का सीधा असर हर उपभोक्ता पर तुरंत नहीं दिखेगा, लेकिन लंबे समय में इसके कई प्रभाव सामने आ सकते हैं। मसलन, भारतीय निर्यात बढ़ने से उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। विदेशी निवेश बढ़ने से नए कारोबार शुरू होने की संभावना बढ़ेगी। सेवा क्षेत्र और पेशेवरों के लिए विदेश में काम करने के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा छोटे कारोबारियों के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान होगी।

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