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मार्केट क्रैश होने पर क्या रोक देनी चाहिए SIP, दूर करें अपना कंफ्यूजन

शेयर बाजार में गिरावट का दौर आते ही निवेशक घबराने लगते हैं और एक ही सवाल का जवाब जानना चाहते हैं कि गिरते बाजार में SIP रोक देनी चाहिए या नहीं?

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एसआईपी रोक देनी चाहिए या नहीं (AI Generated Photo)

शेयर बाजार में गिरावट आते ही निवेशकों के मन में एक ही सवाल आता है। सवाल यही कि क्या अब SIP (Systematic Investment Plan) रोक देनी चाहिए? जब पोर्टफोलियो लाल निशान में दिखाई देता है और हर महीने निवेश की गई रकम का मूल्य घटता नजर आता है तो SIP बंद करने का विचार आना लाजमी है, लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसे समय में भावनात्मक निर्णय लेने के बजाय निवेश के मूल उद्देश्य को याद रखा जाना चाहिए। SIP बंद करने का निर्णय कब समझदारी भरा साबित हो सकता है कब नहीं, आइए समझते हैं-

बाजार संभलने का कब तक करें इंतजार?

जब बाजार तेजी में होता है, तब SIP जारी रखना आसान लगता है क्योंकि निवेशकों को उनका पोर्टफोलियो बढ़ता हुआ दिखाई देता है। लेकिन जैसे ही बाजार में गिरावट आती है और पोर्टफोलियो लाल निशान में आने लगता है तो कई लोग सोचने लगते हैं कि कुछ समय के लिए निवेश रोक देना बेहतर होगा और बाजार संभलने पर दोबारा शुरू किया जाएगा। लेकिन परेशानी तो यह है कि इस बात का कोई सटीक अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि बाजार कब नीचे से दोबारा ऊपर की ओर बढ़ने लगेगा।

SIP की सबसे बड़ी खासियत को समझें

SIP की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप हर महीने एक निश्चित राशि निवेश करते हैं और जब बाजार गिरता है, तो उसी रकम में अधिक यूनिट्स खरीदने का मौका मिलता है। इसे Rupee Cost Averaging कहा जाता है। बाजार में गिरावट के दौरान खरीदी गई अतिरिक्त यूनिट्स भविष्य में बाजार के सुधरने पर बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकती हैं।

कहीं आप न गंवा दें लाभ कमाने का मौका

कई निवेशक सोचते हैं कि वे गिरते बाजार में SIP रोक देंगे और बाजार में सुधार आने पर दोबारा निवेश शुरू करेंगे। लेकिन इतिहास बताता है कि बाजार की रिकवरी अक्सर तब शुरू होने लगती है जब अधिकांश निवेशक नकारात्मक खबरों से घिरे होते हैं। ऐसे में जो लोग SIP रोक देते हैं, वे अक्सर सबसे सस्ते स्तरों पर निवेश का मौका गंवा देते हैं और बाद में ऊंचे स्तर पर दोबारा निवेश शुरू करते हैं।

SIP कब रोकना होगी समझदारी

हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि हर स्थिति में SIP जारी रखना जरूरी नहीं है। अगर नौकरी चली गई हो, आय में कमी आ गई हो, मेडिकल इमरजेंसी हो या नकदी की गंभीर जरूरत हो, तो SIP रोकना या कुछ समय के लिए पॉज करना समझदारी भरा फैसला हो सकता है। ऐसी स्थिति व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतों से जुड़ी होती है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या बॉन्ड्स में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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