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क्या SIP छोड़ RD अपनाने का आ गया वक्त? बंपर रिटर्न की उम्मीद में कब तक करें इंतजार?

पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा रिटर्न की चाह में निवेशक आंख मूंदकर SIP में निवेश कर रहे हैं। वे इस अंधी दौड़ में भूल गए कि वेल्थ क्रिएशन का एकमात्र रास्ता SIP नहीं है।

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SIP VS RD
Authored by: Shivani Kotnala
Updated Jun 11, 2026, 12:57 IST
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SIP vs RD: कोरोना महामारी के बाद भारतीय निवेशकों के बीच SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) काफी तेजी से लोकप्रिय हुई। नतीजा यह हुआ कि लोग PPF, RD, FD और पोस्ट ऑफिस की स्मॉल सेविंग स्कीम्स जैसे पारंपरिक निवेश माध्यमों को लगभग भूल ही गए। इसमें निवेशकों की भी कोई गलती नहीं थी, क्योंकि बाजार में ऐसा माहौल बना दिया गया था मानो SIP से बेहतर कोई दूसरा विकल्प ही नहीं है। हालांकि, यह पूरा सच नहीं था। दरअसल, कोविड के बाद शेयर बाजार में जो उछाल आया, उसने निवेशकों को बंपर रिटर्न दिया और इसी तेजी का सीधा फायदा म्यूचुअल फंड में SIP करने वालों को भी मिला।

हालांकि, पिछले करीब ढाई वर्षों से बाजार में जारी गिरावट ने निवेशकों को परेशान कर दिया है। अधिकांश म्यूचुअल फंड स्कीम ने इस अवधि में निगेटिव या मामूली रिटर्न दिया है। इसका असर यह हुआ है कि म्यूचुअल फंड में निवेश 12 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस बीच कई बड़े मार्केट एक्सपर्ट ने मौजूदा बाजार हालात देखते हुए SIP को तुरंत बंद कर देने की सलाह दी है। तो क्या अब वक्त आ गया है कि SIP को छोड़कर RD (रिकरिंग डिपॉजिट) की ओर निवेशक लौट जाएं?

निवेशकों को क्यों पसंद आती है SIP

SIP का सबसे बड़ा आकर्षण इसका संभावित रिटर्न माना जाता है। जहां PPF आमतौर पर सरकार द्वारा तय ब्याज दर के अनुसार रिटर्न देता है और FD व RD में बैंक पहले से निश्चित ब्याज दर ऑफर करते हैं, वहीं SIP का रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड SIP से औसतन 10% से 15% या उससे अधिक सालाना रिटर्न मिलने की संभावना बताई जाती है, जबकि PPF का रिटर्न आमतौर पर 7% से 8% के आसपास और FD-RD का रिटर्न लगभग 6% से 8% के बीच रहता है। हालांकि SIP में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती, लेकिन अधिक रिटर्न की संभावना और कंपाउंडिंग का फायदा मिलने के कारण पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों का रुझान तेजी से SIP की ओर बढ़ा है।

रिटर्न के मामले मे पिछड़ी SIP

हालांकि, हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पिछले तीन वर्षों में देश के कई बड़े और लोकप्रिय म्यूचुअल फंड्स निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं दे पाए। टेबल में शामिल 10 बड़े फंड्स में से ज्यादातर का Point-to-Point रिटर्न 1% से 7% के बीच रहा है। वहीं, इसी अवधि में खुदरा महंगाई (CPI Inflation) औसतन 4% रही, जबकि कई बैंकों ने सेविंग अकाउंट पर 3% से 4% और एफडी पर 6% से 8% तक ब्याज दिया। ऐसे में SBI Nifty 50 ETF, SBI BSE Sensex ETF, UTI Nifty 50 ETF और Nippon India Nifty BeES जैसे कई बड़े इंडेक्स फंड निवेशकों को खास फायदा नहीं पहुंचा सके। हालांकि सभी फंड्स की तस्वीर एक जैसी नहीं रही। Kotak Midcap Direct (10.05%), HDFC Mid Cap Direct (9.29%) और Parag Parikh Flexi Cap Direct (7.37%) जैसे फंड्स ने महंगाई और पारंपरिक बैंकिंग रिटर्न को पीछे छोड़ा। लेकिन लिस्ट में शामिल अधिकांश बड़े AUM वाले फंड्स का प्रदर्शन यह दिखाता है कि केवल बड़ा फंड साइज या लोकप्रियता बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं है।

फंड का नामPoint to Point Return (%)1 Year Return (%)कैटेगरीExpense Ratio (%)AUM (₹ करोड़)
SBI Nifty 50 ETF2.92-6.60Large Cap ETF0.042,05,278
Parag Parikh Flexi Cap Direct7.37-3.25Flexi Cap0.531,40,949
SBI BSE Sensex ETF1.21-9.36Large Cap ETF0.041,15,687
HDFC Flexi Cap Direct7.33-1.65Flexi Cap0.581,01,822
HDFC Mid Cap Direct9.292.53Mid Cap0.6297,350
ICICI Prudential Large Cap Direct3.97-5.05Large Cap0.7276,297
Nippon India Small Cap Direct5.420.45Small Cap0.5474,604
UTI Nifty 50 ETF2.94-6.57Large Cap ETF0.0568,963
Kotak Midcap Direct10.054.11Mid Cap0.3263,539
Nippon India ETF Nifty 50 BeES2.93-6.59Large Cap ETF0.0362,890

SIP नहीं रहा वेल्थ क्रिएटर

SIP को धन सृजन यानी वेल्थ क्रिएशन और लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए एक प्रभावी विकल्प माना जाता है। लेकिन वर्तमान में शेयर बाजार की स्थिति और रिकवरी के स्पष्ट संकेत न दिखाई देना इसके वेल्थ क्रिएटर बनने में कहीं न कहीं बाधा बन रहा है। शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और कमजोर प्रदर्शन के कारण कई निवेशकों की SIP को लेकर उम्मीदें प्रभावित हुई हैं। जब बाजार लंबे समय तक दबाव में रहता है और रिकवरी के स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं देते, तो SIP से मिलने वाले संभावित रिटर्न भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रह जाते। ऐसे माहौल में SIP वेल्थ क्रिएशन का माध्यम नहीं रह जाती। यहां समझने की जरूरत है कि बाजार लंबे समय तक सुस्त बना रहे तो निवेशकों को अपेक्षित रिटर्न मिलने में देरी हो सकती है।

SIP VS RD

SIP VS RD

AMFI (Association of Mutual Funds in India) के लेटेस्ट आंकड़े बताते हैं कि बीते महीने मई में कुल 51.70 लाख एसआईपी अकाउंट डिस्कन्टीन्यू हुए हैं। इसका मतलब है कि SIP स्टॉपेज रेशियो 95.46 प्रतिशत रहा, यानी हर 100 नई SIP शुरू होने पर लगभग 95 SIP बंद कर दी गईं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बड़ी संख्या में निवेशक या तो अपने निवेश को बीच में रोक रहे हैं या फिर बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए SIP से बाहर निकल रहे हैं।

क्या महंगाई को मात देगी SIP?

वेस्ट एशिया क्राइसिस, कच्चे तेल के ऊंचे दाम और बढ़ती महंगाई जैसी चुनौतियां शेयर बाजार के लिए दबाव पैदा कर रही हैं। कई अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और आर्थिक विकास दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और SIP निवेशकों को अपेक्षित रिटर्न मिलने में अधिक समय लग सकता है। RBI ने भी हाल ही में महंगाई के अनुमान को बढ़ाया है । ऐसे माहौल में अल्प और मध्यम अवधि में SIP का प्रदर्शन दबाव में रह सकता है, जिससे यह महंगाई को लगातार मात देने में संघर्ष करती हुई दिखाई दे सकती है।

निवेशकों का अंतिम रिटर्न टैक्स से होता है प्रभावित

यह भी समझें कि म्यूचुअल फंड में निवेश से होने वाली कमाई पर टैक्स भी निवेशकों के अंतिम रिटर्न को प्रभावित करता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में अगर यूनिट्स को एक साल से अधिक समय तक रखने के बाद बेचा जाता है तो लाभ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है। वर्तमान नियमों के अनुसार, निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स देना पड़ता है। वहीं, एक साल से कम अवधि में यूनिट्स बेचने पर होने वाला लाभ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) की कैटेगरी में आता है, जिस पर अलग दर से टैक्स लगाया जाता है।

SIP की जगह क्यों चुनें RD?

वर्तमान समय में सुरक्षित और निश्चित रिटर्न के लिए RD एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। यह एक जोखिम-मुक्त निवेश है। RD में हर महीने एक तय राशि जमा की जाती है और निवेश के समय ही ब्याज दर निर्धारित हो जाती है, जिससे मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि का अनुमान पहले से लगाया जा सकता है। यह पूरी तरह बाजार के उतार-चढ़ाव से मुक्त होती है, इसलिए निवेशक को नुकसान का डर नहीं रहता। नियमित बचत की आदत विकसित करने, अल्प या मध्यम अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए पैसा जोड़ने अपने निवेश में स्थिरता के लिए RD को चुना जा सकता है।

उदाहरण से समझें तो अगर जून 2024 से जून 2026 तक हर महीने 10,000 निवेश किए जाएं (कुल निवेश ₹2.40 लाख) और रिटर्न स्थिर मान लिया जाए, तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है-

विकल्परिटर्न (%)24 महीने बाद अनुमानित वैल्यूकुल मुनाफा
Kotak Midcap Direct (सबसे बेहतर)10.05%₹2,66,815₹26,815
बैंक RD 6.30%₹2,56,403₹16,403
10 फंड्स का औसत5.34%₹2,53,817₹13,817
SBI BSE Sensex ETF (सबसे कमजोर)1.21%₹2,43,049₹3,049

इस टेबल से हर महीने 10,000 निवेश पर बड़ा फर्क देखा जा सकता है। जहां Kotak Midcap Direct ने 2 साल में करीब 26,800 का मुनाफा दिया होता, वहीं SBI BSE Sensex ETF से कमाई महज 3,000 रहती। दूसरी तरफ 6.3% ब्याज वाली साधारण RD करीब 16,400 का रिटर्न देकर ज्यादातर बड़े फंड्स के औसत प्रदर्शन को पीछे छोड़ देती।

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