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शॉर्ट या लॉन्ग टर्म FD के लिए कौन-सी अवधि है बेस्ट? जानिए इन्वेस्टमेंट प्लानिंग का सही गणित

एफडी को सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता है। अगर आप भी एफडी में निवेश की योजना बना रहे हैं तो आपको केवल ब्याज दर ही नहीं सही एफडी अवधि को भी चुनना सीखना चाहिए।

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एफडी में निवेश की सही अवधि कैसे चुनें (AI Generated Image)

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) उन निवेश विकल्पों में शामिल है, जिन्हें सुरक्षित और निश्चित रिटर्न के लिए सबसे अधिक पसंद किया जाता है। हालांकि, केवल अच्छी ब्याज दर देखकर एफडी में निवेश करना काफी नहीं है। निवेश की सही अवधि (Tenure) को चुनना भी उतना ही जरूरी है। अगर एफडी का टेन्योर आपकी वित्तीय जरूरतों और लक्ष्यों के अनुसार तय किया जाए, तो आपको बेहतर रिटर्न मिलने के साथ-साथ समय से पहले एफडी तोड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। आइए जानते हैं एफडी को लेकर सही अवधि (short term vs long term fd) कैसे चुन सकते हैं-

वित्तीय लक्ष्य करें तय

एफडी में निवेश करने से पहले यह तय करें कि आप किस उद्देश्य के लिए पैसा जमा कर रहे हैं। अगर आपको 1-2 साल में घर की डाउन पेमेंट, बच्चों की फीस या किसी दूसरे खर्च के लिए पैसे की जरूरत है, तो कम अवधि की एफडी बेहतर हो सकती है। वहीं, रिटायरमेंट या लंबे समय के लक्ष्य के लिए लंबी अवधि की एफडी चुनना सही होगा। जब निवेश का टेन्योर आपके लक्ष्य से मेल खाता है, तो समय से पहले एफडी तोड़ने की संभावना कम हो जाती है।

अपनी आय की स्थिरता का करें आकलन

एफडी की अवधि चुनते समय अपनी मासिक आय और नकदी की जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए। अगरआपकी आय नियमित है और हर महीने निश्चित वेतन मिलता है, तो आप लंबे समय के लिए एफडी कर सकते हैं। वहीं, अगर आपकी आय अनियमित या मौसमी है, तो छोटी अवधि की एफडी अधिक सुविधाजनक हो सकती है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर पैसा जल्दी उपलब्ध हो जाता है।

ब्याज दरों के ट्रेंड पर रखें नजर

एफडी का टेन्योर चुनने में मौजूदा ब्याज दरें भी अहम भूमिका निभाती हैं। जब बाजार में ब्याज दरें अधिक होती हैं, तो कई निवेशक लंबी अवधि की एफडी चुनते हैं ताकि ज्यादा समय तक ऊंची ब्याज दर का लाभ मिल सके। वहीं, अगर ब्याज दरों में बदलाव की संभावना हो, तो छोटी अवधि की एफडी चुनना भी एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

FD Laddering रणनीति अपनाएं

अगर आपके पास निवेश के लिए बड़ी राशि है, तो पूरी रकम एक ही एफडी में लगाने के बजाय अलग-अलग अवधि की कई एफडी बनाई जा सकती हैं। इसे FD Laddering कहा जाता है। उदाहरण के लिए, आप अपनी राशि को 1 साल, 3 साल और 5 साल की एफडी में बांट सकते हैं। इससे एक ओर बेहतर लिक्विडिटी बनी रहती है और दूसरी ओर अलग-अलग समय पर मैच्योर होने वाली एफडी का फायदा भी मिलता है।

इमरजेंसी फंड का भी रखें ध्यान

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी पूरी बचत एफडी में नहीं लगानी चाहिए। किसी भी मेडिकल या अन्य आपात स्थिति के लिए कुछ राशि आसानी से उपलब्ध रहने वाले इमरजेंसी फंड के रूप में रखनी चाहिए। इससे जरूरत पड़ने पर एफडी समय से पहले तोड़ने की नौबत नहीं आएगी और आपको प्रीमैच्योर विदड्रॉल पर लगने वाले संभावित नुकसान से भी बचाव मिलेगा।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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