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शेयर बाजार में भारी गिरावट के संकेत, टोक्यो से न्यूयॉर्क तक 'रक्तपात', UAE के बाजार बंद

अमेरिका-इजरायल और ईरान के संघर्ष का असर शेयर बाजारों पर दिखने लगा है। गिफ्ट निफ्टी, जापान और चीन से डाउ फ्यूचर तक हर जगह भारी गिरावट है। ऐसे में भारतीय बाजार में भी तेज दिख सकती है। वहीं, UAE ने अपने बाजार दो दिन के लिए बंद कर दिए हैं।

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दबाव में वैश्विक बाजार

वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों ने निवेशकों की धड़कन बढ़ा दी है। भारतीय बाजार खुलने से पहले GIFT Nifty करीब 140 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि अमेरिकी बाजारों के संकेतक Dow Futures में 300 अंकों तक की कमजोरी नजर आई। इन संकेतों से साफ है कि दलाल स्ट्रीट पर आज का सत्र दबाव में शुरू हो सकता है।

ग्लोबल संकेत क्यों बिगड़े?

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने जोखिम लेने की भूख कम कर दी है। ब्रेंट क्रूड के दामों में तेजी से आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई का खतरा बढ़ता है। इसका सीधा असर इक्विटी वैल्यूएशन पर पड़ता है, क्योंकि ऊंची लागत कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित करती है। विदेशी बाजारों में आई बिकवाली का असर एशियाई संकेतकों पर भी दिखा, जिससे भारतीय बाजार के लिए माहौल नकारात्मक बन गया।

सेंसेक्स-निफ्टी पर क्या असर?

अगर शुरुआती संकेतों को आधार मानें तो BSE Sensex और NIFTY 50 में गैप-डाउन ओपनिंग संभव है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 25,000 का स्तर अहम सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। इसके नीचे फिसलने पर बिकवाली तेज हो सकती है। ऊपर की तरफ 25,400–25,500 का दायरा मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव?

तेल और गैस, एविएशन और ऑटो सेक्टर सबसे अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइंस की ईंधन लागत बढ़ती है, जबकि ऑटो कंपनियों पर इनपुट कॉस्ट का दबाव आता है। पेंट और केमिकल कंपनियों के मार्जिन पर भी असर पड़ सकता है। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भी विदेशी फंड की बिकवाली से कमजोरी आ सकती है।

एफआईआई-डीआईआई की भूमिका

हाल के सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की चाल को प्रभावित किया है। अगर ग्लोबल संकेत कमजोर बने रहते हैं तो एफआईआई का रुख निर्णायक रहेगा। घरेलू संस्थागत निवेशक कुछ हद तक गिरावट को थाम सकते हैं, लेकिन भारी वैश्विक दबाव में बाजार की दिशा बाहरी कारकों से तय होगी।

UAE का बाजार बंद

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हड़कंप मचा है। UAE ने एहतियातन अपने दोनों प्रमुख शेयर बाजार Abu Dhabi Securities Exchange और Dubai Financial Market को सोमवार 2 मार्च और मंगलवार 3 मार्च के लिए बंद करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब क्षेत्र में जारी हमलों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है।

एशियाई बाजारों में भी गिरावट

एशिया में कारोबारी हफ्ते की शुरुआत भी कमजोरी के साथ हुई। जापान का प्रमुख इंडेक्स Nikkei 225 शुरुआती कारोबार में करीब 2.3 फीसदी टूट गया। वहीं, दक्षिण कोरियाई बेंचमार्क इंडेक्स KOSPI 1.% से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। इसी तरह हेंग सेंग इंडेक्स में 2.38% फीसदी की गिरावट आई है। ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि इक्विटी जैसे जोखिम भरे एसेट से दूरी बना रहे हैं। बाजार में वोलैटिलिटी इंडेक्स में भी उछाल दर्ज किया गया है, जो घबराहट का संकेत देता है।

निवेशकों के लिए रणनीति

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में जोखिम प्रबंधन सबसे अहम है। शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस के साथ रणनीति बनानी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट चरणबद्ध निवेश का अवसर भी दे सकती है, बशर्ते वे मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान दें। कुल मिलाकर, गिफ्ट निफ्टी से लेकर डाउ फ्यूचर तक दिख रही कमजोरी यह संकेत दे रही है कि बाजार में आज वोलैटिलिटी ऊंची रह सकती है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि क्या घरेलू बाजार शुरुआती झटके के बाद संभल पाते हैं या वैश्विक ‘रक्तपात’ का असर दिनभर बना रहता है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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