Market Closing Snapshot: भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही गिरावट में बंद हुए। Sensex जहां 116.14 अंक या 0.14 फीसदी की गिरावट के साथ 85,408.70 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान Sensex ने 85,738.18 का हाई और 85,342.19 का लो बनाया। दिन की शुरुआत इंडेक्स ने 85,533.11 पर की थी, जबकि पिछला बंद 85,524.84 रहा था। इंट्राडे हाई से क्लोजिंग तक Sensex करीब 330 अंक फिसला, जो साफ तौर पर ऊंचे स्तरों पर बिकवाली का संकेत देता है।
वहीं, NSE Nifty 50 35.05 अंक या 0.13 फीसदी टूटकर 26,142.10 पर बंद हुआ। Nifty ने 26,170.65 पर ओपनिंग की थी और कारोबार के दौरान 26,236.40 का हाई तथा 26,123.00 का लो छुआ। 26,150 के अहम स्तर के नीचे बंद होना यह दिखाता है कि बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन फेज में बना हुआ है।
FII की बिकवाली से बाजार पर दबाव
बाजार गिरने की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली रही। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक FII ने पिछले सत्र में करीब ₹1,794.8 करोड़ की नेट सेलिंग की। यह लगातार दूसरा दिन था जब विदेशी निवेशक बिकवाल बने रहे। साल के आखिरी कारोबारी सत्रों में FII फ्लो कमजोर रहने से निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा और ऊपरी स्तरों पर फ्रेश खरीदारी सीमित रही।
सेक्टोरल मार्केट में मुनाफावसूली
हाल के सत्रों में अच्छी तेजी के बाद IT, फार्मा और ऑयल एंड गैस शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। IT और फार्मा इंडेक्स में करीब 0.5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। बड़े फार्मा शेयरों में कमजोरी से इंडेक्स पर दबाव बढ़ा, जबकि ऑयल एंड गैस शेयरों में भी चुनिंदा बिकवाली देखने को मिली। ऊंचे वैल्यूएशन पर निवेशक फिलहाल मुनाफा काटते नजर आए।
H-1B वीजा पॉलिसी से IT शेयरों पर असर
IT शेयरों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी बनी रही। इसकी वजह अमेरिका की H-1B वीजा पॉलिसी में किया गया बदलाव है। नई व्यवस्था के तहत वीजा अब केवल लॉटरी सिस्टम के जरिए नहीं दिए जाएंगे, बल्कि ज्यादा सैलरी और ज्यादा स्किल वाले प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे भारतीय IT कंपनियों की हायरिंग स्ट्रेटेजी और लागत पर असर पड़ने की आशंका है, जिसके चलते IT स्टॉक्स में दबाव देखने को मिला।
ब्रॉड मार्केट और सेक्टरल ट्रेंड
सेक्टरल फ्रंट पर बैंकिंग, फाइनेंस, मेटल, मीडिया और रियल्टी शेयरों में सीमित मजबूती दिखी, जिससे गिरावट कुछ हद तक संभली। वहीं IT, फार्मा, केमिकल्स और कंज्यूमर शेयर कमजोर रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिला-जुला रुझान देखने को मिला, जो यह संकेत देता है कि बाजार फिलहाल सेक्टर रोटेशन के दौर में है।
ग्लोबल मार्केट भी रहे मिले-जुले
ग्लोबल बाजारों से भी साफ दिशा नहीं मिली। एशियाई बाजारों में जापान का Topix करीब 0.5 फीसदी गिरा और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 लगभग 0.4 फीसदी टूटा। वहीं चीन का शंघाई कंपोजिट करीब 0.2 फीसदी चढ़ा। अमेरिकी बाजारों में मजबूत आर्थिक आंकड़ों से जोखिम लेने की धारणा को सहारा मिला, लेकिन विदेशी फंड आउटफ्लो ने घरेलू बाजार पर दबाव बनाए रखा। इस तरह ऊंचे स्तरों पर वैल्यूएशन, FII बिकवाली और IT-फार्मा जैसे हैवीवेट सेक्टरों में कमजोरी के चलते भारतीय शेयर बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन मोड में है। शॉर्ट टर्म में बाजार की चाल काफी हद तक विदेशी निवेशकों के रुख और ग्लोबल संकेतों पर निर्भर करेगी।
