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क्या Resign देने के बाद कंपनी आपसे जबरदस्ती मांग सकती है नोटिस पीरियड? क्या कहता है लेबर कोड का नियम

प्राइवेट नौकरी में इस्तीफे के बाद नोटिस पीरियड को लेकर अक्सर असमंजस रहता है। 2026 लेबर कोड के नए नियमों और एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट के तहत जानिए क्या कंपनी आपको जबरन रोक सकती है और नोटिस से जुड़े आपके क्या अधिकार हैं।

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क्या Resign देने के बाद कंपनी आपसे जबरदस्ती मांग सकती है नोटिस पीरियड?

जब कोई कर्मचारी अपनी नौकरी से इस्तीफा (Resignation) देता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती नोटिस पीरियड (Notice Period) पूरी करने की आती है। आमतौर पर कंपनियों के नियमों के मुताबिक, कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने से 1 से 3 महीने पहले नोटिस देना होता है या इस अवधि का वेतन चुकाना पड़ता है। लेकिन कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि कर्मचारी तुरंत नई नौकरी ज्वाइन करना चाहता है या कंपनी के माहौल से परेशान होकर तुरंत निकलना चाहता है, ऐसे में उसके मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या कंपनी किसी पर जबरन नोटिस पीरियड थोप सकती है।

हाल ही में लेबर कोड (Labour Code) के नियमों और कॉरपोरेट सेक्टर के प्रावधानों को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट की गई है, जिसके तहत यह जानना बेहद जरूरी है कि एक कर्मचारी और नियोक्ता (Employer) के कानूनी अधिकार क्या होते हैं और क्या कंपनी आपको जबरदस्ती रोक सकती है।

क्या कहता है लेबर कोड का नियम?

कानूनी रूप से देखें तो जब कोई कर्मचारी कंपनी ज्वाइन करता है, तो वह एक एंप्लॉयमेंट एग्रीमेंट (Employment Agreement) पर हस्ताक्षर करता है, जिसमें नोटिस पीरियड से जुड़ी शर्तें और नियम पहले से तय होते हैं। यह एग्रीमेंट दोनों पक्षों के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट की तरह काम करता है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारी को कंपनी छोड़ने से पहले नोटिस अवधि पूरी करनी होती है या कंपनी की सहमति से 'बाय-आउट' (Notice Pay Buyout) का विकल्प चुनना होता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कोई कंपनी आपको बंधक बनाकर जबरन काम करवा सकती है। यदि कोई कर्मचारी नोटिस पीरियड पूरा किए बिना अचानक नौकरी छोड़ना चाहता है, तो कंपनी उसे जबरदस्ती रोक तो नहीं सकती, लेकिन एग्रीमेंट के उल्लंघन के कारण कंपनी उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (F&F) रोक सकती है, रिलीविंग लेटर या एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट देने से मना कर सकती है, या अनुबंध के अनुसार हर्जाने की मांग कर सकती है।

नए लेबर कोड में क्या हुए बदलाव?

नए संभावित लेबर कोड और श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों के हितों और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कई तरह के प्रावधानों पर चर्चा चल रही है, ताकि नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया को दोनों पक्षों के लिए पारदर्शी बनाया जा सके। नियमों के अनुसार, यदि कंपनी और कर्मचारी दोनों आपसी सहमति बना लेते हैं, तो नोटिस पीरियड को कम भी किया जा सकता है या पूरी तरह माफ किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि कर्मचारी अपनी बकाया सैलरी या अर्जित छुट्टियों (Earned Leaves) को नोटिस पीरियड में एडजस्ट करना चाहे, तो वह कंपनी से बात करके ऐसा कर सकता है। कई मामलों में कंपनियां खुद भी यह चाहती हैं कि यदि कर्मचारी का प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है, तो उसे लंबा नोटिस पीरियड खींचने के बजाय जल्द रिलीव कर दिया जाए ताकि अनावश्यक खर्चों से बचा जा सके।

इस्तीफा देने के बाद किसी भी तरह के कानूनी विवाद या भविष्य की परेशानियों से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका यही है कि आप कंपनी के एचआर (HR) विभाग के साथ खुलकर बात करें और पेशेवर तरीके से मामलों को सुलझाएं। अचानक बिना बताए नौकरी छोड़कर जाना आपकी करियर की साख और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (Background Verification) को खराब कर सकता है, जिसका असर आपकी अगली नौकरी पर पड़ सकता है। इसलिए, हमेशा अपने अपॉइंटमेंट लेटर की शर्तों को अच्छी तरह पढ़ें, कंपनी के साथ शालीनता से संवाद करें और यदि संभव हो तो आपसी सहमति से नोटिस पीरियड का समाधान निकालकर ही एक नई शुरुआत करें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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