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Tata Sons IPO : वैल्यू अनलॉकिंग की उम्मीद, टाटा ग्रुप की कई कंपनियां होंगी मालामाल

टाटा समूह को कंट्रोल करने वाली कंपनी टाटा संस पर लिस्टिंग का दबाव बढ़ रहा है। अगर कंपनी लिस्ट होती है, तो वैल्यू अनलॉकिंग से टाटा ग्रुप की कई कंपनियों को फायदा होगा।

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टाटा संस आईपीओ को लेकर बढ़ा दबाव

Tata Sons IPO को लेकर टाटा ग्रुप पर दबाव बढ़ रहा है। भले ही Tata Group की इस होल्डिंग कंपनी के लिए लिस्टिंग से कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। लेकिन, इसमें हिस्सेदारी रखने वाली टाटा समूह की कई कंपनियों के लिए यह वैल्यू अनलॉकिंग का बड़ा अवसर बन सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने टाटा संस के NBFC के तौर पर डी-रजिस्ट्रेशन की मांग खारिज कर दी है। इससे कंपनी पर अपर लेयर NBFC के लिए लागू लिस्टिंग नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ गया है।

टाटा सन्स में किस की कितनी हिस्सेदारी?

Tata Sons में 9 Tata कंपनियों की कुल 12.83% हिस्सेदारी है। इनमें 7 कंपनियां listed हैं और उनकी हिस्सेदारी करीब 11.9% बैठती है। इन कंपनियों ने दशकों से Tata Sons में यह investment रखा हुआ है, लेकिन unlisted होने की वजह से इन holdings का बाजार में रोजाना valuation नहीं होता।

किस कंपनी की कितनी हिस्सेदारी?

लिस्टेड कंपनियों में Tata Steel और Tata Motors की करीब 3.06%-3.06% हिस्सेदारी है। इसके अलावा Tata Chemicals की 2.53%, Tata Power की 1.65%, Indian Hotels की 1.11%, Tata Consumer Products की 0.43% और Tata Investment Corporation की 0.08% हिस्सेदारी है। अगर Tata Sons का वैल्यूएशन ₹10 लाख करोड़ माना जाए, तो 3.06% हिस्सेदारी की वैल्यू करीब ₹30,600 करोड़ बैठती है। यही वजह है कि टाटा सन्स की लिस्टिंग इन कंपनियों के लिए वैल्यू अनलॉकिंग का अवसर है।

टाटा केमिकल को सबसे बड़ा फायदा?

इस पूरी कहानी में Tata Chemicals सबसे ज्यादा चर्चा में है। कंपनी की टाटा सन्स में करीब 2.5% हिस्सेदारी है। SBI सिक्योरिटीज के आंकड़ों के आधार पर मार्च 2026 में इस हिस्सेदारी की वैल्यू रीब ₹25,330 करोड़ बैठती थी। यह रकम कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टाटा केमिकल के मार्केट कैप से भी ज्यादा है।

टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के लिए भी बड़ा ट्रिगर

10 लाख करोड़ के सैद्धांतिक वैल्यूएशन के आधार पर Tata Sons में Tata Steel और Tata Motors दोनों की हिस्सेदारी ₹61,200 करोड़ के करीब है। रिपोर्ट के मुताबिक यह उनकी संबंधित मार्केट कैप का करीब 13% और 28% है। ऐसे में टाटा सन्स की लिस्टिंग इन कंपनियों के शेयरों में इन्वेस्टर इंट्रेस्ट बढ़ाने वाला ट्रिगर भी बन सकती है।

तीन दशक पुरानक निवश होगा कैश

अगर Tata Sons लिस्ट होती है, तो टाटा स्टील और टाटा मोटर्स की तरफ से 1995-96 में राइट्स इश्यू के जरिए टाटा सन्स में निवेश किया था। अब तीन दशक बाद यही निवेश वैल्यू अनलॉकिंग के जरिये बड़ा मौका बन सकता है। यहां सबसे बड़ा सवाल वैल्यूएशन का ही है। कंपनी का वैल्यूएशन जितना ज्यादा होगा, होल्डिंग कंपनियों के पास मौजूद हिस्सेदारी का वैल्यूएशन भी उतना ही ज्यादा होगा।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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