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Share Market Closing : पांच दिन में 5 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की पूंजी, मुनाफावसूली ने रैली रोकी

निवेशकों के लिए अगस्त का पहला सप्ताह राहत भरा रहा है। 5 दिन में निवेशकों की पूंजी में 5 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है। हालांकि, सप्ताह के आखिरी दिन बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए।

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सेंसेक्स निफ्टी लाल फिर भी बढ़ी निवेशकों की पूंजी

Share Market Closing : शेयर बाजार ने शुक्रवार को कमजोरी के साथ कारोबार खत्म किया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के चलते Sensex करीब 500 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 65.35 अंक (0.27%) की गिरावट के साथ 24,570.65 पर बंद हुआ। हालांकि, शुक्रवार की गिरावट के बावजूद निवेशकों के लिए पूरा सप्ताह शानदार रहा। पिछले पांच कारोबारी दिनों में BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹5.75 लाख करोड़ बढ़ गया, जिससे साफ है कि बाजार में तेजी का रुख अभी पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है।

5 दिन में निवेशकों की संपत्ति ₹5.75 लाख करोड़ बढ़ी

BSE के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई, 2026 को सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹4,87,42,524.92 करोड़ था। वहीं 7 अगस्त 2026 को यह बढ़कर ₹4,93,17,210.01 करोड़ पर पहुंच गया। यानी सिर्फ पांच कारोबारी दिनों में निवेशकों की कुल संपत्ति में ₹5,74,685 करोड़ (करीब ₹5.75 लाख करोड़) का इजाफा हुआ। हालांकि, गुरुवार के मुकाबले शुक्रवार को मार्केट कैप में करीब ₹1.77 लाख करोड़ की कमी आई, जो दिनभर की मुनाफावसूली का असर रही।

क्यों टूटा बाजार?

बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और वित्तीय शेयरों का रहा। रिजर्व बैंक के एनबीएफसी से जुड़े ड्राफ्ट प्रस्ताव के बाद निवेशकों ने इस सेक्टर में मुनाफावसूली की। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाला। इसके चलते निफ्टी 50 65.35 अंक की गिरावट के साथ 24,570.65 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी बैंक में 0.55% की गिरावट आई, जिससे यह 57,746.45 अंक पर बंद हुआ। वहीं, Sensex 0.58% की गिरावट के साथ 455.59 अंक लुढ़कर 78,499.17 अंक पर बंद हुआ।

मार्केट ब्रेडथ में हल्की कमजोरी

भले ही बेंचमार्क और बैंकिंग जैसे बड़े इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, लेकिन पूरे बाजार की तस्वीर उतनी कमजोर नहीं रही। BSE पर इस दौरान कुल 4,460 स्टॉक्स में ट्रेडिंग हुई, इनमें से 2,044 स्टॉक्स बढ़त में बंद हुए। जबकि, 2,215 स्टॉक्स लाल निशान में बंद हुए। यह आंकड़े बताते हैं कि गिरावट के बावजूद बाजार में कई शेयरों में खरीदारी बनी रही। खास बात यह रही कि 52 सप्ताह का नया हाई बनाने वाले शेयरों की संख्या नए लो पर पहुंचने वाले शेयरों से दोगुनी से अधिक रही।

ऑटो और आईटी सेक्टर ने दिखाई ताकत

बैंकिंग शेयरों की कमजोरी के बीच कुछ सेक्टरों में शानदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी ऑटो 1.84% की तेजी के साथ बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी IT 1.42% और निफ्टी पीएसयू बैंक 0.65% की तेजी में बंद हुआ। वहीं, निफ्टी मेटल में भी 0.50% की तेजी आई। ऑटो इंडेक्स ने कारोबार के दौरान अपना नया 52 सप्ताह का उच्च स्तर भी छुआ।

गिरावट की पांच बड़ी वजह

1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी: ब्रेंट क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जिससे भारत के आयात बिल और महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ी।

2. बैंकिंग और एनबीएफसी शेयरों में बिकवाली: आरबीआई के ड्राफ्ट प्रस्ताव के बाद वित्तीय कंपनियों के शेयर दबाव में रहे।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: एफआईआई की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा कमजोर की।

4. वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत: एशियाई बाजारों और अमेरिकी वायदा बाजार में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखा।

5. मुनाफावसूली: इस सप्ताह आई तेज तेजी के बाद निवेशकों ने सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन मुनाफा वसूलना बेहतर समझा।

अगले सप्ताह किन बातों पर रहेगी नजर?

अगले सप्ताह बाजार की चाल पर कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, RBI के NBFC ड्राफ्ट पर बाजार की प्रतिक्रिया और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का असर देखने को मिल सकता है। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट जरूर रही, लेकिन पूरे सप्ताह की तस्वीर अब भी सकारात्मक दिखाई देती है। एक दिन की मुनाफावसूली के बावजूद सिर्फ पांच कारोबारी दिनों में निवेशकों की संपत्ति करीब ₹5.75 लाख करोड़ बढ़ी। इसके साथ ही 171 शेयरों का 52 सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंचना यह संकेत देता है कि बाजार में चुनिंदा सेक्टरों और शेयरों में खरीदारी का रुझान अब भी मजबूत बना हुआ है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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