GARUD System : Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए नई योजनाओं की शुरुआत को तेज और आसान बनाने के लिए ‘गरुड़’ नाम की नई प्रणाली (GARUD System) को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से अब AIF कंपनियां पहले की तुलना में कहीं तेजी से अपनी नई स्कीम लॉन्च कर सकेंगी।
क्या है ‘गरुड़’ सिस्टम?
GARUD System: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की इस नई व्यवस्था का नाम ‘गरुड़’ (GARUD) रखा गया है, जिसका पूरा नाम है ग्रीन-चैनल फॉर AIF रोलआउट अपॉन डॉक्यूमेंट एक्नॉलेजमेंट। इसका मकसद AIF योजनाओं के लॉन्च में लगने वाले समय को कम करना है। अब AIF अपने प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPM) जमा करने के सिर्फ 10 कार्यदिवस के भीतर नई स्कीम के लिए फंड जुटाना शुरू कर सकेंगे। अभी तक इस प्रक्रिया में करीब 30 दिन का समय लगता था। यानी अब निवेश योजनाएं तीन गुना तेजी से शुरू हो सकेंगी।
किन योजनाओं को मिलेगा फायदा?
SEBI ने कहा है कि यह नई सुविधा उन योजनाओं के लिए लागू होगी जो गैर-मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए हैं। हालांकि, बड़े मूल्य वाले फंड (LVF), केवल मान्यता प्राप्त निवेशकों वाली स्कीमें और एंजेल फंड इस नई व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे। इसका मतलब है कि आम निवेशकों के लिए आने वाली कई नई योजनाएं अब जल्दी बाजार में उपलब्ध हो सकेंगी।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई व्यवस्था का नाम ‘गरुड़’ रखा गया है
AIF सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा निवेश
SEBI के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में AIF इंडस्ट्री में तेज ग्रोथ देखी गई है। 31 मार्च 2026 तक देश में पंजीकृत AIF की संख्या बढ़कर 1,849 हो गई, जबकि पांच साल पहले यह संख्या सिर्फ 732 थी। यानी इस दौरान करीब 135 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसी अवधि में AIF के जरिए जुटाई गई कुल प्रतिबद्ध पूंजी 15.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वहीं, दिसंबर 2025 तक कुल शुद्ध निवेश 6.45 लाख करोड़ रुपये रहा। SEBI का मानना है कि तेजी से बढ़ते इस सेक्टर में नई योजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करना जरूरी था ताकि पूंजी का बेहतर और तेज इस्तेमाल हो सके।
मान्यता प्राप्त निवेशकों को भी राहत
SEBI ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए केवल मान्यता प्राप्त निवेशकों और एंजेल फंड्स के लिए PPM दाखिल करने में मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता खत्म कर दी है। अब फंड मैनेजर सीधे सेबी के पास दस्तावेज जमा कर सकेंगे। इसके लिए सिर्फ कंपनी के CEO और अनुपालन अधिकारी का आश्वासन पत्र देना होगा। खास बात यह है कि ऐसी योजनाएं PPM दाखिल होते ही तुरंत शुरू की जा सकेंगी।
सोशल स्टॉक एक्सचेंज के लिए भी अहम फैसला
इसके अलावा सेबी बोर्ड ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) से जुड़े क्षमता निर्माण कोष के प्रबंधन में भी बदलाव को मंजूरी दी है। अब यह फंड National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड) से हटाकर नए बने SSE-Capacity Building Foundation को सौंपा जाएगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि SEBI के ये फैसले निवेश प्रक्रिया को सरल, तेज और ज्यादा पारदर्शी बनाएंगे, जिससे AIF सेक्टर को और मजबूती मिलेगी।
