SBI FD Returns: अगर आप अपनी बचत को सुरक्षित जगह निवेश करना चाहते हैं और बाजार के जोखिम से बचना चाहते हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट(FD) एक लोकप्रिय विकल्प साबित हो सकता है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ओर से भी अलग-अलग अवधि की FD पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर की जा रही हैं। अच्छी बात ये है कि बैंक की ओर से 5 साल से लेकर 10 साल तक की अवधि वाली FD पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है।
6 लाख रुपये की FD पर कितना रिटर्न?
मान लीजिए कोई सामान्य ग्राहक SBI में 6 लाख रुपये की FD 6 साल के लिए करता है। इस केस में सामान्य नागरिकों के लिए 6.05 प्रतिशत सालाना ब्याज दर लागू होगी। यानी 6 साल बाद सामान्य नागरिक के लिए मैच्योरिटी राशि करीब 8,60,240 रुपये हो सकती है। निवेश पर करीब 2,60,240 रुपये का ब्याज मिल सकता है।
वहीं, अगर निवेशक सीनियर सिटिजन है तो उसे 7.05 प्रतिशत सालाना ब्याज ऑफर किया जाएगा। सीनियर सिटिजन को 6 लाख रुपये की FD पर 6 साल बाद करीब 9,12,552 रुपये मैच्योरिटी राशि के रूप में मिल सकते हैं। इस स्थिति में कुल ब्याज करीब 3,12,552 रुपये बैठेगा।
हालांकि, यह कैलकुलेशन बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर दी गई ब्याज दर और उदाहरण के आधार पर हैं। वास्तविक मैच्योरिटी राशि FD के प्रकार, ब्याज भुगतान विकल्प, निवेश की तारीख और उस समय लागू बैंक की दरों के आधार पर अलग हो सकती है।
| निवेशक | निवेश राशि | अवधि | ब्याज दर | अनुमानित मैच्योरिटी राशि | अनुमानित ब्याज |
|---|---|---|---|---|---|
| सामान्य नागरिक | ₹6 लाख | 6 साल | 6.05% | ₹8,60,240 | ₹2,60,240 |
| वरिष्ठ नागरिक | ₹6 लाख | 6 साल | 7.05% | ₹9,12,552 | ₹3,12,552 |
FD के ब्याज पर लगता है टैक्स
यह भी समझें कि FD में निवेश करने से आपका मूलधन सुरक्षित रह सकता है, लेकिन इससे मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता। FD से मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल होता है और आपकी लागू आयकर दर के हिसाब से उस पर टैक्स देय हो सकता है।
TDS कब कट सकता है?
बैंक FD के ब्याज पर निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज होने पर TDS काट सकता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक, पोस्ट ऑफिस या को-ऑपरेटिव बैंक से मिलने वाले ब्याज पर 1 लाख रुपये की सीमा तक TDS नहीं काटा जाता। लेकिन सामान्य नागरिकों के केस में यही सीमा घटकर 50 हजार रुपये हो जाती है।
ध्यान रखें कि सिर्फ TDS कटने या न कटने को टैक्स की अंतिम देनदारी नहीं समझना चाहिए। अगर आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में आती है, तो FD से मिला ब्याज ITR में दिखाना जरूरी हो सकता है। वहीं, अगर आपकी कुल आय के आधार पर टैक्स देनदारी नहीं बनती, तो स्थिति अलग हो सकती है।
