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मिल जाए महिलाओं को अवसर,तो 3 साल में 770 अरब डॉलर बढ़ जाएगी भारतीय इकोनॉमी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Mar 7, 2023, 11:24 AM IST

Role Of Women in Economy: CII की मार्च 2022 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश में 43 करोड़ से ज्यादा महिलाएं कामकाज उम्र की कैटेगरी में आती हैं। इसमें से करीब 34.3 करोड़ महिलाएं असंगठित क्षेत्र में काम करती है। और जीडीपी में उनकी करीब 18 फीसदी आबादी है।

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महिलाओं की इकोनॉमी भागीदारी बढ़ाना जरूरी

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Role Of Women in Economy: महात्मा गांधी ने कहा था'कोई देश कितना महान है उसे आंकने के लिए यह जानना जरूरी है कि वह अपने सबसे कमजोर वर्ग के साथ कैसा व्यवहार करता है।' ठीक इसी तरह किसी देश की आर्थिक तरक्की को आंकने का तरीका यह है कि उस देश की महिलाओं का इकोनॉमी में क्या योगदान है। भारतीय इकोनॉमी इस समय दुनिया की 5 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है। लेकिन महिलाओं की इकोनॉमी में योगदान को लेकर एक स्याह सच भी है कि आज भी उनकी असंगठित क्षेत्र में ही ज्यादा भागीदारी है। इस कमी को इशारा करते हुए मैकेंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट कहती है अगर महिलाओं को समान अवसर मिल जाए तो 2025 तक भारत की GDP में 770 अरब डॉलर का इजाफा हो जाएगा।

कामकाजी वर्ग में 43.2 करोड़ महिलाएं

उद्योग जगत के संगठन CII की मार्च 2022 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश में 43 करोड़ से ज्यादा महिलाएं कामकाज उम्र की कैटेगरी में आती हैं। इसमें से करीब 34.3 करोड़ महिलाएं असंगठित क्षेत्र में काम करती है। और जीडीपी में उनकी करीब 18 फीसदी आबादी है।

सीआईआई जिस असंगठित क्षेत्र की ओर इशारा कर रही है। उसमें महिलाओं का एक बड़ा वर्ग कृषि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। असंगठित क्षेत्र में काम करने का एक बड़ा नुकसान यह है कि ज्यादातर महिलाएं बिना वेतन के काम करती हैं। और वहां उनके काम को ही काउंट नहीं किया जाता है। और जो महिलाएं असंगठित क्षेत्र में वेतन भी पाती हैं, उन्हें भी कम वेतन मिलता है। जिसका असर उनकी सेविंग और दूसरी जरूरतों पर पड़ता है।

स्टार्टअप में भागीदारी कम

भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है। और दुनिया में सबसे ज्यादा यूनीकॉर्न में भी भारतीय तीसरे स्थान पर है। लेकिन इस ग्रोथ स्टोरी के बावजूद स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी कम है। देश के कुल स्टार्टअप फाउंडर में महिलाओं की भागीदारी केवल 10 फीसदी है। ऐसे में यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां पर ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं। सीआईआई की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी में महिलाओं को आर्थिक क्षेत्र में मिलने वाली भागीदारी की खाई को चौड़ा कर दिया है। जिसकी वजह से यह अंतर 4.3 फीसदी बढ़ गया है। साफ है अगर भारत को दुनिया में आर्थिक महाशक्ति बनना है तो महिलाओं की इकोनॉमी में भागीदारी तेजी से बढ़ानी होंगी।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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