Home Cooked Thali Cost: देश में आम लोगों की रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ गया है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) की ताजा रिपोर्ट 'रोटी राइस रेट' के मुताबिक, जुलाई के महीने में प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने से घर में बनने वाली शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थालियों की लागत बढ़ गई है। प्याज के दामों में भारी बढ़ोतरी के कारण रसोई का बजट प्रभावित हुआ है, हालांकि आलू और टमाटर की गिरती कीमतों ने कुछ राहत देकर लागत को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोक लिया।
शाकाहारी थाली 4% और मांसाहारी थाली 9% महंगी
एएनआई के मुताबिक क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में शाकाहारी थाली की कीमत पिछले साल (साल-दर-साल) की तुलना में 4 प्रतिशत बढ़ गई है। वहीं, मांसाहारी थाली तैयार करने का खर्च 9 प्रतिशत तक बढ़ गया है। मांसाहारी थाली की कीमत में अधिक बढ़ोतरी की मुख्य वजह ब्रॉयलर (मुर्गे) के दामों में हुआ उछाल है, जो मांसाहारी थाली की कुल लागत में करीब आधी हिस्सेदारी रखता है।
प्याज, खाद्य तेल और रसोई गैस ने बिगाड़ा बजट
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्याज की कीमतों में एक साल पहले के मुकाबले 20 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है। इसका मुख्य कारण रबी की फसल का बाजार में देरी से आना और सीमित सप्लाई है। मार्च और अप्रैल के दौरान महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्याज की बची हुई फसल और भंडारण (स्टोर) में रखा माल खराब हो गया, जिससे बाजार में प्याज की आवक कम हो गई। इसके अलावा, मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे खाद्य तेल के दाम 11 प्रतिशत और एलपीजी सिलेंडर के दाम 10 प्रतिशत तक बढ़ गए।
आलू और टमाटर ने दी थोड़ी राहत
जहां प्याज और गैस के दामों ने लोगों की जेब ढीली की, वहीं आलू और टमाटर की गिरती कीमतों ने थाली को और ज्यादा महंगा होने से बचा लिया। रबी के सीजन में आलू का रकबा (बोया गया क्षेत्रफल) बढ़ने से इसका उत्पादन 2 से 3 प्रतिशत बढ़ा, जिससे आलू के दाम में साल-दर-साल 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, गर्मियों की फसल की आवक जुलाई में बेहतर रहने के कारण टमाटर के दामों में भी 2 प्रतिशत की कमी आई।
मांसाहारी थाली में चिकन ने बढ़ाई आंच
मांसाहारी थाली के और अधिक महंगे होने का मुख्य कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। मुर्गों के दाने (फीड) की लागत बढ़ने और पिछले साल की तुलना में 'सावन' के महीने में बदलाव के कारण इसके दामों में बढ़ोतरी देखी गई। पिछले साल सावन जुलाई में शुरू हुआ था, जबकि इस साल यह अगस्त में पड़ा, जिससे जुलाई में चिकन की मांग बनी रही और कीमतें ऊपर रहीं।
महीने-दर-महीने का रुझान और आगे की राह
अगर जून की तुलना जुलाई से (महीने-दर-महीने) करें, तो शाकाहारी थाली की कीमत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसका मुख्य कारण केवल एक महीने में प्याज के दामों का 23 प्रतिशत और आलू का 4 प्रतिशत बढ़ना रहा। हालांकि, मांसाहारी थाली की कीमत में जून के मुकाबले कोई बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि चिकन की मांग थोड़ी घटने से इसके दामों में 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसने सब्जियों की बढ़ी कीमतों का असर कम कर दिया। आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की कीमतें ही तय करेंगी कि आपकी रसोई का बजट कैसा रहेगा।
