Chile Copper Blocks : भारत की दिग्गज सरकारी कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) विदेशों में अपना परचम लहराने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने जानकारी दी है कि वह दक्षिण अमेरिकी देश चिली की सरकारी कंपनी 'कोडेल्को' से चार बड़े तांबा (कॉपर) ब्लॉक खरीदने की प्रक्रिया में है। यह बातचीत बहुत ही सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और इस पूरे सौदे को सुरक्षित और सही तरीके से पूरा करने के लिए 'लेनदेन सलाहकार' भी नियुक्त कर दिए गए हैं।
सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है बातचीत
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक उद्योग मंडल फिक्की (FICCI) के एक सम्मेलन के दौरान हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) अनुपम मिश्रा ने बताया कि नियुक्त किए गए सलाहकार इस समय दोनों कंपनियों के आंकड़ों और बारीकियों का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही, भारत और चिली दोनों देशों के सरकारी व कानूनी नियमों (नियामकीय पहलुओं) की भी जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह डील सही दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
भारत के लिए क्यों बेहद महत्वपूर्ण है यह डील?
यह कदम भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। भारत इस समय पर्यावरण को बचाने के लिए तेजी से 'हरित ऊर्जा' (ग्रीन एनर्जी) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा दे रहा है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों, चार्जिंग स्टेशनों और बिजली के उपकरणों में तांबे का बहुत बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। भारत में तांबे की सीमित उपलब्धता है, जिसके कारण देश को बड़ी मात्रा में इसका आयात (विदेशों से खरीद) करना पड़ता है। चिली में इन चार ब्लॉक के मिलने से भारत की आयात पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी और देश को जरूरी कच्चा माल आसानी से मिल सकेगा।
बाजार में तांबे की भारी मांग और एलएमई के रुझान
तांबे के वैश्विक बाजार पर बात करते हुए सीएमडी अनुपम मिश्रा ने कहा कि इस समय पूरी दुनिया में तांबे की मांग बहुत ज्यादा है, जबकि उस मुकाबले इसकी आपूर्ति (सप्लाई) कम है। मांग और आपूर्ति के बीच इस अंतर के कारण तांबे की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड हालांकि रिफाइनिंग (तांबा साफ करने) के क्षेत्र में अभी एक छोटा खिलाड़ी है, लेकिन बाजार की स्थितियों को देखते हुए कंपनी के पास अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के बेहतरीन मौके हैं। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में तांबे की कीमतों के मौजूदा रुझान भी कंपनी के कारोबार के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहे हैं।
एनटीपीसी और कोल इंडिया के साथ मिलकर लगाई बोली
इससे पहले भारत के खान सचिव पीयूष गोयल ने भी इस सौदे को लेकर एक बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड पहले चिली में सिर्फ एक तांबा ब्लॉक के लिए बोली लगाने की योजना बना रही थी। लेकिन भारत में तांबे की लगातार बढ़ती जरूरत और देश के भीतर इसके सीमित भंडारों को देखते हुए सरकार ने अपनी रणनीति बदली। अब हिंदुस्तान कॉपर अकेले नहीं, बल्कि देश की दो अन्य बड़ी सरकारी कंपनियों एनटीपीसी माइनिंग (NTPC Mining) और कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) के साथ मिलकर एक संयुक्त गठबंधन (Joint Venture) के रूप में इन चारों ब्लॉक के लिए बोली लगा रही है।
'नवरत्न' दर्जे की दौड़ में हिंदुस्तान कॉपर
कंपनी की इस लगातार हो रही प्रगति के बीच, जब अनुपम मिश्रा से हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड को 'नवरत्न' कंपनी का दर्जा मिलने की संभावनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। कंपनी इसके लिए जरूरी सभी मापदंडों को पूरा करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इस पर अंतिम और औपचारिक फैसला केंद्र सरकार को ही लेना है। अगर कंपनी को यह दर्जा मिलता है, तो उसे व्यापारिक और वित्तीय फैसले लेने में और अधिक स्वतंत्रता मिल जाएगी।
