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US से लाइसेंस मिलने के बाद भी यूक्रेन के लिए क्यों आसान नहीं है Patriot Missile बनाना? समझिए क्या-क्या हैं चुनौतियां

Ukraine Patriot Missile Production: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को पैट्रियट हवाई रक्षा प्रणाली बनाने के लिए लाइसेंस देने का भरोसा दिया है। नाटो शिखर सम्मेलन में हुई इस घोषणा को यूक्रेन के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी स्तर पर मिसाइल उत्पादन शुरू करने में कई साल लग सकते हैं।

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ट्रंप का यूक्रेन को बड़ा तोहफा (फोटो-एआई इमेज)

Ukraine Patriot Missile Production: रूस के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच यूक्रेन के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को अमेरिकी तकनीक से लैस 'पैट्रियट एयर-डिफेंस सिस्टम' (Patriot Air-Defense System) बनाने का लाइसेंस देने का वादा किया है। इस कदम को यूक्रेन के रक्षा इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

एपी की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो (NATO Summit 2026) शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) की मौजूदगी में कहा, "हम यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइलें बनाने का अधिकार देंगे। हम उन्हें सिखाएंगे कि यह कैसे किया जाता है और मुझे लगता है कि वे इसे काफी तेजी से बना सकते हैं।"

हालांकि, इस बड़ी घोषणा के बाद जहां एक तरफ यूक्रेन में उत्साह है, वहीं दूसरी तरफ रक्षा विशेषज्ञों और खुद यूक्रेन के अधिकारियों ने आगाह किया है कि इस विचार को हकीकत में बदलने में कई साल का लंबा वक्त लग सकता है।

क्या यूक्रेन पूरी तरह से पैट्रियट सिस्टम बनेगा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी लाइसेंस मिलने का यह मतलब कतई नहीं है कि यूक्रेन रातों-रात पूरी पैट्रियट बैटरी (जिसमें लॉन्चर, रडार सिस्टम, कमांड पोस्ट और मिसाइलें शामिल होती हैं) खुद बनाने लगेगा। पैट्रियट सिस्टम का निर्माण करने वाली अमेरिकी कंपनियां, लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन, शुरुआत में यूक्रेन को केवल कुछ हिस्सों को असेंबल करने या मिसाइलों के बाहरी हिस्से को बनाने का अधिकार दे सकती हैं।

Donlad Trump (File Photo/PTI)

Donlad Trump (File Photo/PTI)

यूक्रेन के रक्षा मंत्री के सलाहकार सेरही बेसक्रेस्तनोव का कहना है कि अमेरिकी लाइसेंस के साथ तकनीकी दस्तावेज, विशेषज्ञों की ट्रेनिंग और विदेशी सलाहकारों की मदद तो मिलेगी, लेकिन पूरी मिसाइल को स्क्रैच से बनाना बहुत पेचीदा काम है। पैट्रियट मिसाइलें बेहद जटिल होती हैं, जिनमें सॉलिड-फ्यूल रॉकेट मोटर्स, मिलिट्री-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस रडार तकनीक का इस्तेमाल होता है।

मिसाइल के सबसे संवेदनशील हिस्से, जैसे कि इसका 'एक्टिव रडार सीकर', इतनी गोपनीय तकनीक है कि वाशिंगटन इसके पूरे दस्तावेज यूक्रेन को शायद ही सौंपेगा। ऐसे में यूक्रेन को सबसे जटिल पुर्जे बाहर से आयात करने होंगे और वे शुरुआत में सिर्फ असेंबलिंग पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

सालों का लग सकता है वक्त

एपी की मानें तो यूक्रेन की संसदीय समिति के उप-अध्यक्ष येहोर चेरनेव के अनुसार, कानूनी और कागजी प्रक्रिया कुछ महीनों में शुरू हो सकती है, लेकिन उत्पादन लाइन स्थापित करने में कम से कम 18 से 24 महीने का समय लगेगा। उदाहरण के लिए, अमेरिका में भी एक उन्नत PAC-3 मिसाइल बनाने में लगभग 24 महीने और उसके इंजन को तैयार करने में 30 महीने का समय लगता है।

इससे पहले अमेरिका ने जापान और जर्मनी जैसे देशों को पैट्रियट उत्पादन का लाइसेंस दिया है। जापान की मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज दशकों से इसका निर्माण कर रही है, जबकि जर्मनी में भी हाल ही में इसकी नई फैक्ट्री पर काम शुरू हुआ है। लेकिन यूक्रेन के सामने इन देशों से अलग एक और बहुत बड़ी चुनौती है और वह है रूस के लगातार होते हवाई हमले।

Volodymyr Zelenskyy (File Photo/PTI)

Volodymyr Zelenskyy (File Photo/PTI)

रूसी हमले और सुरक्षा की चुनौती

यूक्रेन के रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि जैसे ही रूस को पता चलेगा कि यूक्रेन में पैट्रियट मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्री चालू हो रही है, वह स्थान मॉस्को का सबसे पहला और बड़ा टारगेट बन जाएगा। ऐसे में यूक्रेन को अपनी निर्माण इकाइयां बेहद सुरक्षित जगहों पर, जैसे कि जमीन के नीचे या बंकरों के भीतर स्थापित करनी होंगी।

कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो अमेरिकी राष्ट्रपति का यह फैसला 2026 में चल रही मिसाइलों की तात्कालिक कमी को तो तुरंत दूर नहीं कर पाएगा, लेकिन यह भविष्य के लिए एक मजबूत रणनीतिक कदम है। यदि यूक्रेन इस परियोजना में सफल रहता है, तो वह आने वाले समय में सहयोगियों पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा और यूरोप में हवाई रक्षा प्रणालियों का एक बड़ा उत्पादक बनकर उभर सकता है।

monu jha
मोनू झा author

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कं... और देखें

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