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डॉलर के सामने लुढ़कते रुपया को थामने की कोशिश, RBI ने उठाए कई कदम, निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू

Dollar vs Rupee: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डॉलर के मुकाबले रुपये में तेजी से गिरावट के बीच अधिकृत डीलरों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए। ये निर्देश तुरंत लागू हो गए हैं। इसके तहत बैंकों को कुछ नॉन-डिलीवेरेबल विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर रोक लगाने, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और ग्राहक जानकारी मांगने की अनुमति दी गई है।

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डॉलर के दबाव में रुपया, आरबीआई ने तुरंत लागू किए सख्त कदम (तस्वीर-istock)

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Dollar vs Rupee : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डॉलर के मुकाबले रुपये में आई तेज गिरावट को देखते हुए विदेशी मुद्रा बाजार में कुछ सख्त कदम उठाए हैं। बुधवार (01 अप्रैल 2026) को जारी किए गए नए निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। इन फैसलों का मकसद रुपये में हो रही ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।

एनडीडी सौदों पर रोक

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई के नए नियमों के तहत अब अधिकृत डीलर यानी वे बैंक जिन्हें विदेशी मुद्रा लेनदेन की अनुमति है, वे रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवेरेबल डेरिवेटिव (NDD) कॉन्ट्रैक्ट्स की पेशकश नहीं कर सकेंगे। यह नियम देश के अंदर रहने वाले (निवासी) और विदेश में रहने वाले (अनिवासी) दोनों तरह के ग्राहकों पर लागू होगा। सरल शब्दों में समझें तो अब ऐसे डील, जिनमें असली रुपये का लेनदेन नहीं होता बल्कि सिर्फ अंतर का भुगतान किया जाता है, उन्हें रोक दिया गया है।

डिलीवेरेबल डेरिवेटिव की अनुमति जारी

हालांकि, आरबीआई ने पूरी तरह से सभी डेरिवेटिव सौदों पर रोक नहीं लगाई है। बैंक अभी भी डिलीवेरेबल विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफर कर सकते हैं। इन सौदों में असल में मुद्रा का लेनदेन होता है, जिससे कंपनियां और निवेशक अपने जोखिम (रिस्क) को कम कर सकते हैं। लेकिन इसके साथ एक शर्त रखी गई है। जो ग्राहक ऐसे डिलीवेरेबल कॉन्ट्रैक्ट करेंगे, वे साथ में नॉन-डिलीवेरेबल सौदे नहीं कर सकेंगे।

रद्द सौदों को दोबारा बुक करने पर रोक

आरबीआई ने एक और अहम नियम लागू किया है। अगर कोई विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट नए नियम लागू होने के बाद रद्द किया जाता है, तो उसे दोबारा बुक नहीं किया जा सकेगा। इसका मकसद बाजार में अनावश्यक सट्टेबाजी को रोकना है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए बैंक अपने ग्राहकों से जरूरी दस्तावेज और जानकारी मांग सकते हैं।

संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन पर प्रतिबंध

केंद्रीय बैंक ने बैंकों को अपने संबंधित पक्षों के साथ किसी भी तरह के विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदे करने से भी रोक दिया है। ‘संबंधित पक्ष’ की परिभाषा भारतीय लेखा मानक (Ind AS 24) और अंतरराष्ट्रीय लेखा मानक (IAS 24) के अनुसार तय होगी। इसका मतलब है कि बैंक अपने ही जुड़े हुए संस्थानों या हितधारकों के साथ ऐसे सौदे नहीं कर पाएंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

रुपये में कमजोरी बना कारण

ये सभी कदम ऐसे समय उठाए गए हैं जब रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। हाल ही में एक कारोबारी सत्र के दौरान रुपया 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया था, जो एक मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर माना जाता है। रुपये की इस गिरावट ने बाजार में चिंता बढ़ा दी थी, जिसके बाद आरबीआई को हस्तक्षेप करना पड़ा।

पहले भी उठाए जा चुके हैं कदम

इससे पहले भी आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा चुका है। केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा में नेट ओपन पोजीशन की सीमा 10 करोड़ डॉलर तय की थी। नेट ओपन पोजीशन का मतलब होता है कि बैंक विदेशी मुद्रा में कितना जोखिम ले सकते हैं यानी कुल खरीद और बिक्री के बीच का अंतर।

क्या होगा असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इन कदमों से बाजार में सट्टेबाजी कम होगी और रुपये पर दबाव घट सकता है। इससे विदेशी मुद्रा बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता आने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ कारोबारियों का मानना है कि इससे हेजिंग के विकल्प सीमित हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह कदम रुपये को स्थिर करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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