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RBI की स्कीम ने कर दिया कमाल! 39 दिनों में आया $20.7 अरब विदेशी पैसा, NRI जमकर लगा रहे दांव

भारतीय शेयर बाजार से FII की निकासी, FDI में कमी और रुपये के अवमूल्यन के बीच देश को राहत की खबर मिली है। RBI की FCNR(B) स्वैप सुविधा से 39 दिनों में भारत में $20.7 अरब आए हैं।

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रिजर्व बैंक की स्कीम से आ रहा विदेशी पैसा

RBI FCNR(B) Scheme: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की खास FCNR(B) स्वैप सुविधा को उम्मीद से कहीं बेहतर प्रतिक्रिया मिली है। सिर्फ 39 दिनों में देश में 20.718 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह (Forex Inflow) हुआ है। इसमें सबसे बड़ा योगदान FCNR(B) डिपॉजिट का रहा, जिसके जरिए 17.406 अरब डॉलर आए। यानी कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का करीब 84% हिस्सा सिर्फ इसी योजना से आया। RBI की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक इस स्कीम के तहत विदेशी जमा (FCNR Deposit) उम्मीद से ज्यादा मिला है।

कई बैंक विदेशी बाजार से डॉलर उधार लेकर अपने NRI ग्राहकों को फंड उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बाद NRI वही पैसा FCNR(B) डिपॉजिट में निवेश कर रहे हैं। इस व्यवस्था को बाजार में Leverage Structure कहा जाता है और माना जा रहा है कि इस स्कीम की तेज सफलता में इसकी बड़ी भूमिका रही है। इसकी वजह से NRI रिकॉर्ड दांव लगा रहे हैं।

क्या है FCNR(B) स्कीम?

FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) Deposit ऐसी जमा योजना है, जिसमें विदेश में रहने वाले भारतीय (NRI) डॉलर, पाउंड, यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं में भारतीय बैंकों में पैसा जमा करते हैं। जमा अवधि पूरी होने पर उन्हें उसी विदेशी मुद्रा में पैसा वापस मिलता है, इसलिए विनिमय दर (Exchange Rate) का जोखिम नहीं रहता। इस बार RBI ने बैंकों को इन जमा राशियों के बदले विशेष स्वैप सुविधा दी है, जिसमें विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलने की हेजिंग लागत खुद केंद्रीय बैंक उठा रहा है। यही वजह है कि बैंक इस स्कीम में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।

कहां-कहां से आया विदेशी पैसा?

8 जून से 17 जुलाई 2026 के बीच आए 20.718 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह में 17.406 अरब डॉलर FCNR(B) डिपॉजिट से आया। इसके अलावा 1.97 अरब डॉलर बैंकों की विदेशी मुद्रा उधारी (OFCB) से मिला है। 1.342 अरब डॉलर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बाहरी वाणिज्यिक ऋण (ECB) से आए हैं।

बैंकों ने कैसे उठाया फायदा?

RBI ने बैंकों को 3 से 5 साल की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट पर बाय-सेल स्वैप सुविधा दी है। इस सुविधा का लाभ बैंक सितंबर 2026 तक उठा सकते हैं।इसके अलावा OFCB और ECB के लिए रियायती स्वैप सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। RBI की तरफ से दी गई इन सुविधाओं के चलते अकेले जून में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने करीब 1.90 अरब डॉलर और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने करीब 425 मिलियन डॉलर के नए FCNR(B) डिपॉजिट जुटाए हैं।

RBI को क्या फायदा होगा?

इस स्वैप व्यवस्था में RBI पहले चरण में बैंकों से डॉलर खरीदता है और बदले में रुपये देता है। तय अवधि पूरी होने पर वही डॉलर वापस बेच देता है। इससे RBI के पास डॉलर की उपलब्धता बढ़ती है, जिससे जरूरत पड़ने पर वह विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित कर सकता है।

क्यों अहम है यह खबर?

अगर FCNR(B) योजना के तहत इसी रफ्तार से विदेशी मुद्रा आती रही तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा। इसके साथ ही रुपये पर दबाव कम हो सकता है। आगे चलकर RBI के पास डॉलर बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता बढ़ेगी। बैंकों को विदेशी मुद्रा में सस्ता फंड मिलेगा, जिससे बाहरी वित्तीय जोखिम कम करने में मदद मिलेगी। यही वजह है कि RBI इस योजना को भारत में विदेशी मुद्रा आकर्षित करने के सबसे अहम कदमों में से एक मान रहा है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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