Loan Recovery Rules : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार (6 मई 2026) को एक नया मसौदा दिशानिर्देश (RBI loan draft guidelines) जारी किया है, जिसमें बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए लोन वसूली से जुड़े नियमों को और स्पष्ट किया गया है। इस मसौदे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय संस्थाएं आमतौर पर उधार की वसूली के लिए उधारकर्ताओं की अचल संपत्ति पर कब्जा न करें। आरबीआई ने कहा है कि ऐसी कार्रवाई केवल विशेष परिस्थितियों में ही की जानी चाहिए, न कि नियमित प्रक्रिया के तौर पर।
सामान्य हालात में संपत्ति कब्जाने पर रोक
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने साफ किया है कि विनियमित इकाइयों (आरई), जैसे बैंक और एनबीएफसी, से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे अपने रोजमर्रा के लोन कार्यों के दौरान गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों, खासकर अचल संपत्ति, को अपने कब्जे में लें। इसका मतलब यह है कि लोन वसूली के लिए सीधे जमीन या मकान पर कब्जा करना कोई सामान्य तरीका नहीं होना चाहिए। केंद्रीय बैंक चाहता है कि संस्थाएं जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करें।
कब किया जा सकता है संपत्ति का अधिग्रहण
मसौदे के अनुसार, केवल उन्हीं मामलों में संपत्ति पर कब्जा किया जा सकता है, जब लोन “गैर-निष्पादित परिसंपत्ति” यानी एनपीए बन चुका हो। इसके अलावा, यह भी जरूरी है कि वसूली के सभी अन्य उपाय पहले ही अपनाए जा चुके हों और वे असफल साबित हुए हों। ऐसी स्थिति में, बैंक या एनबीएफसी कानूनी या संविदात्मक प्रक्रिया के तहत गिरवी रखी गई अचल संपत्ति को अपने नाम कर सकते हैं।
एसएनएफए क्या है और इसका क्या मतलब है
आरबीआई ने “विशिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्ति” यानी एसएनएफए की भी परिभाषा दी है। इसका मतलब ऐसी अचल संपत्ति से है, जिसे किसी वित्तीय संस्था ने उधारकर्ता से अपने कर्ज की पूरी या आंशिक वसूली के बदले में लिया हो। इसमें वे परिसंपत्तियां भी शामिल हैं, जो बैंकिंग के अलावा अन्य रूप में प्राप्त होती हैं। यह कदम वसूली प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए उठाया गया है।
संपत्तियों का समयबद्ध निपटान जरूरी
मसौदे में यह भी कहा गया है कि अगर किसी बैंक या एनबीएफसी के पास ऐसी संपत्ति आ जाती है, तो उसे लंबे समय तक अपने पास रखने के बजाय तय समय में बेचना या निपटाना जरूरी होगा। इसके लिए अधिकतम 7 साल की समय सीमा प्रस्तावित की गई है। आरबीआई का मानना है कि समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से संपत्तियों का निपटान करने से वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और संस्थाओं को बेहतर वित्तीय लाभ भी मिलता है।
पारदर्शिता और विवेक पर जोर
आरबीआई ने इस मसौदे में यह भी स्पष्ट किया है कि संपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी तरह की अनियमितता या पक्षपात न हो। साथ ही, इससे कर्ज की अधिकतम वसूली भी संभव हो सकेगी, जिससे वित्तीय प्रणाली मजबूत होगी।
सुझाव देने का मौका
केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक लोग 26 मई तक अपने विचार और सुझाव दे सकते हैं। इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर इन नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। आरबीआई का यह कदम ऋण वसूली प्रक्रिया को अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे न केवल बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली सुधरेगी, बल्कि उधारकर्ताओं के हितों की भी बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।
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