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Explainer: लोन नहीं चुकाया तो क्या बैंक लॉक कर देगा आपका फोन? समझें RBI के नए नियम

Bank Phone Lock Rules: RBI के नए नियमों के तहत लोन डिफॉल्ट होने पर क्या बैंक आपका फोन लॉक कर सकता है? जानिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी और फोन लॉक करने को लेकर एक व्यापक गाइडलाइंस जारी की हैं।

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सावधान! लोन डिफॉल्ट पर बैंक लॉक कर सकेंगे मोबाइल, लेकिन RBI ने बांधे हाथ (तस्वीर-AI)
Authored by: Ramanuj Singh
Updated Aug 8, 2026, 16:11 IST
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Bank Phone Lock Rules : स्मार्टफोन, पर्सनल लोन या अन्य कंज्यूमर लोन की किस्तों में चूक होने पर बैंक या लोन रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर अब नकेल कसने वाली है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी और टेक्नोलॉजी के जरिए फोन लॉक करने को लेकर एक व्यापक गाइडलाइंस जारी की है। नया नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। इस नए फ्रेमवर्क का सबसे मुख्य उद्देश्य कर्ज चुकाने की प्रक्रिया में उधारकर्ताओं के सम्मान, निजता और अधिकारों की रक्षा करना है, साथ ही बैंकों को उनके सही बकाया पैसे की वसूली का सुरक्षित तरीका देना है।

बैंक कब और कैसे उठा सकेंगे कदम?

क्या बैंक किस्त न देने पर आपका मोबाइल फोन लॉक कर सकते हैं? इसका सीधा जवाब है हां, लेकिन सख्त शर्तों और तय समय-सीमा के तहत ही किया जा सकता है। RBI ने स्पष्ट किया है कि अगर आपने किसी बैंक फाइनेंस या लोन के जरिए ही वह स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप खरीदा है, तो लोन डिफॉल्ट होने पर बैंक टेक्नोलॉजी के जरिए उस डिवाइस के फीचर्स को सीमित कर सकते हैं। हालांकि, यह व्यवस्था केवल उसी डिवाइस पर लागू होगी जिसके लिए लोन लिया गया है। इसके अलावा, लोन एग्रीमेंट के दौरान ही बैंक को ग्राहक को यह साफ-साफ बताना होगा कि किस्त न चुकाने पर डिवाइस के कौन-कौन से फीचर्स को किस चरण में बैन किया जा सकता है।

अचानक नहीं बंद होगा फोन

RBI के नियमों के अनुसार, किस्त की तारीख बीत जाने के बाद शुरुआती 30 दिनों तक बैंक आपके फोन पर कोई तकनीकी पाबंदी नहीं लगा सकते। 30 दिन बीतने और नोटिस भेजे जाने के बाद ही सीमित पाबंदियां (जैसे कि कुछ ऐप या फीचर्स पर रोक) बेहद धीमे और चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती हैं। किसी भी डिवाइस पर पूर्ण प्रतिबंध तभी लगाया जा सकता है जब लोन की किस्त लगातार 60 दिनों (2 महीने) तक न चुकाई गई हो। आउटगोइंग कॉल (कॉल करने की सुविधा) को भी लोन डिफॉल्ट के 60 दिन पूरे होने से पहले ब्लॉक या बंद नहीं किया जा सकता है।

फोन के कौन-से फीचर्स कभी बंद नहीं होंगे?

आरबीआई ने ग्राहकों की सुरक्षा और मौलिक सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा है। किसी भी स्थिति में बैंक आपके फोन की इनकमिंग कॉल, एसएमएस (SMS) और इमरजेंसी एसओएस (SOS) सेवाओं को बंद या प्रतिबंधित नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर कोई फीचर आपके काम, नौकरी या रोजगार के लिए बेहद जरूरी है, तो पाबंदी लगाते समय उसमें भी बाधा नहीं डाली जानी चाहिए। ग्राहक अपने डिवाइस पर किसी भी समय यह देख सकेंगे कि उनके फोन पर किस तरह की पाबंदियां लगी हैं और उनका स्टेटस क्या है।

1 घंटे में फोन अनलॉक और देरी होने पर जुर्माना

अगर बैंक ने आपके फोन पर पाबंदी लगाई है और आप अपना बकाया पेमेंट या ओवरड्यू किस्त चुका देते हैं, तो बैंक को भुगतान मिलने के 1 घंटे के भीतर आपके फोन की सभी सेवाओं को पहले की तरह बहाल करना होगा। अगर बैंक की ढिलाई या तकनीकी खराबी के कारण फोन अनलॉक होने में 1 घंटे से ज्यादा का समय लगता है, तो बैंक को ग्राहक को हर्जाने के रूप में 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा। यह मुआवजा तब तक जुड़ता रहेगा जब तक डिवाइस पूरी तरह चालू न हो जाए, हालांकि इसकी अधिकतम सीमा आपके लोन अमाउंट के बराबर होगी।

रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी पर RBI की स्ट्राइक

रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी पर RBI की स्ट्राइक

आपके पर्सनल डाटा पर बैंक की नजर नहीं होगी

डिजिटल ऐप्स और थर्ड-पार्टी रिकवरी कंपनियों द्वारा डेटा चोरी की शिकायतों को देखते हुए RBI ने प्राइवेसी के कड़े नियम बनाए हैं। बैंकों या उनके लिए काम करने वाली तकनीकी कंपनियों को ग्राहक के फोन में मौजूद किसी भी व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच बनाने की सख्त मनाही है। इसका मतलब है कि बैंक या रिकवरी एजेंट आपके फोन में सेव कॉन्टैक्ट्स, फोटो, गैलरी, मैसेज, कॉल लॉग्स या आपकी लाइव लोकेशन हिस्ट्री को न तो देख सकते हैं और न ही उसे एक्सेस कर सकते हैं। ऐसा करना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

रिकवरी एजेंटों की मनमानी खत्म

लोन रिकवरी के नाम पर सुबह-सुबह या देर रात फोन आने, घर आकर बदसलूकी करने और मानसिक प्रताड़ना देने की शिकायतों पर आरबीआई ने सख्त रुख अपनाया है। नए नियमों के अनुसार, रिकवरी एजेंट अब केवल सुबह 8:00 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच ही लोन रीपेमेंट के लिए फोन कर सकते हैं या घर आ सकते हैं, जब तक कि ग्राहक खुद किसी अन्य समय की इच्छा न जाहिर करे। एजेंटों को ग्राहक से बात करते समय अपना आधिकारिक पहचान पत्र (ID Card) और बैंक का आधिकारिक अथॉरिटी लेटर दिखाना अनिवार्य होगा। साथ ही उनके पास बैंक द्वारा जारी नोटिस की कॉपी भी होनी चाहिए।

कॉल रिकॉर्डिंग, पारदर्शी नीतियां और बैंक की सीधी जवाबदेही

बैंकों को रिकवरी से जुड़ी सभी कॉल की रिकॉर्डिंग करनी होगी और इस रिकॉर्ड को कम से कम 6 महीने तक सुरक्षित रखना होगा। बातचीत शुरू करने से पहले ग्राहक को बताना होगा कि कॉल रिकॉर्ड हो रही है। इसके साथ ही, रिकवरी एजेंटों के इंसेंटिव और टारगेट ऐसे नहीं तय किए जाएंगे जो उन्हें ग्राहकों के साथ आक्रामक व्यवहार करने के लिए उकसाएं।

अब रिकवरी का काम केवल एक ऑपरेशनल प्रक्रिया नहीं, बल्कि बैंक के बोर्ड द्वारा तय नीति के तहत चलेगा। हर बैंक को एक समर्पित शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा, जिसकी जानकारी लोन डॉक्युमेंट्स और सभी नोटिस में दर्ज होगी। आउटसोर्स की गई किसी भी रिकवरी एजेंसी या बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट द्वारा की गई बदसलूकी के लिए केवल एजेंट नहीं, बल्कि खुद बैंक पूरी तरह जवाबदेह होगा।

RBI को क्यों लाने पड़े ये नए सख्त नियम?

बीते एक दशक में भारत में डिजिटल लोन, पर्सनल क्रेडिट, 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) और इलेक्ट्रॉनिक्स फाइनेंस का बाजार बहुत तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही रिकवरी एजेंटों द्वारा ग्राहकों को फोन पर धमकाने, सोशल मीडिया पर बदनाम करने, रिश्तेदारों या एम्प्लॉयर को परेशान करने और गलत तरीकों से फोन लॉक करने की बाढ़ आ गई थी। बिखरे हुए निर्देशों के बजाय एक पारदर्शी और सिंगल कोड लाकर आरबीआई ने कर्ज वसूलने के बैंकों के अधिकार और ग्राहकों के आत्म-सम्मान के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

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