Ratan Tata Death: अनुभवी उद्योगपति और टाटा संस के मानद अध्यक्ष (चेयरमैन) रतन टाटा का बुधवार को निधन हो गया। उन्हें सुबह उम्र संबंधी परेशानी के कारण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक सम्मानित और अग्रणी उद्योगपति टाटा अपने परोपकारी कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। टाटा ने मार्च 1991 से दिसंबर 2012 तक नमक से लेकर साफ्टवेयर तक बनाने वाली कंपनी ‘टाटा संस’ के अध्यक्ष के रूप में टाटा समूह का नेतृत्व किया। आइये जानते हैं उन्हें लोग क्यों जानते हैं?
28 दिसंबर 1937 को हुआ था जन्म
रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था। 1962 में टाटा ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया। उनके पिता नवल टाटा भी एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं।
देश-दुनिया में था रतन जी सम्मान
भारत के रत्न कहे जाने वाले दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा उन हस्तियों में शामिल थे, जिनका सम्मान देश-दुनिया में हर कोई करता था। उनकी सादगी उनका गहना था। अरबपतियों में शामिल होने के बावजूद वे अपनी सादगी से हर किसी का दिल जीत लेते थे। कई मौकों पर उन्होंने गरीब और जरूरमंद लोगों की मदद कर उन्होंने भारतीयों को गर्व महसूस कराया।
तन्हाई में बिताई जिंदगी
इतने बड़े उद्योगपति होने के बावजूद और लाखों दिलों में राज करने वाले रतन टाटा पूरी जिंदगी तन्हाई में बिता दी। उन्होंने कभी शादी नहीं की। इसके पीछे बड़ा कहानी है। रतन टाटा ने जिक्र किया था कि लॉस एजिलिस में उन्हें एक लड़की से प्यार हो गया था और मन ही मन वे उन्हें चाहने लगे। उन्होंने सोचा था कि उनसे शादी करेगे। इसी दरम्यान अपनी दादी की तबीयत खराब होने की वजह से टाटा को लॉस एंजिलिस से भारत अपने घर लौटना पड़ा। मीडिया खबरों के मुताबिक, रतन टाटा ने कहा कि मैंने सोचा था कि जिससे मैं शादी करना चाहता हूं वो मेरे साथ भारत आएगी, लेकिन 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध की वजह से उनके माता-पिता इस शादी के लिए राजी नहीं हुए और रिश्ता टूट गया। अरबपति होने के बावजूद रतन टाटा पूरी जिंदगी कुंवारे रहे और अपने पहले प्यार की याद में अपनी जवानी ‘द टाटा ग्रुप’ को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचाने में लगा दी।
