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एक सूती साड़ी बन गई जीवन रेखा...नेपाल में आए विनाशकारी बाढ़ में 21 श्रद्धालुओं ने करीब से देखी मौत, ऐसे बची जान

तमिलनाडु के तिरुपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों से 21 श्रद्धालुओं का एक दल नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकला था। तभी अचानक बादलों के गरजने और पहाड़ों से चट्टानें चटकने की भयानक आवाजें सुनाई देने लगीं।

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नेपाल बाढ़ में साड़ी बनी जीवन रेखा.. (AI Image)

नेपाल और चीन की सीमा के पास रसुवा जिले में आई अचानक बाढ़ (Nepal Flash Flood) और विनाशकारी भूस्खलन के बीच तमिलनाडु से गए 21 तीर्थयात्रियों ने मौत को बेहद करीब से देखा। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले इस दल के लिए एक साधारण सूती साड़ी किसी वरदान और मजबूत रेस्क्यू रोप यानी बचाव रस्सी से कम साबित नहीं हुई। अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस के बल पर सभी 21 यात्री सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे।

अचानक बदला मौसम और तबाही का मंजर

तमिलनाडु के तिरुपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों से 21 श्रद्धालुओं का एक दल नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकला था। रसुवा जिले के दुर्गम पहाड़ी इलाके में जब उनकी बस नेपाल-चीन सीमा की ओर बढ़ रही थी, तभी अचानक बादलों के गरजने और पहाड़ों से चट्टानें चटकने की भयानक आवाजें सुनाई देने लगीं।

देखते ही देखते ऊपर की पहाड़ियों से भारी मात्रा में कीचड़, मलबे और पानी का तेज बहाव सड़क पर आने लगा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बस के स्थानीय नेपाली ड्राइवर ने तत्परता दिखाई और गाड़ी को तुरंत रोककर सभी यात्रियों से सामान छोड़कर तुरंत ऊपर की ओर भागने की चेतावनी दी। ड्राइवर की समय पर दी गई इस चेतावनी से यात्रियों को निर्णय लेने का कुछ पल का समय मिल गया।

जब रास्ते हुए बंद और फिसलने लगा मलबा

जैसे ही सभी यात्री बस से बाहर निकले, एक बड़े भूस्खलन ने मुख्य सड़क को पूरी तरह से बंद कर दिया। सड़क के एक तरफ उफान मारती नदी और दूसरी तरफ से तेजी से गिरता हुआ मलबा था। यात्रियों के पास खुद को सुरक्षित करने के लिए ढलान वाली पहाड़ी पर लगभग एक मंजिला ऊंची चढ़ाई चढ़कर ऊपर जाना ही एकमात्र रास्ता बचा था।

लेकिन लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और फिसलन भरे कीचड़ की वजह से ऊपर चढ़ना बेहद खतरनाक हो गया था। दल में मौजूद कई बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष चढ़ने का प्रयास करते, लेकिन कीचड़ के कारण बार-बार नीचे फिसल जाते। स्थिति पल-पल बिगड़ती जा रही थी और पानी का स्तर तेजी से ऊपर आ रहा था।

साड़ी बनी रेस्क्यू रोप: सूझबूझ से बची जिंदगी

ऐसे संकट के समय में दल में शामिल पूंगोडी नाम की एक महिला यात्री ने अपनी जान की परवाह न करते हुए गजब का दिमाग लगाया। उन्होंने महसूस किया कि बिना किसी सहारे के बुजुर्ग यात्रियों का ऊपर पहुंचना असंभव है। पूंगोडी ने तुरंत अपनी सूती साड़ी उतारी, ऊपर केवल स्वेटर पहना और साड़ी के मजबूत कपड़े को एक सिरे से खुद पकड़कर नीचे की ओर लटका दिया। दल के अन्य पुरुष सदस्यों ने पास ही पड़ा एक लावारिस केबल वायर भी खोज निकाला। साड़ी और केबल वायर को आपस में जोड़कर एक मजबूत रस्सी तैयार की गई।

इसके बाद शुरू हुआ जान बचाने का संघर्ष

ऊपर पहुंचे यात्रियों ने साड़ी के दूसरे सिरे को मजबूती से संभाला। नीचे फंसे श्रद्धालुओं ने एक-एक कर साड़ी और वायर के सहारे चढ़ना शुरू किया। जो बुजुर्ग महिलाएं बिल्कुल भी चढ़ने की स्थिति में नहीं थीं, उनके कमर में साड़ी को कसकर बांधा गया और ऊपर खड़े लोगों ने पूरा जोर लगाकर उन्हें खींचा।

सुरक्षित बचाव और वतन वापसी

लगभग एक घंटे के कठिन संघर्ष के बाद, सभी 21 तीर्थयात्री मलबे और पानी के बहाव से दूर एक सुरक्षित पहाड़ी टीले पर पहुंचने में सफल रहे। बाद में नेपाली सशस्त्र पुलिस बल (APF) के जवानों ने यात्रियों को देखकर अपने नजदीकी कैंप में पहुंचाया, जहां उन्हें प्राथमिक चिकित्सा, भोजन और गर्म कपड़े मुहैया कराए गए।

इस घटना की जानकारी मिलते ही काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और तमिलनाडु सरकार के कल्याण विभाग ने समन्वय स्थापित किया। सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित नेपाल की राजधानी काठमांडू लाया गया और वहां से चेन्नई के लिए विमान से भेजा गया। चेन्नई एयरपोर्ट पर परिजनों से मिलते ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं, और उन्होंने इस बात पर राहत जताई कि पूंगोडी की एक साड़ी और तेज फैसले ने 21 जिंदगियों को नया जीवन दिया।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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