बिजनेस

प्री-फिल्ड आईटीआर में आंख मूंदकर न करें भरोसा, 'सबमिट' बटन दबाने से पहले AIS से जरूर मैच कर लें ये 4 चीजें!

प्री-फिल्ड ITR फॉर्म से टैक्स भरना बेहद आसान हो गया है, लेकिन इस डेटा पर आंख मूंदकर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। कोई भी गलती होने पर इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है, इसलिए 'सबमिट' बटन दबाने से पहले AIS से इन 4 चीजों का मिलान जरूर कर लें।

Image

Income Tax

आयकर रिटर्न (Income Tax Return ) दाखिल करने का सीजन आते ही टैक्सपेयर्स के बीच फॉर्म भरने की सरगर्मी तेज हो जाती है। आजकल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने करदाताओं की सुविधा के लिए 'प्री-फिल्ड आईटीआर' (Pre-filled ITR) की व्यवस्था की है। इसका मतलब है कि जब आप अपना आईटीआर फॉर्म खोलते हैं, तो आपकी सैलरी, बैंक ब्याज और टैक्स डिडक्शन (TDS) जैसी कई जानकारियां पहले से ही भरी हुई मिलती हैं। पहली नजर में यह प्रक्रिया बेहद आसान और समय बचाने वाली लगती है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स लगातार आगाह कर रहे हैं कि प्री-फिल्ड डेटा पर आंख मूंदकर भरोसा करना आपके लिए महंगा साबित हो सकता है। कोई भी गलती होने पर आयकर विभाग आपको सीधे नोटिस थमा सकता है। इसलिए, 'सबमिट' बटन दबाने से पहले आपको अपने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) के साथ इस डेटा का मिलान करना बेहद जरूरी है।

सैलरी इनकम और फॉर्म 16

पहले सैलरी इनकम और फॉर्म 16 का मिलान (Salary Income and Form 16 Verification) करना बेहद आवश्यक है। प्री-फिल्ड आईटीआर में आपकी नौकरी से होने वाली आय का डेटा आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) द्वारा दाखिल किए गए टीडीएस रिटर्न से ऑटोमैटिक आ जाता है। लेकिन कई बार कंपनियों से डेटा अपलोड करने में देरी हो जाती है या कोई तकनीकी चूक हो सकती है। इसलिए, अपने फॉर्म 16 (Form 16) में दिए गए ग्रॉस सैलरी के आंकड़ों को प्री-फिल्ड फॉर्म और एआईएस (AIS) में दिख रही रकम से जरूर मिलाएं। यदि आपने साल के बीच में नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों की सैलरी का विवरण एआईएस में अलग-अलग दिखना चाहिए। यदि प्री-फिल्ड फॉर्म में कोई पुरानी या गलत सैलरी दिख रही है, तो उसे मैन्युअली ठीक करें, वरना टैक्स कैलकुलेशन गलत हो जाएगा।

ब्याज और डिविडेंड

बैंक खातों से मिलने वाला ब्याज और डिविडेंड की आय (Bank Interest and Dividend Income)। ज्यादातर टैक्सपेयर्स यह सोचते हैं कि बचत खाते (Saving Account) या फिक्स डिपॉजिट (FD) से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं लगता या विभाग को इसकी खबर नहीं होती। लेकिन असलियत यह है कि आपके पैन कार्ड (PAN) से लिंक हर बैंक आपके ब्याज की पूरी जानकारी सीधे आयकर विभाग को भेजता है, जो आपके एआईएस (AIS) और टीआईएस (TIS) में दर्ज होती है। प्री-फिल्ड आईटीआर में अक्सर केवल उसी ब्याज को दिखाया जाता है जिस पर टीडीएस कटा हो। ऐसे में, यदि आपके पास कई बैंक खाते हैं और उन पर मिला ब्याज फॉर्म में ऑटो-पॉप्युलेट नहीं हुआ है, तो एआईएस से देखकर उस छुपी हुई ब्याज आय को अपने आईटीआर में मैन्युअली जोड़ें। ऐसा न करने पर इसे 'अघोषित आय' मानकर नोटिस जारी किया जा सकता है।

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से हुआ कैपिटल गेन्स (Capital Gains from Shares and Mutual Funds) है। आजकल करोड़ों लोग स्टॉक मार्केट या म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश और ट्रेडिंग करते हैं। जब भी आप कोई शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट्स बेचते हैं, तो उससे होने वाला मुनाफा (Short-Term or Long-Term Capital Gain) सीधे आपके एआईएस में दर्ज हो जाता है। हालांकि, प्री-फिल्ड आईटीआर फॉर्म हमेशा कैपिटल गेन्स के इस बारीक डेटा को पूरी तरह और सही-सही कैप्चर नहीं कर पाता। यदि आपने इस डेटा को बिना एआईएस से मिलाए सीधे सबमिट कर दिया, तो भारी मिसमैच (Mismatch) का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, अपने ब्रोकर (जैसे Zerodha, Groww आदि) से टैक्स पीएंडएल (Tax P&L) स्टेटमेंट डाउनलोड करें, उसे एआईएस से मैच करें और फिर सही आंकड़ों को आईटीआर में दर्ज करें।

TDS, TCS

टीडीएस (TDS) और टीसीएस (TCS) का क्रेडिट (TDS/TCS Credit Verification)। आपकी सैलरी से कटा हुआ टैक्स, बैंक एफडी पर कटा टीडीएस या कोई महंगी कार या विदेशी टूर पैकेज खरीदते समय लगा टीसीएस (TCS), यह सब आपके प्री-फिल्ड फॉर्म में दिखाई देता है। लेकिन आपको यह पक्का करना होगा कि जितना टैक्स आपकी जेब से कटा है, उतना ही क्रेडिट फॉर्म 26AS और एआईएस में भी रिफ्लेक्ट हो रहा हो। यदि आपके एम्प्लॉयर या बैंक ने टीडीएस तो काट लिया लेकिन उसे सरकार के पास जमा नहीं किया, तो वह प्री-फिल्ड फॉर्म में नहीं दिखेगा। ऐसी स्थिति में आपको टैक्स का क्रेडिट नहीं मिलेगा और आपको अतिरिक्त टैक्स चुकाने का रिफंड रुक सकता है। इसलिए, फॉर्म सबमिट करने से पहले इन चारों वित्तीय विवरणों की एआईएस से गहन जांच कर लें, ताकि आपका आईटीआर पूरी तरह त्रुटिहीन और सुरक्षित रहे।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article