Petrol Diesel Rate: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है, और इस महीने यानी मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ा दिए गए हैं। IOCL, HP, BP सरकारी तेल कंपनियों द्वारा की गई ताजा बढ़ोतरी के तहत पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। कीमतों में हुए इस नए बदलाव के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल का नया भाव 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग और वाहन चालकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला पिछले कुछ दिनों से बेहद तेज रहा है। इस ताजा वृद्धि से पहले, इसी हफ्ते मंगलवार को भी पेट्रोल और डीजल के दामों में क्रमशः 87 पैसे और 91 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं, उससे कुछ दिन पहले 15 मई को तेल कंपनियों ने एकमुश्त बड़ा झटका देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर का भारी इजाफा किया था। इस तरह देखें तो महज कुछ ही दिनों के भीतर देश की जनता पर महंगाई का एक बड़ा बोझ डाल दिया गया है। तेल कंपनियों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमते बढ़ने के कारण घरेलू स्तर पर दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
इस लगातार हो रही मूल्य वृद्धि के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव (क्राइसिस) है। इस संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली किसी भी हलचल का सीधा और तुरंत असर हमारे देश की घरेलू कीमतों पर पड़ता है। पिछले कुछ महीनों में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत में भारी उछाल आया है, जिसके कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों (IOC, HPCL और BPCL) का घाटा बढ़ रहा था और इसी घाटे की भरपाई के लिए अब आम उपभोक्ताओं पर यह बोझ डाला जा रहा है।
महंगी हो जाएंगी सारी चीजें
विशेषज्ञों और आम जनता के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ईंधन के महंगे होने का असर सिर्फ गाड़ियों में तेल भरवाने तक ही सीमित नहीं रहता। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) सीधे तौर पर महंगी हो जाती है। जब ट्रकों का किराया बढ़ता है, तो मंडियों से आने वाली हरी सब्जियां, फल, दूध, राशन और रोजमर्रा के इस्तेमाल की अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी खुद-ब-खुद बढ़ जाती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में देश में आम खाने-पीने की चीजों की महंगाई और बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही, बाजार के जानकारों का यह भी मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ और कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो तेल कंपनियां आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और भी इजाफा कर सकती हैं।
