केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले चार महीनों के सबसे निचले स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें पहुंचने के बावजूद फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी उस महंगे कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया में तनाव और संकट के दौरान ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था। इसी वजह से फिलहाल उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
पेट्रोल और डीजल के दाम मई माह के दूसरे पखवाड़े में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए। यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के दो महीने से भी अधिक समय बाद हुई थी और वैश्विक ईंधन कीमतों में हुई वृद्धि से भी कम थी। इसके कारण सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने कच्चे तेल की बढ़ी लागत का बड़ा हिस्सा स्वयं वहन किया।
कंपनियों को हुआ भारी नुकसान
इस देरी से और आंशिक रूप से कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के कारण इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को पेट्रोल तथा डीजल की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घट चुकी हैं।
पुरी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री पर कुल 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौता होने के बाद पिछले दो-तीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है।
संघर्ष के चरम के दौरान कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। हालांकि, पुरी ने कहा कि कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में परिवर्तित करने वाली कंपनियां फिलहाल दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं।
(इनपुट-भाषा)
