मई 2026 के इस तपते महीने में आम आदमी को गर्मी के साथ-साथ महंगाई का भी जबरदस्त झटका लगा है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। पहली नजर में ₹3 की यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन जब हम इसे एक मिडिल क्लास परिवार के पूरे महीने के बजट के नजरिए से देखते हैं, तो यह एक बड़ा वित्तीय बोझ बनकर सामने आती है। यह बढ़ोतरी केवल गाड़ी के टैंक तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर घर की रसोई से लेकर बच्चों की स्कूल वैन तक हर जगह पड़ता है।
आपकी गाड़ी का खर्च कितना बढ़ेगा?
अगर आपके पास एक साधारण कार है और आप ऑफिस जाने या निजी कामों के लिए महीने में औसतन 80 से 100 लीटर पेट्रोल का इस्तेमाल करते हैं, तो ₹3 की बढ़ोतरी का मतलब है कि आपकी जेब पर सीधा ₹240 से ₹300 का अतिरिक्त बोझ हर महीने पड़ेगा। वहीं, अगर आप बाइक या स्कूटर का इस्तेमाल करते हैं और महीने में 30 लीटर पेट्रोल डलवाते हैं, तो आपका खर्च करीब ₹90 से ₹100 बढ़ जाएगा। लेकिन असली चिंता उन लोगों के लिए है जो कैब या ऑटो से सफर करते हैं, क्योंकि ईंधन महंगा होते ही इनके किराए में भी 10% से 15% तक की वृद्धि होने के आसार बढ़ जाते हैं।
किचन के बजट पर हमला
पेट्रोल-डीजल की कीमतों का सीधा संबंध माल ढुलाई (Logistics) से होता है। भारत में अधिकांश सब्जियां, फल और अनाज ट्रकों के जरिए एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाए जाते हैं, जो डीजल पर चलते हैं। डीजल की कीमत ₹3 बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ जाता है। ट्रक मालिक अपनी इस बढ़ी हुई लागत को वसूलने के लिए माल ढुलाई का किराया बढ़ा देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि मंडियों में आलू, प्याज, टमाटर और अन्य जरूरी सामानों के दाम ₹2 से ₹5 तक चढ़ जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, इस तेल की बढ़ोतरी की वजह से एक औसत परिवार का किचन बजट हर महीने ₹500 से ₹800 तक बढ़ सकता है।
स्कूल वैन और अन्य सेवाएं भी होंगी महंगी
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सेवाओं पर भी तुरंत दिखता है। स्कूल वैन और बस संचालकों ने पहले ही फीस बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं। अगर आपके घर से दो बच्चे स्कूल जाते हैं, तो ट्रांसपोर्टेशन फीस में ₹200 से ₹400 तक का इजाफा हो सकता है। इसके अलावा, डिलीवरी एप्स (जो 10-मिनट डिलीवरी देते हैं) और ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स भी अपने 'डिलीवरी चार्जेस' बढ़ा सकती हैं या फ्री डिलीवरी की सीमा को और ऊपर ले जा सकती हैं।
कुल मिलाकर कितनी बढ़ेगी आपकी 'मंथली ईएमआई'?
अगर हम ईंधन के सीधे खर्च, बढ़े हुए किरायों और महंगी होती सब्जियों को जोड़ दें, तो एक मध्यमवर्गीय परिवार का मासिक खर्च औसतन ₹1500 से ₹2500 तक बढ़ने वाला है। यह उन लोगों के लिए बड़ी चुनौती है जिनकी आय स्थिर है। बचत का हिस्सा कम होगा और लोगों को अपने अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जल्द शांत नहीं हुईं, तो महंगाई का यह सिलसिला और भी आगे जा सकता है।
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