पाकिस्तान ने एक बड़ा और चौकाने वाला कदम उठाते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का पूरा $3.45 बिलियन (लगभग 3.45 अरब डॉलर) का कर्ज चुका दिया है। 'स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान' (SBP) ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर विदेशी मुद्रा संकट और महंगाई से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम एक साथ चुकाने से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में भारी गिरावट आएगी, जिससे आने वाले दिनों में देश की आर्थिक स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
पाकिस्तान ने चुकाया कर्ज
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दी गई जानकारी के अनुसार, इस भुगतान को दो हिस्सों में पूरा किया गया है। $1 बिलियन की किस्त 23 अप्रैल 2026 को 'अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट' (ADFD) को लौटाई गई, जबकि बाकी के $2.45 बिलियन का भुगतान पिछले हफ्ते ही कर दिया गया था। इसके साथ ही, 2019 में UAE द्वारा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए दिए गए कुल $3.45 बिलियन के डिपॉजिट का पुनर्भुगतान (Repayment) पूरा हो गया है।
दरअसल, मार्च 2026 में पाकिस्तान सरकार ने इस कर्ज की समय सीमा बढ़वाने (Rollover) के लिए UAE से बातचीत की थी, लेकिन पिछले 7 सालों में यह पहली बार हुआ कि UAE ने कर्ज की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान के पास पैसा लौटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी के अनुसार, सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार घटने के बावजूद यह फैसला "राष्ट्रीय गरिमा" (National Dignity) को बनाए रखने के लिए लिया है, ताकि दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि पाकिस्तान अपना कर्ज चुकाने में सक्षम है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ेगा बुरा असर
भले ही पाकिस्तान इसे अपनी शान से जोड़कर देख रहा हो, लेकिन आर्थिक धरातल पर यह एक जोखिम भरा कदम है। $3.45 बिलियन की निकासी के बाद पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार काफी निचले स्तर पर आ जाएगा। इससे देश के पास जरूरी सामान (जैसे तेल और दवाएं) आयात करने के लिए डॉलर की कमी हो सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की रेटिंग और मुद्रा की वैल्यू पर भी इसका दबाव बढ़ सकता है। आने वाले समय में पाकिस्तान को अपनी बाहरी फंडिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए स्रोतों या फिर से आईएमएफ (IMF) की ओर देखना पड़ सकता है।
2019 से अब तक का सफर
यह फंड 2019 में उस समय दिया गया था जब पाकिस्तान का भुगतान संतुलन (Balance of Payments) बुरी तरह बिगड़ा हुआ था। उस वक्त यूएई ने एक बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाया था। हालांकि, अब वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों के कारण कर्ज चुकाने की यह मजबूरी पाकिस्तान के लिए गले की हड्डी बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोलओवर न मिलना पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी है कि अब उसे कर्ज के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।
