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तेल की कीमतों में आग! US-Iran टेंशन से बढ़ी मुश्किल, समुद्री रास्ते बंद होने से 15 महीने के हाई पर पहुंची कीमतें

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  • Updated Mar 2, 2026, 07:39 AM IST

ईरान और इजराइल के मिडिल ईस्ट में हमले बढ़ने की वजह से आयल टैंकर्स को नुकसान पहुंचा जिसका असर ये हुआ कि शिपमेंट में रुकावट देखने को मिली। अब इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। खाड़ी देशों का कच्चा तेल जहां करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के लेवल को पार कर गया। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी कच्चे तेल के दाम 75 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर देखने को मिला।

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crude oil prices

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग ने दुनिया भर के एनर्जी बाजार में हड़कंप मचा दिया है। शनिवार को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 'महा-उछाल' देखा गया है। सोमवार को बाजार खुलते ही कच्चे तेल के दाम 7 फीसदी तक बढ़ गए, जो पिछले 15 महीनों का सबसे हाई स्तर है। समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे और तेल टैंकरों पर हमलों ने सप्लाई चेन को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। आइए समझते हैं ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध का भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ऑयल इंडस्ट्री के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, क्योंकि दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। दूसरी ओर, रविवार को हुई एक बैठक में ओपेक प्लस (OPEC+) देश हर दिन 2,06,000 बैरल तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तेल सप्लाई में होने वाली कमी की कुछ हद तक भरपाई की जा सकेगी।

15 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर कच्चा तेल

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमतें 13% की भारी तेजी के साथ $82.37 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। यह जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) के दाम भी $75 प्रति बैरल के पार निकल गए। कीमतों में यह तेजी शनिवार को हुए हमलों का सीधा परिणाम है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते मिसाइल हमलों ने न केवल अनिश्चितता बढ़ाई है, बल्कि खाड़ी तट पर कम से कम तीन तेल टैंकरों को भी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें एक नाविक की जान जाने की खबर भी सामने आई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने का खतरा

दुनिया के लिए सबसे डरावनी खबर ईरान की वह चेतावनी है, जिसमें उसने 'होर्मुज स्ट्रेट' से नेविगेशन यानी जहाजों की आवाजाही बंद करने की बात कही है। यह वह समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। शिपिंग डेटा के अनुसार, पिछले 24 घंटों में खतरे को देखते हुए तेल और गैस से लदे 200 से ज्यादा जहाजों ने समुद्र में ही लंगर डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सप्लाई लाइन लंबे समय तक बाधित रही, तो कच्चे तेल की कीमतें जल्द ही $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकती हैं।

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स? (Expert Analysis)

ANZ और सिटी ग्रुप के विश्लेषकों का मानना है कि टैंकरों पर हमलों ने तेल की सप्लाई पर 'रेड अलर्ट' जारी कर दिया है। हालांकि OPEC+ देशों ने अप्रैल से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है, लेकिन सऊदी अरब को छोड़कर बाकी सभी देश अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन कर रहे हैं। ऐसे में अगर समुद्री रास्ते बंद होते हैं, तो अतिरिक्त उत्पादन का कोई लाभ नहीं मिलेगा। फिलहाल इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर विकसित देशों के 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में दुनिया के पास लगभग 74 दिनों की मांग को पूरा करने लायक तेल का स्टॉक जमा है।

भारत पर क्या होगा असर?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में पेट्रोल और डीजल महंगा होगा? राहत की बात यह है कि विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार नहीं जाता, तब तक भारत में ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी के आसार कम हैं। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं पर्याप्त रिजर्व, भारत के पास कच्चे तेल का सुरक्षित भंडार (Strategic Reserve) मौजूद है। और दूसरी तरफ रूस का विकल्प भारत के पास अभी भी रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने का विकल्प खुला है।

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