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Oil News: क्या तेल आयात की निर्भरता बनेगी विकास की रफ्तार का ब्रेक? RBI एमपीसी सदस्य ने दी ये सलाह

Oil Import Dependencey: पश्चिम एशिया संकट ने भारत की तेल आयात निर्भरता और ऊर्जा कमजोरी उजागर की है। इससे कीमतें, महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा है, विशेषज्ञ स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज बदलाव की सलाह दे रहे हैं।

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पश्चिम एशिया संकट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ी चिंता (तस्वीर-istock)

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Oil Import Dependencey : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (West Asia Crisis) ने भारत की ऊर्जा जरूरतों पर गहरा असर डाला है। इससे यह साफ हुआ है कि देश की अर्थव्यवस्था अभी भी बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्भरता भारत को वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता के प्रति बहुत संवेदनशील बनाती है। इस स्थिति ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

तेल आयात पर निर्भरता और आर्थिक जोखिम

भारत अपनी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है, खासकर पश्चिम एशिया से। जब इस क्षेत्र में तनाव या संघर्ष बढ़ता है, तो तेल की आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। हाल के संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे भारत के लिए आयात महंगा हो गया है। इसका असर रुपये की कीमत पर भी पड़ा है और देश के व्यापार घाटे (इंपोर्ट और एक्सपोर्ट के बीच का अंतर) में बढ़ोतरी की आशंका पैदा हुई है। इसके साथ ही, महंगाई बढ़ने का खतरा भी सामने आया है क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ जाती है।

अर्थव्यवस्था पर असर, लेकिन विकास की रफ्तार मजबूत

हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और आने वाले वर्षों में लगभग 7 प्रतिशत की विकास दर बनी रहने की उम्मीद है। लेकिन यह भी माना जा रहा है कि यदि ऊर्जा संकट को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह विकास की गति पर दबाव डाल सकता है। खासकर छोटे उद्योगों (MSME) और गैस पर निर्भर उद्योगों पर इसका अधिक असर देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय: ऊर्जा सुरक्षा जरूरी

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के बाहरी सदस्य और औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान के निदेशक नागेश कुमार ने कहा कि भारत को अब ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, आयातित तेल पर अत्यधिक निर्भरता देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर बनाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को घरेलू तेल और गैस खोज को बढ़ाना चाहिए और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह संकट एक चेतावनी की तरह है, जिससे सीख लेकर दीर्घकालिक नीतियां बनानी चाहिए।

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तेल कीमतों में उबाल से भारत पर दबाव: ऊर्जा आत्मनिर्भरता अब समय की सबसे बड़ी जरूरत

सरकार के कदम और प्रयास

सरकार ने इस स्थिति के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। इसमें कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तेल आपूर्ति को स्थिर रखना और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए टैक्स में बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि आपात स्थिति में तेल की कमी न हो।

स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब तेजी से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) की ओर बढ़ना चाहिए। इसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बिजली आधारित सिस्टम को बढ़ावा देना शामिल है। घरों और उद्योगों में बिजली के उपयोग को बढ़ाकर तेल और गैस पर निर्भरता कम की जा सकती है। ऊर्जा दक्षता सुधारने से भी खपत कम होगी और लागत घटेगी।

ऊर्जा सुरक्षा ही आर्थिक मजबूती की कुंजी

पश्चिम एशिया का संकट यह दिखाता है कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। अगर देश घरेलू उत्पादन बढ़ाए, वैकल्पिक ऊर्जा अपनाए और आयात पर निर्भरता कम करे, तो भविष्य के आर्थिक झटकों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है।

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Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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