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Monsoon Session: आखिरी सप्ताह में आर-पार की लड़ाई, FCRA और परिसीमन पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष FCRA, पुलिस कार्रवाई और परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति में जुटा है।

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लोकसभा में विपक्ष का हंगामा (फोटो- संसद टीवी)

Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव और बढ़ने के आसार हैं। पिछले तीन सप्ताह से जारी हंगामे के बीच अब सरकार की प्राथमिकता अपने अहम विधायी एजेंडे को पूरा करने की है। वहीं विपक्ष अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है। ऐसे में FCRA और परिसीमन से जुड़े मुद्दे संसद के अंतिम सप्ताह की सियासत का केंद्र बन सकते हैं।

NDA और कांग्रेस ने सांसदों को जारी किए निर्देश

आखिरी सप्ताह के सियासी महत्व को देखते हुए सरकार ने NDA सांसदों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी अपने सांसदों के लिए तीन दिन की व्हिप जारी की है। दोनों पक्षों के इस कदम से साफ है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर शक्ति-परीक्षण की स्थिति बन सकती है।

FCRA पर सरकार और विपक्ष में सबसे बड़ा पेंच

FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा गतिरोध है। सरकार इसे विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बता रही है। वहीं विपक्ष इसके प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए विधेयक को जल्दबाजी में पारित नहीं करने की मांग कर रहा है।

विपक्ष की ओर से FCRA में संशोधन के साथ-साथ विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने की मांग भी की जा रही है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष को कितनी गुंजाइश देती है।

परिसीमन पर दक्षिण के दलों की भूमिका अहम

दूसरा बड़ा मुद्दा परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन का है। दक्षिण भारत के दलों की आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्विन्यास से उनके राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।

सरकार की नजर खास तौर पर दक्षिण के क्षेत्रीय दलों पर है। यदि DMK समेत कुछ दक्षिणी दलों का समर्थन सरकार को मिलता है, तो परिसीमन के विरोध में विपक्ष की रणनीति कमजोर पड़ सकती है।

विपक्ष की दो बड़ी मांगें

विपक्ष की ओर से 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान की मांग की जा रही है। इसके साथ ही विपक्ष FCRA को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय उसमें संशोधन और JPC जैसे विकल्पों पर जोर दे रहा है।

यानी सरकार के सामने चुनौती सिर्फ विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि विपक्ष और संभावित सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक सहमति बनाने की भी है।

क्या आखिरी सप्ताह में निकलेगा समाधान?

संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि यदि सरकार किसी एक मुद्दे पर नरमी दिखाती है तो विपक्ष दूसरे विधायी एजेंडे के रास्ते में बाधा कम कर सकता है।

हालांकि FCRA पर सरकार फिलहाल बड़े बदलाव के संकेत नहीं दे रही है। वहीं परिसीमन को लेकर विशेष सत्र का विकल्प भी चर्चा में बना हुआ है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सरकार की आगे की रणनीति को लेकर अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं।

अब ‘संसदीय गणित’ की परीक्षा

संसद के आखिरी सप्ताह में सरकार और विपक्ष के बीच सिर्फ विधेयकों पर टकराव नहीं होगा, बल्कि दोनों पक्षों की राजनीतिक रणनीति और संसदीय गणित की भी परीक्षा होगी।

क्या सरकार दक्षिण के दलों को साथ लेकर परिसीमन के मुद्दे पर आगे बढ़ पाएगी? क्या FCRA पर सरकार और विपक्ष के बीच कोई समझौता होगा? या फिर तीन सप्ताह की तरह संसद का आखिरी सप्ताह भी हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा? इन सभी सवालों के जवाब संसद के ‘फाइनल राउंड’ में मिलेंगे।

Himanshu Tiwari
हिमांशु तिवारीauthor

हिमांशु तिवारी एक पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का 16 साल का अनुभव है। मैंने अपना करियर क्राइम रिपोर्टर के रूप में शुरू किया था लेकिन बाद में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में शिफ्ट हो गया। पिछले 12 से अधिक वर्षों से बीजेपी, आरएसएस को कवर कर रहे हैं, कुछ आम चुनावों और कई विधानसभा चुनावों की सटीक रिपोर्टिंग भी की है। "सारी दुनिया एक मंच है" और इसलिए रंगमंच और नाटक लिखने में गहरी रुचि है।

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