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भारतीय हॉकी टीम को 1975 विश्व कप विजेताओं ने दिया जीत का मंत्र, बोले- 'देश के लिए खेलो, मिलेगा पदक'

Hockey World Cup: भारतीय हॉकी टीम 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड और बेल्जियम में विश्व कप खेलने जा रही है। इससे पहले 1975 में कुआलालम्पुर विश्व कप जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के दिग्गजों ने टीम को जीत का मंत्र दिया है।

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हॉकी टीम (फोटो साभार- Hockey India)

Hockey World Cup: 1975 में कुआलालम्पुर में विश्व कप जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के दिग्गजों ने मौजूदा टीम को एक ही मंत्र दिया है - "देश पहले, बाकी सब बाद में"। भारत ने आज तक सिर्फ एक बार हॉकी विश्व कप जीता है और वो था 51 साल पहले 1975 में। उस ऐतिहासिक जीत के नायक रहे असलम शेर खान और अशोक कुमार ने मौजूदा टीम को आगामी विश्व कप से पहले प्रेरणा दी है।

फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 51वें मिनट में विजयी गोल करने वाले अशोक कुमार ने कहा, "आपको ये भूलना होगा कि आप अपने लिए या टीम के लिए खेल रहे हैं। बस ये भाव रखो कि देश के लिए हर हाल में जीतना है। फिर आपको पदक जीतने से कोई नहीं रोक सकता। जीत-हार आपकी नहीं, देश की होगी। ये सोच खुद आपको प्रेरित करेगी। 51 साल का इंतजार बहुत हो गया, अब पदक जीतना ही है।" वहीं सेमीफाइनल में मलेशिया के खिलाफ आखिरी मिनटों में बराबरी का गोल दागने वाले असलम शेर खान ने कहा, "हमारे लिए देश मां जैसा था। उसी जज्बे से खेलो। सोचो कि मां के लिए खेल रहे हैं। जीत का जुनून ऐसा हो कि हर कीमत पर जीतकर आओ।"

'देश के सम्मान के लिए खेलना जरूरी'

1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक खेल चुके असलम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "अच्छा प्रदर्शन तभी आएगा जब आप देश के सम्मान के लिए खेलेंगे। मैं अपने लिए नहीं, देश के लिए खेलता था। इसी सोच ने हमें चैंपियन बनाया।" 1971 में कांस्य और 1973 में रजत जीतने के बाद 1975 में स्वर्ण की कसक उन्हें सताती थी। अशोक कुमार ने बताया, "1971 में सेमीफाइनल हारने के बाद कोच बलबीर सिंह सीनियर इतना रोए थे कि उन्हें चुप कराना मुश्किल था। देश के लिए जीतने का जज्बा ऐसा था।" महान ध्यानचंद के बेटे अशोक ने कहा, "कांस्य या रजत लेकर लौटने पर शर्म आती थी। लगता था पिता और चाचा को क्या दिखाऊंगा।"

हरमनप्रीत की टीम के लिए सलाह

आगामी विश्व कप 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड और बेल्जियम में होना है। असलम ने कप्तान हरमनप्रीत सिंह की टीम को लेकर कहा, "ये टीम सक्षम है। लगातार दो ओलंपिक में कांस्य जीता है। लेकिन ओलंपिक और विश्व कप अलग होते हैं। अगर पेरिस वाला जज्बा दोहराया तो 51 साल बाद पोडियम पक्का है।" अशोक ने खिलाड़ियों को सलाह दी, "त्वरित फैसले लो। बेसिक्स पर टिके रहो। गेंद पर नियंत्रण, पासिंग, आक्रमण - सब तुरंत होना चाहिए। फॉरवर्ड लाइन को असाधारण खेल दिखाना होगा।"

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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