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RIL Refinery Shutdown: नायरा के बाद अब रिलायंस बंद करेगी क्रूड यूनिट, देशभर में 2100 पेट्रोल पंपों को कैसे मिलेगा पेट्रोल-डीजल

नायरा एनर्जी के बाद अब रिलायंस अपनी जामनगर रिफाइनरी की क्रूड यूनिट को मेंटेनेंस के लिए बंद करेगी। सरकार ने यह फैसला चरणों में लिया है ताकि देश के 2100 पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सप्लाई प्रभावित न हो और किल्लत न मचे।

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RIL Refinery Shutdown

भारत के तेल और गैस क्षेत्र (Oil & Gas Sector) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने अपनी गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी की एक महत्वपूर्ण क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (Refinary) को रखरखाव के काम के लिए बंद करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हाल ही में नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने भी अपनी रिफाइनरी इकाइयों को मेंटेनेंस के लिए बंद किया था। देश की दो बड़ी निजी रिफाइनरियों के एक साथ आंशिक रूप से बंद होने की खबर ने बाजार में सप्लाई को लेकर नई चर्चाएं छेड़ दी हैं।

2100 पेट्रोल पंपों को कैसे मिलेगा पेट्रोल डीजल?

रिलायंस इंडस्ट्रीज देशभर में लगभग 2,100 से अधिक पेट्रोल पंपों का संचालन करती है (जियो-बीपी के माध्यम से)। जब रिफाइनरी की क्रूड यूनिट बंद होती है, तो उत्पादन की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन हजारों पेट्रोल पंपों पर तेल की किल्लत हो सकती है? हालांकि, कंपनी की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह एक 'प्लान्ड शटडाउन' (Planned Shutdown) है। इसका मतलब है कि कंपनी ने पहले से ही तेल का पर्याप्त स्टॉक जमा कर लिया है ताकि मेंटेनेंस के दौरान रिटेल आउटलेट्स पर ग्राहकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी की कुछ इकाइयों को बंद करने की योजना बना रही है। बताया जा रहा है कि 6.6 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली इस रिफाइनरी में नियमित मरम्मत और रखरखाव (मेंटेनेंस) के काम के लिए इस महीने के अंत में तीन से चार सप्ताह का शटडाउन लिया जा सकता है।

यह मेंटेनेंस शटडाउन तब शुरू होने की उम्मीद है जब गुजरात की ही दूसरी बड़ी कंपनी 'नायरा एनर्जी' की रिफाइनरी में कामकाज दोबारा शुरू हो जाएगा। नायरा एनर्जी की 4 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी 9 अप्रैल से मेंटेनेंस के लिए बंद है। सरकार ने यह रणनीति इसलिए अपनाई है ताकि एक साथ दो बड़ी रिफाइनरियां बंद न हों और देश में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सुचारू रूप से जारी रहे।

क्यों बंद हो रही है क्रूड यूनिट?

इस स्थिति पर सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय की भी पैनी नजर है। सरकारी सूत्रों और कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, रिफाइनरी का कामकाज पूरी तरह बंद नहीं हो रहा है, बल्कि केवल एक विशेष हिस्से की सर्विसिंग की जा रही है। आमतौर पर रिफाइनरियों को हर कुछ सालों में सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने के लिए इस तरह के शटडाउन की आवश्यकता होती है। मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होगी, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) आपूर्ति की भरपाई करने में सक्षम हैं और मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बैकअप मौजूद है।

आम आदमी के मन में सबसे बड़ा डर यह होता है कि क्या इस शटडाउन की वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि इस घरेलू मेंटेनेंस कार्य का रिटेल कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। भारत में पेट्रोल-डीजल की दरें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (International Crude Oil) की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर निर्भर करती हैं। चूंकि यह एक आंतरिक तकनीकी प्रक्रिया है, इसलिए इसे कीमतों में बढ़ोतरी का कारण नहीं माना जा सकता। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव की योजना नहीं है।

सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट

रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी के लिए लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन बेहद मजबूत होता है। शटडाउन के दौरान कंपनी अन्य रिफाइनिंग यूनिट्स से उत्पादन बढ़ाकर या इन्वेंट्री का उपयोग करके अपने नेटवर्क को चालू रखती है। इसके अलावा, रिलायंस का एक बड़ा हिस्सा निर्यात (Export) के लिए जाता है, ऐसे में कंपनी घरेलू मांग को प्राथमिकता देते हुए निर्यात में थोड़ी कटौती कर सकती है ताकि देश के भीतर तेल की कमी न हो। नायरा एनर्जी ने भी इसी तरह की रणनीति अपनाई है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी हुई है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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