Tricolor Flags Business : देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) से ठीक पहले राजधानी दिल्ली का मशहूर सदर बाजार पूरी तरह से तिरंगे के रंगों में रंग चुका है। बाजार की गलियों में देशभक्ति का अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। दुकानों में तिरंगे कपड़ों के बड़े-बड़े रोल रखे हुए हैं और सिलाई मशीनें लगातार चल रही हैं। तैयार किए गए राष्ट्रीय ध्वज देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने के लिए तेजी से पैक किए जा रहे हैं। इसी हलचल के बीच सदर बाजार में स्थित है 'भारत हैंडलूम क्लॉथ हाउस', जो राष्ट्रीय ध्वज बनाने वाली सबसे पुरानी दुकानों में से एक मानी जाती है।
पीढ़ियों से चला आ रहा राष्ट्रीय ध्वज बनाने का सफर
'भारत हैंडलूम क्लॉथ हाउस' को चलाने वाला परिवार कई पीढ़ियों से देश के लिए तिरंगा बनाने का काम कर रहा है। इस परिवार का नाता आजादी के आंदोलन के दिनों से ही झंडे बनाने के काम से रहा है। दुकान संभालने वाले अब्दुल मलिक बताते हैं कि आजादी की लड़ाई के दौरान उनके दादा और पिता बंगाल से खादी का कपड़ा मंगवाकर झंडे तैयार करते थे। देश की आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही। साल 1962 में, जब भारत और चीन का युद्ध चल रहा था, उसी दौरान इस परिवार ने सदर बाजार में अपनी इस छोटी सी दुकान की शुरुआत की थी।
'फ्लैग अंकल' और छह दशकों की विरासत
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इस दुकान और परिवार की पहचान को आगे बढ़ाने में स्वर्गीय अब्दुल गफ्फार का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने महज 15-16 साल की उम्र में झंडे बनाने का काम शुरू कर दिया था और छह दशकों से अधिक समय तक लगातार तिरंगे बनाते रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 'हर घर तिरंगा' अभियान के दौरान अब्दुल गफ्फार के योगदान का विशेष उल्लेख किया था, जिसके बाद लोग उन्हें प्यार से 'फ्लैग अंकल' बुलाने लगे। 29 दिसंबर 2025 को 81 वर्ष की आयु में गफ्फार साहब का निधन हो गया। अब उनके छोटे भाई अब्दुल मलिक और परिवार की तीसरी पीढ़ी इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ा रही है।
ऐतिहासिक मौकों और संकट के समय निभाई भूमिका
यह दुकान केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं है, बल्कि देश के कई ऐतिहासिक और भावुक क्षणों की साक्षी रही है। 1962 का भारत-चीन युद्ध हो, आपातकाल का दौर, 1999 का कारगिल संघर्ष, अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हो या फिर हाल ही में शुरू हुआ 'हर घर तिरंगा' अभियान इन सभी मौकों पर इस दुकान से भारी मात्रा में झंडे सरकारी विभागों, संस्थानों और आम नागरिकों को मुहैया कराए गए। इन ऐतिहासिक अवसरों पर झंडों की मांग में कई गुना उछाल आया, जिसे इस परिवार ने हमेशा पूरी निष्ठा के साथ पूरा किया।
इस सीजन 30 लाख तिरंगों की रिकॉर्ड बिक्री
इस बार 80वें स्वतंत्रता दिवस को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। अब्दुल मलिक के अनुसार, बाजार में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस सीजन में उनके परिवार ने अब तक लगभग 25 से 30 लाख तिरंगे तैयार करके बेचे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के कई बड़े ऑर्डर पहले ही डिलीवर किए जा चुके हैं, और सिलाई का काम अब भी दिन-रात जारी है ताकि हर घर तक तिरंगा पहुंच सके।
