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Explainer: शहरी सहकारी बैंकों का कैसे होगा कायाकल्प?

Urban Cooperative Banks: भारत में शहरी सहकारी बैंक आम लोगों, छोटे व्यापारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इस बैंक का उतना विकास नहीं हो सका जितना होना चाहिए था। लेकिन अब सरकार इस पर काफी ध्यान दे रही है।

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सहकारी बैंकिंग में महाक्रांति: तकनीक और पारदर्शिता से बदलेगी शहरी सहकारी बैंकों की सूरत! (तस्वीर- AI जनरेटेड)
Authored by: Ramanuj Singh
Updated Aug 9, 2026, 13:22 IST
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Urban Cooperative Banks : भारत के बैंकिंग सिस्टम में शहरी सहकारी बैंक (UCBs) हमेशा से आम लोगों, छोटे व्यापारियों और स्वरोजगार से जुड़े व्यक्तियों की रीढ़ रहे हैं। हालांकि, बदलते दौर और डिजिटल क्रांति के इस युग में इन बैंकों को अस्तित्व बनाए रखने और प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए व्यापक बदलाव की जरुरत है। मुंबई में नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NUCFDC) के नए मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों के कायाकल्प का पूरा खाका पेश किया। सहकारी बैंकों को प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए अब आधुनिक तकनीक को अपनाना, कामकाज में पारदर्शिता लाना और ग्राहक सेवाओं को डिजिटल बनाना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य जरुरत बन चुका है। देश में 'सहकार से समृद्धि' के सपने को साकार करने के लिए सहकारी बैंकिंग ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

NUCFDC की भूमिका

NUCFDC भारत में शहरी सहकारी बैंकों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा स्वीकृत टॉप संगठन और स्व-नियामक निकाय (Self-Regulatory Organization) के रूप में काम करता है। यह संस्था बैंकों को पूंजीगत सहायता, आईटी बुनियादी ढांचा, साइबर सुरक्षा और तरलता (Liquidity) सहायता प्रदान करती है। NUCFDC का मुख्य कार्यालय अब नई दिल्ली से मुंबई (महाराष्ट्र) स्थानांतरित कर दिया गया है, जो इस क्षेत्र के लिए एक रणनीतिक कदम है। वर्तमान में देश में करीब 1,400 शहरी सहकारी बैंक कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 690 बैंक पहले ही NUCFDC के सदस्य बन चुके हैं। केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने अपील की है कि बाकी बचे सभी यूसीबी को भी अगले एक साल के भीतर इस संगठन से जुड़ जाना चाहिए। इसके साथ ही अधिक से अधिक बैंकों को जोड़ने के उद्देश्य से NUCFDC को सदस्यता शुल्क में कटौती करने पर विचार करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि छोटे बैंक भी बिना किसी वित्तीय बोझ के इसका हिस्सा बन सकें। मंत्री ने कहा कि भारत को समृद्ध बनाने के लिए इसके लोगों के बीच समृद्धि को बढ़ावा देने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि केवल पूंजी बाजार ही इस उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा का हमें साथ-साथ स्वरोजगार की एक नए सिस्टम बनाने की जरुरत है। शहरी सहकारी बैंक ऐसा कर सकते हैं और यह हमारी जिम्मेदारी है।

शहरी सहकारी बैंकों का नेटवर्क

  • कुल शहरी सहकारी बैंक (UCBs) : 1,400
  • एनयूसीएफडीसी के मौजूदा सदस्य : 690
  • लक्ष्य (1 वर्ष में) : 100% कवरेज
  • कुल जमा राशि : 6 लाख रुपये करोड़ से अधिक

आरबीआई और सहकारी बैंकों के बीच धारणा का बदलाव

ऐतिहासिक रूप से भारतीय रिजर्व बैंक और शहरी सहकारी बैंकों के बीच दृष्टिकोण का अंतर रहा है। इस खाई को पाटना कायाकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम है। रिजर्व बैंक ने हाल के दिनों में सहकारिता क्षेत्र के प्रति एक सकारात्मक और सहयोगी रुख अपनाया है। RBI ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए नई शाखाएं खोलने के नियमों में ढील दी है। इसके फलस्वरूप ये बैंक अब डोरस्टेप बैंकिंग, डिमांड ड्राफ्ट और वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जैसी आधुनिक सेवाएं देने में सक्षम हो रहे हैं। इसके अलावा, 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि वाले इस विशाल क्षेत्र की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आरबीआई ने एक विशेष नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की है। सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक 'ऑन-टैप' लाइसेंसिंग व्यवस्था की घोषणा है। करीब दो दशकों से शहरी सहकारी बैंकों के नए लाइसेंस और विस्तार पर एक तरह से ठहराव आया हुआ था। इस नई व्यवस्था से सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में नए सिरे से विस्तार और वृद्धि की उम्मीद जगी है।

एनयूसीएफडीसी से देश भर के सहकारी बैंकों को मिलेगी नई ऊर्जा (तस्वीर-AI)

एनयूसीएफडीसी से देश भर के सहकारी बैंकों को मिलेगी नई ऊर्जा (तस्वीर-AI)

साइबर सुरक्षा और आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर

डिजिटल बैंकिंग के प्रसार के साथ ही सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी तेजी से बढ़ी हैं। बड़े कॉमर्शियल बैंकों की तुलना में छोटे सहकारी बैंकों के पास साइबर हमलों से निपटने के लिए महंगे तकनीकी संसाधन नहीं होते। इस चुनौती से निपटने के लिए NUCFDC एक साझा सेवा प्रदाता की भूमिका निभा रहा है। यूसीबी को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और उनके वित्तीय डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एक समर्पित सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (SOC) की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से बैंकों को न केवल उन्नत आईटी बुनियादी ढांचा मिलेगा, बल्कि 24/7 साइबर सुरक्षा निगरानी भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छोटे बैंक भी बड़े प्राइवेट और सरकारी बैंकों की तर्ज पर सुरक्षित डिजिटल सेवाएं अपने ग्राहकों को दे सकेंगे।

महाराष्ट्र और पश्चिमी भारत की अग्रणी भूमिका

भारत में शहरी सहकारी बैंकिंग का भौगोलिक संतुलन काफी हद तक पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों की ओर झुका हुआ है। देश के कुल 1400 यूसीबी में से अकेले महाराष्ट्र में 449 बैंक मौजूद हैं। अगर महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और कर्नाटक को मिला दिया जाए, तो देश के करीब 70 प्रतिशत शहरी सहकारी बैंक इन्हीं चार राज्यों में केंद्रित हैं। यही कारण है कि NUCFDC का मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करने से इस पूरे क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। मुंबई, देश की वित्तीय राजधानी होने के नाते, नीतिगत समन्वय और वित्तीय संसाधनों के आदान-प्रदान को और अधिक सुगम बनाएगी।

छोटे कर्जदार: सुरक्षित बैंकिंग का मजबूत आधार

अक्सर यह माना जाता है कि बड़े कॉर्पोरेट कर्जदार बैंकों के लिए अधिक लाभदायक होते हैं, लेकिन सहकारी बैंकिंग का अनुभव इसके उलट रहा है। छोटे कर्जदार और लघु उद्यमी शहरी सहकारी बैंकों के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद ग्राहक साबित होते हैं। गुजरात के एक सहकारी बैंक का उदाहरण इस बात की पुष्टि करता है, जहां बिना किसी भौतिक गारंटी के दिए गए 2.5 लाख रुपये तक के छोटे कर्जों की वसूली दर 99 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज की गई। यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर व्यक्तिगत संपर्कों और सामुदायिक विश्वास के आधार पर दिया गया ऋण, एनपीए के जोखिम को बेहद कम कर देता है।

स्वरोजगार और सहकार से समृद्धि का व्यापक दृष्टिकोण

भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए केवल शेयर बाजार या पूंजी बाजार पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। देश की विशाल आबादी को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्वरोजगार का एक नया और मजबूत ढांचा तैयार करना होगा। शहरी सहकारी बैंक इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। सहकार से समृद्धि की अवधारणा केवल बैंकों के वित्तीय बही-खातों को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मूल उद्देश्य आम ग्राहकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जब ग्राहक समृद्ध होंगे, तो बैंकों की जमा राशि और लोन कारोबार अपने-आप बढ़ेगा। जिस प्रकार डेयरी क्षेत्र में अमूल ने 1.25 लाख करोड़ रुपये का विशाल कारोबार खड़ा करके लाखों छोटे पशुपालकों की जिंदगी बदली, उसी तर्ज पर शहरी सहकारी बैंक भी देश के करोड़ों छोटे उद्यमियों, कारीगरों और रेहड़ी-पटरी वालों को समय पर आसान वित्तीय मदद देकर भारत की अर्थव्यवस्था को निचले स्तर से मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

शहरी सहकारी बैंकों का कायाकल्प अब केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक तय रणनीति है। NUCFDC के साझा प्लेटफॉर्म से जुड़कर जब देश के 1,400 बैंक अत्याधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा, और पारदर्शी कार्यप्रणाली को अपनाएंगे, तो यह क्षेत्र एक नई ऊर्जा के साथ उभरेगा। आरबीआई के सहयोगात्मक रुख और आधुनिक ग्राहक सेवाओं के बल पर शहरी सहकारी बैंक आने वाले समय में भारत के वित्तीय समावेश और स्वरोजगार के सबसे बड़े स्तंभ साबित होंगे।

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