1 मई 2026 की सुबह हवाई यात्रियों और एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। जहां एक तरफ कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की कीमतों में कोई भी बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। इस फैसले से उन यात्रियों को बड़ी राहत मिली है जो आने वाले दिनों में हवाई सफर की योजना बना रहे हैं, क्योंकि ईंधन के दाम न बढ़ने से अब टिकटों की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी होने की आशंका कम हो गई है।
एयरलाइंस की गुहार और सरकार का फैसला
विमान ईंधन की कीमतें स्थिर रखने का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब एयरलाइंस कंपनियां भारी दबाव में थीं। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी कंपनियों ने सरकार से स्पष्ट रूप से कहा था कि अगर एटीएफ के दाम और बढ़ाए गए, तो उनके लिए परिचालन जारी रखना नामुमकिन हो जाएगा। कंपनियों ने तो यहाँ तक चेतावनी दे दी थी कि भारी लागत के कारण उन्हें कुछ रूटों पर अपनी उड़ानें बंद करनी पड़ सकती हैं। एयरलाइंस की इसी वित्तीय स्थिति और उनकी अपील को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फिलहाल एटीएफ की कीमतों में कोई इजाफा नहीं किया है।
वैश्विक संकट और कीमतों का गणित
गौरतलब है कि हर महीने की पहली तारीख को एटीएफ के दामों की समीक्षा की जाती है। पिछले महीने यानी अप्रैल में तेल कंपनियों ने वैश्विक कारणों से एटीएफ की कीमतों में 8.5 फीसदी की भारी बढ़ोतरी की थी। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध संकट की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा था, जिससे ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ गई थीं। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए इंडियन ऑयल ने साफ किया है कि पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन के दामों को फिलहाल स्थिर रखा गया है। देश की करीब 90 फीसदी जनता इन्हीं पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग करती है, इसलिए यह फैसला एक बड़े वर्ग को राहत देने वाला है।
आपके शहर में क्या है एटीएफ का रेट?
1 मई 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में एटीएफ की कीमत 1,04,927 रुपये प्रति किलोलीटर पर स्थिर है। इसका मतलब यह है कि हवाई ईंधन लगभग 105 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिल रहा है। अन्य महानगरों की बात करें तो मुंबई में यह सबसे कम 98,247 रुपये प्रति किलोलीटर के भाव पर उपलब्ध है। वहीं कोलकाता में इसकी कीमत 1,09,450 रुपये और चेन्नई में 1,09,873 रुपये प्रति किलोलीटर बनी हुई है। इन कीमतों में कोई बदलाव न होना एयरलाइंस के लिए एक बड़ी वित्तीय मदद है।
टिकटों की कीमतों पर सीधा असर
किसी भी एयरलाइंस को चलाने के लिए होने वाले कुल खर्च का लगभग 60 फीसदी हिस्सा अकेले एटीएफ की खरीद पर खर्च होता है। यही कारण है कि जब भी हवाई ईंधन महंगा होता है, कंपनियां तुरंत टिकटों के दाम बढ़ा देती हैं। अब जबकि मई महीने के लिए एटीएफ की दरें स्थिर रखी गई हैं, तो यह पूरी उम्मीद है कि कंपनियां भी हवाई टिकटों के दाम में बढ़ोतरी नहीं करेंगी। इससे पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं को बढ़ावा मिलेगा और आम यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
