तिरुवनंतपुरम : दक्षिण भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता से भारी बारिश का दौर जारी है। मौजूदा समय में केरल आसमानी प्रकोप का सामना कर रहा है। पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने राज्य के सामान्य जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के मध्य और उत्तरी जिलों में हुई मूसलाधार बारिश ने न केवल नदियों का जलस्तर बढ़ा दिया है, बल्कि भूस्खलन और बाढ़ की ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि प्रशासन को बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने पड़े हैं। राज्य के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के अनुसार, बारिश से संबंधित घटनाओं में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोगों के लापता होने की सूचना है। खराब मौसम के कारण परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं।
बारिश की सबसे अधिक मार इदुक्की और कोट्टायम जिलों पर पड़ी है। इदुक्की में दो अलग-अलग स्थानों पर हुए विनाशकारी भूस्खलन में 65 वर्षीय सुमति और 77 वर्षीय प्रभाकरन नायर की जान चली गई। कोट्टायम के पूंजर इलाके में भी मलबे के नीचे दबने से एक युवक की मौत हो गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में अब तक 17 पक्के घर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं, जबकि 127 घरों को आंशिक क्षति पहुंची है।
तटीय इलाकों में समुद्री लहरों के उफान (Sea Incursion) ने भी स्थिति को गंभीर बना दिया है। एर्नाकुलम, अलाप्पुझा, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जैसे तटीय जिलों में समुद्र का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया है, जिससे तटीय आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा है।
राहत शिविर लगाए गए
स्थितियों की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रभावित जिलों के प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कैंप करने और बचाव कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। राज्य भर में कुल 65 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें फिलहाल 1,465 लोगों को आश्रय दिया गया है।
राहत कार्यों के लिए एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें, फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज, स्थानीय पुलिस और कोस्ट गार्ड के जवानों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, स्थानीय जन प्रतिनिधियों और स्वयंसेवकों की मदद से उन लोगों को निकाला जा रहा है जो अपने घरों में फंसे हुए हैं। पम्पा नदी के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि के कारण रानी, कोझेनचेरी और अरनमुला के कई इलाके पूरी तरह से शेष राज्य से कट गए हैं, जहाँ नावों के माध्यम से लोगों तक राशन और दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं।
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शैक्षणिक और प्रशासनिक असर
भारी बारिश और बाढ़ के कारण राज्य में बड़े पैमाने पर परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है। जनरल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 2 अगस्त को होने वाली 'स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट' (SET) और 'हायर सेकेंडरी इक्विवेलेंसी एग्जामिनेशन' को अगले आदेश तक टाल दिया है। इसी तरह, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, कोट्टायम ने भी 3 अगस्त तक की अपनी सभी निर्धारित परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। केरल लोक सेवा आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी बाढ़ या भूस्खलन के कारण अपनी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें भविष्य में दोबारा मौका दिया जाएगा।
मौसम विभाग का क्या है अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए राज्य के 8 जिलों—पथनमथिट्टा, कोट्टायम, इदुक्की, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड—के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। 'रेड अलर्ट' का अर्थ है 24 घंटे के भीतर 204 मिमी से अधिक की अत्यधिक भारी वर्षा। वहीं, एर्नाकुलम, त्रिशूर और पलक्कड़ जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है।
राज्य के विभिन्न बांधों, जैसे इदुक्की, पम्पा, और अन्य जलाशयों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिसके कारण एहतियातन इनके शटर खोल दिए गए हैं। राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। ऊंचे और जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
