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भारत-चीन सीमा व्यापार की धमाकेदार वापसी! 6 साल बाद लिपूलेख दर्रे से फिर शुरू हुआ बिजनेस

India China Border Trade: लिपूलेख दर्रे के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार 6 साल बाद वर्ष 2026 में पुनः शुरू हो गया है। 20 भारतीय व्यापारियों का पहला दल तकलाकोट मंडी पहुंचा, जिससे स्थानीय सीमांत अर्थव्यवस्था में भारी उत्साह है।

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6 साल बाद खुला लिपूलेख दर्रा! चीन के तकलाकोट पहुंचे भारतीय व्यापारी, सीमांत क्षेत्र में जश्न का माहौल (तस्वीर-AI)

India China Border Trade : भारत और चीन के बीच पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) स्थित ऐतिहासिक लिपूलेख दर्रे के जरिए होने वाला सीमा व्यापार करीब 6 साल के लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2026 में आखिरकार फिर से बहाल हो गया है। व्यापारिक गतिविधियों के पहले चरण में भारतीय व्यापारियों का पहला दल चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (Tibet Autonomous Region) में स्थित तकलाकोट मंडी पहुंच चुका है। चीनी अधिकारियों द्वारा आव्रजन (Immigration) और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से सीमा व्यापार का शुभारंभ कर दिया गया है। कोविड-19 महामारी और सीमा पर उपजे तनाव के कारण यह महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पिछले कई वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ा था। अब इसके दोबारा खुलने से उत्तराखंड के सीमांत इलाकों के स्थानीय निवासियों, हस्तशिल्पकारों और व्यापारियों में भारी उत्साह और खुशी की लहर है। इस सीमा व्यापार के बहाल होने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में भी सुधार देखने को मिलेगा।

तकलाकोट मंडी तक कैसा रहा भारतीय व्यापारियों का सफर?

धारचूला के उपजिलाधिकारी (SDM) आशीष जोशी के अनुसार, भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में 20 सदस्यीय एक दल सीमा व्यापार के लिए रवाना हुआ था। इस दल में 16 पंजीकृत व्यापारी और उनकी सहायता के लिए 4 हेल्पर शामिल थे। भारतीय व्यापारियों के इस दल ने सबसे पहले भारत-चीन सीमा के पास स्थित गुंजी इमीग्रेशन कार्यालय में आव्रजन और दस्तावेज जांच की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इसके बाद दल ने सीमा के निकट स्थित नाबीढांग में रात्रि विश्राम किया। शनिवार सुबह करीब 10:15 बजे व्यापारी लिपूलेख दर्रे पर पहुंचे, जहां चीनी अधिकारियों ने सीमा पर प्रवेश संबंधी औपचारिकताएं पूरी कराईं। इसके बाद भारतीय दल को तिब्बत में प्रवेश दिया गया, जहां से वे तकलाकोट मंडी पहुंचे और व्यापार की शुरुआत की।

बिना नया माल लिए क्यों रवाना हुए भारतीय व्यापारी?

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पहले चरण में चीनी प्रशासन ने बेहद सख्त नियमों का पालन किया है। चीन ने केवल उन्हीं भारतीय व्यापारियों को तिब्बत में प्रवेश की अनुमति दी है जो पहले से पंजीकृत हैं और जिन्हें पूर्व में सीमा व्यापार करने का अनुभव रहा है। इसी वजह से इस बार भारतीय व्यापारी अपने साथ भारत से नया सामान या व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गए हैं। दरअसल, 6 साल पहले जब व्यापार अचानक बंद हुआ था, तब कई व्यापारियों का सामान तकलाकोट की मंडियों और गोदामों में ही रह गया था। ऐसे में भारतीय व्यापारी फिलहाल तकलाकोट में पहले से मौजूद अपने पुराने माल के आधार पर ही लेन-देन और व्यापारिक गतिविधियां संचालित करेंगे।

अगले दलों को भेजने की तैयारी

धारचूला तहसील प्रशासन और भारतीय अधिकारी चीनी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अन्य पंजीकृत व्यापारियों और उनके सहायकों को तिब्बत भेजने के लिए चीनी अधिकारियों के साथ ई-मेल के जरिए बातचीत चल रही है। जैसे ही चीनी प्रशासन से अगले चरण के लिए औपचारिक अनुमति और क्लियरेंस प्राप्त होगी, वैसे ही बाकी पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट मंडी भेजा जाएगा। स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में व्यापार का दायरा और बढ़ेगा तथा नए माल को ले जाने की अनुमति भी मिल सकेगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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