केंद्र सरकार ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत मोदी कैबिनेट ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य संकट के समय भारतीय उद्योगों को आर्थिक मदद देना और उन्हें स्थिर बनाए रखना है। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने कृषि, तकनीक और आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़े बजट का प्रावधान किया है, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों को मजबूती मिल सके।
आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 में एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई तथा एयरलाइन क्षेत्र के लिए 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज का प्रावधान है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं:
पात्र उधारकर्ता वे होंगे जिनके पास 31 मार्च 2026 तक कार्यशील पूंजी की मौजूदा सीमा है। इसमें एमएसएमई और गैर-एमएसएमई दोनों शामिल हैं। साथ ही, वे शेड्यूल्ड यात्री एयरलाइन्स भी इसमें आएंगी जिनके ऊपर पहले से लोन चल रहा है, लेकिन शर्त यह है कि उनके खाते ठीक स्थिति (नॉन-डिफॉल्ट) में होने चाहिए।
गारंटी कवरेज : एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई के साथ-साथ एयरलाइन क्षेत्र के लिए 90 प्रतिशत। इसमें गारंटी शुल्क पूरी तरह से शून्य होगा।
सहायता की राशि: वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में जितनी अधिकतम कार्यशील पूंजी इस्तेमाल हुई है, उसका 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त लोन दिया जाएगा। इसकी सीमा अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक होगी।
वहीं, एयरलाइंस के लिए यह सीमा अलग है। उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त लोन मिल सकता है, लेकिन एक उधारकर्ता के लिए इसकी अधिकतम सीमा 1,500 करोड़ रुपये तय की गई है। इसके लिए कुछ खास शर्तें भी पूरी करनी होंगी। एमएसएमई और गैर-एमएसएमई (एयरलाइन क्षेत्र को छोड़कर) के लिए लोन की अवधि पहले भुगतान की तारीख से 5 साल तक होगी। इसमें शुरुआती 1 साल तक किस्त नहीं देनी होगी, यानी मोरेटोरियम की सुविधा मिलेगी।
एयरलाइन सेक्टर के लिए लोन की अवधि पहले भुगतान (संवितरण) की तारीख से 7 साल तक होगी। इसमें शुरू के 2 साल तक किस्त नहीं देनी होगी, यानी मोरेटोरियम की सुविधा मिलेगी।
इस योजना का मकसद पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से पैदा हुई मुश्किलों से कारोबारों को उबरने में मदद करना है। इसके जरिए व्यवसाय अपने कामकाज को जारी रख सकेंगे, नौकरियों को बचा पाएंगे और सप्लाई चेन को बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
