बिजनेस

ITR Refund Date: 31 जुलाई तक भरा है इनकम टैक्स रिटर्न? जानें कब तक खाते में आएंगे रिफंड के पैसे

31 जुलाई तक ITR फाइल करने वाले करदाताओं को अब टैक्स रिफंड का इंतजार है। यदि आपका e-Verification पूरा हो चुका है, तो आमतौर पर 7 से 30 दिनों में पैसा बैंक खाते में आ जाता है। जानें कब तक मिलेगा आपका रिफंड।

Image

जानें कब तक खाते में आएंगे रिफंड के पैसे

वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जमा करने वाले करदाताओं के मन में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके टैक्स रिफंड का पैसा बैंक खाते में कब तक क्रेडिट होगा। इनकम टैक्स विभाग के स्थापित नियमों और मौजूदा प्रोसेसिंग स्पीड के अनुसार, यदि आपने 31 जुलाई तक सफलतापूर्वक अपना रिटर्न फाइल कर दिया है और उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) भी समय पर पूरा कर लिया है, तो आम तौर पर आपका आईटीआर रिफंड 7 से 30 दिनों के भीतर प्रोसेस कर दिया जाता है।

कब मिलेगा रिफंड का पैसा?

सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC), बेंगलुरु द्वारा पिछले कुछ वर्षों में इस्तेमाल की जा रही आधुनिक टेक्नोलॉजी और ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम के कारण अब टैक्स रिफंड काफी तेजी से क्रेडिट होने लगे हैं। कई मामलों में जहां टैक्स कैलकुलेशन बिल्कुल साफ और सीधे होते हैं, वहां रिफंड की प्रक्रिया कुछ ही दिनों में पूरी हो जाती है, जबकि जटिल कटौती (Deductions) या अतिरिक्त टैक्स क्रेडिट दावों वाले मामलों में सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर द्वारा गहन जांच के कारण 4 से 6 सप्ताह का समय भी लग सकता है।

हालांकि, टैक्स रिफंड आपके बैंक खाते में सही समय पर तभी पहुंचेगा जब आपने आईटीआर दाखिल करने के तुरंत बाद या अधिकतम 30 दिनों के भीतर अपने रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया हो, क्योंकि बिना सत्यापन के इनकम टैक्स विभाग आईटीआर को प्रोसेस करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ता है।

आपके लिए क्या है जरुरी?

इसके अलावा, करदाताओं को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इनकम टैक्स पोर्टल पर उनका बैंक खाता पूरी तरह से वैलिडेट (Pre-validated) हो और खाता पैन (PAN) नंबर से लिंक हो, ताकि इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम (ECS) के माध्यम से रिफंड राशि बिना किसी तकनीकी बाधा के सीधे खाते में भेजी जा सके।

अगर किसी कारणवश आपके आईटीआर में दिए गए आंकड़ों और फॉर्म 26AS या एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दर्ज जानकारी के बीच कोई असमानता या मिसमैच (Mismatch) पाया जाता है, तो टैक्स विभाग द्वारा करदाता को नोटिस या इंटिमेशन भेजा जा सकता है, जिससे रिफंड मिलने में थोड़ी देरी हो सकती है। ऐसे में करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर नियमित रूप से अपने 'ITR Processing Status' और ई-मेल इनबॉक्स पर नजर बनाए रखें, ताकि रिफंड से जुड़ी किसी भी समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article