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10% गिरावट के बाद पाकिस्तानी स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग बंद, वाल स्ट्रीट फ्यूचर 1 फीसदी नीचे

तेहरान पर हमलों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर पूरी दुनिया के शेयर बाजारों पर दिख रहा है। हालांकि, सबसे बुरी हालत पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज की हुई है। जहां बेंचमार्क इंडेक्स KSE-30 खुलते ही करीब 10% टूट गया, जिसके बाद ट्रेडिंग रोकनी पड़ी।

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पाकिस्तान के शेयर बाजार में तबाही

Pakistan Stock Exchange Crashed: ईरान पर हमलों और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का KSE-30 इंडेक्स करीब 10% टूट गया। रिकॉर्ड गिरावट के बाद एक घंटे का ट्रेडिंग हॉल्ट लगा। जानें निवेशकों की चिंता और आगे के जोखिम। तेहरान में हमलों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य टकराव का असर सीधे कराची तक पहुंचा। सोमवार को Pakistan Stock Exchange का बेंचमार्क KSE-30 इंडेक्स खुलते ही करीब 9.8% तक लुढ़क गया, जिसके बाद एक घंटे के लिए ऑटोमैटिक ट्रेडिंग हॉल्ट लगाना पड़ा।

रिकॉर्ड गिरावट, एक घंटे का ट्रेडिंग हॉल्ट

गूगल फाइनेंस के डाटा के मुताबिक KSE-30 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 9.8% तक टूट गया था और फिर ट्रेडिंग बहाल होने के बाद गिरावट 7.3% पर आ गई। यह इंडेक्स के इतिहास की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट मानी जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी के हाई से यह इंडेक्स 20% से ज्यादा टूटकर अस्थायी तौर पर बेयर मार्केट जोन में पहुंच गया।

KSE 30

KSE 30

मिडिल ईस्ट तनाव और घरेलू अशांति का डबल असर

अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े। पाकिस्तान में भी प्रो-ईरान प्रदर्शन हुए, जिनमें कराची स्थित अमेरिकी दूतावास के बाहर हिंसक झड़पें हुईं और कम से कम 30 लोगों की मौत की खबर है। इस तरह मिडिल ईस्ट की टेंशन और देशभर में विरोध प्रदर्शनों ने बाजार को बुरी तरह हिला दिया। इसके साथ ही, अफगानिस्तान के साथ बढ़ते सीमा तनाव और “ओपन वॉर” जैसी स्थिति ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।

जबरन बिकवाली ने बढ़ाई गिरावट

अरब न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक लीवरेज्ड रिटेल अकाउंट्स में ब्रोकर्स की ओर से जबरन अनवाइंडिंग ने गिरावट को और तेज किया। हालांकि, कुछ फंड मैनेजर्स का मानना है कि कमजोर हाथ निकल चुके हैं और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में नीचे के स्तर पर खरीदारी लौट सकती है।

क्यों चिंतित हैं निवेशक?

मिडिल ईस्ट में संघर्ष का सीधा असर तेल सप्लाई और स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज जैसे अहम मार्गों पर पड़ सकता है। तेल कीमतों में तेजी पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई, चालू खाता घाटा और मुद्रा पर दबाव बढ़ा सकती है। पिछले साल स्थानीय शेयरों में करीब 50% की रैली आई थी, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक झटकों ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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